आंत हाथ में लिए आयुष्मान कार्ड के सहारे वृंदावन के अस्पताल पहुंचा मरीज, कर दिया वापस
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Mathura hospital news: मनोज का आरोप है कि डॉक्टर आंतों को उसी जगह पेट में रखने की डेढ़ लाख रुपए मांग रहे हैं. आयुष्मान कार्ड को ब्रज हेल्थ केयर एंड रिसर्च सेंटर के डॉक्टर और प्रबंधन मान्य नहीं कर रहे हैं. मनोज के चाचा सोरन जो की औदूता गांव के रहने वाले हैं. बच्चा परेशान है कोई भी सुनने को तैयार नहीं है. 2 महीने से इधर-उधर अस्पताल के चक्कर लगा रहे हैं. मेहनत मजदूरी करके अपना पेट पलते हैं. लेकिन यहां आयुष्मान कार्ड को साफ लेने से मना कर दिया.
मथुरा: वृंदावन का एक ऐसा अस्पताल जो प्रधानमंत्री के आयुष्मान कार्ड को लेकर मुफ्त इलाज का दावा करता है. वहीं आयुष्मान कार्ड अब एक प्लास्टिक का रैपर बन कर रह गया है. वृंदावन के एक अस्पताल में मरीज हर दिन अपनी जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं, लेकिन आयुष्मान कार्ड जो स्वास्थ्य के लिए कैशलेस हुआ करता था, वहीं अब इलाज में बाधा बन रहा है. ब्रज हेल्थ केयर के प्रबंधन ने आयुष्मान कार्ड को लेने से मना कर दिया है. मरीज अपनी बाहर निकली आंतों को लेकर दर-दर की ठोकने खा रहा है.
5 लाख तक कैशलेस इलाज की होती है गारंटी
प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने स्वास्थ्य सेवाओं को कैशलेस बनाने के लिए और बेहतर उपचार लोगों को मिले इसके लिए 500000 की गारंटी लेकर आयुष्मान कार्ड बनाया था. यह आयुष्मान कार्ड आप अस्पताल में दिखाकर 500000 तक का मुफ्त इलाज कर सकते हैं. लेकिन यह कार्ड अब लोगों के लिए जी का जंजाल बन चुका है. अस्पताल प्रबंधन इस कार्ड को देखकर ऐसे भागते हैं, जैसे उनके सामने कोई अदृश्य शक्ति आकर खड़ी हो गई हो. मथुरा के वृंदावन में बने निजी अस्पताल में आयुष्मान कार्ड से इलाज करने के दावे जो किए गए वह खोखले नजर आते हैं.
मरीजों से हो रहा खराब व्यवहार
जिस तरह से इस अस्पताल प्रबंधन के लोग उस आयुष्मान कार्ड को मरीज के हाथ से लेते हैं, तो उसके मुंह पर इस कार्ड को फेंक कर मार देते हैं. मरीज अपने हाथों में जान लेकर इधर-उधर की ठोकर खा रहा है. कोई सुनने को तैयार नहीं है. जब भी यह हॉस्पिटल मरीज अपनी पीड़ा लेकर जाता है, तो डॉक्टर ऐसे भागते हैं जैसे मरीज नहीं बल्कि उनके सर पर आफत आन पड़ी हो. ब्रज हेल्थ केयर एंड रिसर्च सेंटर के डॉक्टरों से यह मरीज हर तरह से विनती कर रहा है. यह ऑपरेशन करने की गुहार लगा रहा है. डॉक्टर हैं जिन्हें भगवान का दर्जा दिया गया, हो ऐसा लगता है आयुष्मान कार्ड को देखकर उनके अंदर राक्षसीय शक्ति प्रवेश कर गई हों. इन्हें केवल मतलब है तो सिर्फ कागज की उन नोटों से जो इन्हें और भी निर्दय बना देते हैं.
मरीजों ने सुनाई अपनी दास्तां
जान हथेली पर रखकर हॉस्पिटल के डॉक्टर के चैंबरों के चक्कर लगा रहा यह युवा मरीज ने लोकल 18 से बातचीत करते हुए अपनी उस दास्तां को सुनाया. इस युवा की दास्तान को सुनकर हर किसी के दिल में रहम जागा. लेकिन डॉक्टरों को बिल्कुल भी इसकी जान की परवाह नहीं. मनोज नाम के इस मरीज ने लोकल 18 की टीम को बताया कि डॉक्टरों ने ऑपरेशन करने के बाद आंतों को बाहर निकाल दिया. लेकिन जब उनको आयुष्मान कार्ड दिया गया, तो डॉक्टरों ने आंतों को उसी जगह पेट में अंदर रखने से मना कर दिया. मनोज की इस पीड़ा को कोई भी समझने को तैयार नहीं है और यह युवक अपनी जिंदगी और मौत से जूझ रहा है.
डेढ़ लाख कैश मांग रहे अस्पताल के डॉक्टर
मनोज का आरोप है कि डॉक्टर आंतों को उसी जगह पेट में रखने की डेढ़ लाख रुपए मांग रहे हैं. आयुष्मान कार्ड को ब्रज हेल्थ केयर एंड रिसर्च सेंटर के डॉक्टर और प्रबंधन मान्य नहीं कर रहे हैं. मनोज के चाचा सोरन जो की औदूता गांव के रहने वाले हैं. बच्चा परेशान है कोई भी सुनने को तैयार नहीं है. 2 महीने से इधर-उधर अस्पताल के चक्कर लगा रहे हैं. मेहनत मजदूरी करके अपना पेट पलते हैं. लेकिन यहां आयुष्मान कार्ड को साफ लेने से मना कर दिया. अब देखना यह होगा कि जिस तरह से प्रधानमंत्री के आयुष्मान कार्ड का इस अस्पताल में ना चलना एक सवाल या निशान खड़ा करता है.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें