‘इस्लाम में कब्र हटाने का कोई नियम नहीं’, आगरा के मुस्लिम समुदाय में नाराजगी
आगरा: उत्तर प्रदेश के आगरा में एमजी रोड पर स्थित प्राचीन मजार को दूसरी जगह शिफ्ट कर दिया गया है. आगरा प्रशासन ने कड़ी मुस्तैदी और सभी धर्म की सहमति से यह निर्णय लिया है. दरअसल आगरा कॉलेज के पास बनी यह मजार जाम का कारण बनती थी, जिस कारण यह निर्णय लिया गया है. पहले मेट्रो पुल ना होने से सड़क काफी चौड़ी थी, लेकिन मेट्रो पुल बनने के बाद यहां आकर सड़क काफी पतली हो जाती थी, जिस कारण जाम की स्थिति उत्पन्न होती थी.
मजार को पास की ही एक छोटे मस्जिद में ट्रांसफर कर दिया है. इसी को लेकर लोकल 18 ने आगरा के हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोगों से खास बातचीत की. बातचीत के दौरान हिंदू लोगों ने कहा कि मजार सबकी सहमति से दूसरी तरफ शिफ्ट हुई है, इससे अब जाम से निजात मिलेगी और लोगों ने मुस्लिम समुदाय के सहयोग की भी तारीफ की.
‘एक ही समुदाय को किया जा रहा टारगेट’
वहीं दूसरी ओर कई मुस्लिम समुदाय के लोगों ने कहा कि यह मजार आजादी से पहले यहां थी. आगरा के वरिष्ठ मुस्लिम समुदाय के पदाधिकारी हाजी जमील अहमद ने कहा कि कई ऐसे रास्ते हैं, जहां हिंदू धार्मिक स्थल बीच रोड पर बने हुए हैं, क्या शासन उसे भी हटाएगा या सिर्फ एक ही समुदाय को टारगेट किया जा रहा है.
वहीं कुछ मुस्लिम नौजवानों ने कहा कि इस्लाम धर्म में एक बार मजार या कब्र बनने के बाद उसे दूसरी जगह शिफ्ट नहीं किया जाता है. उन्होंने कहा कि यह मजार हजजरत रुस्तम शहीद शाह रहमतल्लाह अलैह की थी, जो काफी प्राचीन है. मुस्लिम समुदाय के हाजी ने कहा कि यह आजादी से पहले यहां दफन की गई थी.
आजादी के समय की कब्र
आगरा के मुस्लिम समाज के एक वरिष्ठ व्यक्ति हाजी जमील कुरैशी ने कहा कि यह मजार 1947 से पहले की थी. उन्होंने कहा कि 1947 से पहले बनी यह मजार बुजुर्ग हजरत रुस्तम शहीद शाह रहमतल्लाह अलैह की थी, इसे नहीं हटाना चाहिए था. उन्होंने कहा कि आगरा के अन्य कई मार्गों पर कई धर्मों के स्थल बने हुए हैं. शासन और प्रशासन को एक नजरिये से सबको देखना चाहिए. यदि किसी को सड़क पर आवागमन में आने में दिक्कत है, तो सभी धर्मों के साथ एक जैसा व्यवहार होना चाहिए.
कब्र या मजार शिफ्ट करने का कोई नियम नहीं!
आगरा में मुस्लिम समाज के युवक नदीम नूर ने कहा कि मजार को इस्लाम धर्म में कभी किसी दूसरे स्थान पर शिफ्ट नहीं कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि ये जो मजार हटाई गई है, उसके ऊपर का पत्थर हटाया गया है, लेकिन कब्र तो उसके नीचे दफन है. ऐसे में उस स्थान को समतल कर दिया गया है. इस तरह मजार या कब्र को हटाकर कहीं और शिफ्ट करना आस्था के साथ खिलवाड़ है. हाजी जमील कुरैशी ने कहा कि सरकार को सबके साथ सामान्य व्यवहार करना चाहिए.
बचपन से देख रहे थे यह मजार
आगरा निवासी अनुज शिवहरे ने कहा कि वह बचपन से इस मजार को देख रहे थे. उन्होंने आगरा कॉलेज से शिक्षा ली है, तब भी यह मजार वहीं थी. उन्होंने कहा कि हमारे पिता जी बताते हैं कि यह मजार काफी प्राचीन है. लेकिन बदलते समय और विकास की रफ्तार के बीच यह मजार आ रही थी. सभी धर्म के लोगों की सहमति से इसे दूसरी तरफ शिफ्ट किया है, यह बहुत अच्छी बात है. इससे यह प्रतीत होता है कि आगरा में हिंदू-मुस्लिम भाईचारा आज तक बना हुआ है.
मेट्रो के बाद लगता था जाम
आगरा निवासी संतोष अग्रवाल ने कहा कि पहले यहां मेट्रो नहीं थी, जिस कारण यह मजार साइड में थी, क्योंकि रोड चौड़ा था, तो लोग इधर-उधर से आसानी से निकल जाते थे, लेकिन मेट्रो पीलर बनने के बाद सड़क पतली हुई और यह मजार बीच में आ गई, जिस कारण लंबे समय से इसे हटाने की कवयात चली आ रही थी. दोनों धर्मों के लोगों ने आपसी सहमति से इसे हटवाया है, यह बहुत अच्छा फैसला है. अब सभी लोगों को वहां लगने वाले जाम से मुक्ति मिलेगी.
अर्जुन गिर्ज ने कहा कि आगरा प्रशासन और शासन स्तर से इसे काफी सूजबूझ के साथ दोनों धर्मों की सहमति से हटाया गया है. यह काफी अच्छा निर्णय है. मुस्लिम समुदाय के लोगों का साथ मिला और ये हिन्दू-मुस्लिम भाईचारे की मिशाल को पेश करता है.