आजादी के बाद पहली बार लाल किले में फहराया गया राष्ट्रध्वज मेरठ में ऐसे हुआ था तैयार
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National Flag History: मेरठ को 1857 की क्रांति के लिए जाना जाता है, लेकिन इस शहर का देश के तिरंगे से भी खास रिश्ता रहा है. आजादी के बाद जब पहली बार राष्ट्रध्वज फहराने की तैयारी हुई, तब मेरठ के क्षेत्रीय श्री गांधी आश्रम में तिरंगा तैयार किया गया था. बताया जाता है कि दिल्ली से आदेश मिलने के बाद आश्रम के कर्मचारियों ने लगातार 48 घंटे दिन-रात मेहनत कर राष्ट्रध्वज तैयार किया. खास बात यह है कि आज भी यहां तिरंगे को तय मानकों के अनुसार तैयार किया जाता है.
मेरठ: यूपी के मेरठ की पहचान सिर्फ 1857 की क्रांति से नहीं है. इस शहर का देश के राष्ट्रध्वज के इतिहास से भी गहरा नाता रहा है. आजादी के बाद जब पहली बार राष्ट्रध्वज फहराने की तैयारी की जा रही थी, तब मेरठ के क्षेत्रीय श्री गांधी आश्रम में भी तिरंगा तैयार किया गया था. इस ऐतिहासिक काम के लिए आश्रम के कर्मचारियों ने लगातार मेहनत की थी.
इसी इतिहास को जानने के लिए लोकल-18 की टीम ने क्षेत्रीय श्री गांधी आश्रम के मंत्री पृथ्वी सिंह रावत से खास बातचीत की. उन्होंने बताया कि देश की आजादी के बाद पहली बार राष्ट्रध्वज तैयार करने का काम मेरठ के इसी गांधी आश्रम में हुआ था. आजाद भारत में दिल्ली के लाल किले पर जो पहला तिरंगा फहराया गया वो मेरठ में ही बनाया गया था. यहां के क्षेत्रीय श्रीगांधी आश्रम में रातों रात ये ध्वज तैयार किया गया था. उसके बाद उस ध्वज को 15 अगस्त 1947 को दिल्ली के लाल किले पर पंडित जवाहरलाल नेहरू ने फहराया था.
आदेश मिलते ही 48 घंटे तक चला काम
पृथ्वी सिंह रावत ने बताया कि जब दिल्ली से क्षेत्रीय गांधी आश्रम में राष्ट्रध्वज तैयार करने का आदेश आया, तो काम में बिल्कुल देरी नहीं की गई. आश्रम के कर्मचारियों ने लगातार 48 घंटे दिन-रात काम करके तिरंगा तैयार किया. उन्होंने बताया कि उस समय गांधी आश्रम में पहले से ही झंडे तैयार किए जाते थे. हालांकि उन झंडों में चरखे का निशान हुआ करता था. बाद में राष्ट्रध्वज के रूप में अशोक चक्र वाले तिरंगे को अपनाया गया. इसी के बाद मेरठ के गांधी आश्रम में नए स्वरूप के राष्ट्रध्वज को तैयार किया गया.
1920 में हुआ था गांधी आश्रम का निर्माण
क्षेत्रीय श्री गांधी आश्रम का इतिहास भी काफी पुराना है. पृथ्वी सिंह रावत के अनुसार आश्रम का निर्माण वर्ष 1920 में हो गया था, जबकि यहां कामकाज वर्ष 1928 से शुरू हुआ. उस समय बनारस के बाद मेरठ का गांधी आश्रम देश के बड़े गांधी आश्रमों में गिना जाता था. आजादी के बाद भी राष्ट्रध्वज तैयार करने में इस आश्रम की अहम भूमिका रही. 26 जनवरी और 15 अगस्त जैसे राष्ट्रीय पर्वों के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों में भेजे जाने वाले तिरंगे भी यहां तैयार किए जाते रहे हैं.
आज भी रखा जाता है मानक का ध्यान
पृथ्वी सिंह रावत ने बताया कि मेरठ के क्षेत्रीय श्री गांधी आश्रम में आज भी राष्ट्रध्वज तैयार करते समय तय मानकों का विशेष ध्यान रखा जाता है. तिरंगे के कपड़े से लेकर उसके आकार और दूसरी जरूरी बातों को ध्यान में रखकर इसे तैयार किया जाता है. पहले की तुलना में अब मेरठ से कम संख्या में राष्ट्रध्वज दूसरे स्थानों के लिए भेजे जाते हैं, लेकिन तिरंगा तैयार करने की यह परंपरा आज भी जारी है.
मेरठ की धरती ने जहां देश के स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, वहीं आजादी के बाद देश के गौरव का प्रतीक तिरंगा तैयार करने का गौरव भी इस शहर से जुड़ा रहा. यही वजह है कि मेरठ के इतिहास में क्रांति के साथ तिरंगे की कहानी भी खास जगह रखती है.
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Seema Nath is a digital journalist and content creator with 6 years of experience in journalism, including ground reporting, regional news coverage and feature writing. She currently works as a Content Producer…
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