‘हम करेंगे इसका विरोध…’, राम मंदिर में CEO की नियुक्ति पर भड़के संत, कहा- ये ठीक नहीं
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Ram Mandir CEO Appointment Public Opinion : अयोध्या राम मंदिर को जल्द CEO मिलने वाला है. राम मंदिर का CEO बनने के लिए 5,585 लोगों ने आवेदन किया था. करीब 111 लोगों को इंटरव्यू के लिए बुलाया गया. 5,585 आवेदनों से शुरू हुई राम मंदिर के CEO की रेस अब तीन नामों तक पहुंचने वाली है. इस बीच, राम मंदिर में CEO को लेकर अयोध्या के संतों की तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली है. लोकल 18 से सीताराम दास ने कहा कि कि संत समाज मंदिर की व्यवस्था में किसी भी ऐसे बदलाव का विरोध करेगा, जिससे भविष्य में सरकारी हस्तक्षेप बढ़े. हनुमानगढ़ी के पुजारी देवेशा आचार्य ने CEO की जरूरत पर ही सवाल खड़े किए हैं.
अयोध्या. राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में पहली बार मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति की प्रक्रिया को लेकर अयोध्या में चर्चा तेज हो गई है. राम मंदिर परिसर में CEO पद के लिए इंटरव्यू की प्रक्रिया के बीच संत समाज ने इस नियुक्ति पर अपनी आपत्ति जताई है. संतों का कहना है कि राम जन्मभूमि एक धार्मिक संस्था है, इसलिए इसका संचालन धार्मिक परंपराओं और संत समाज की भावना के अनुरूप होना चाहिए. संत सीताराम दास ने CEO की नियुक्ति को लेकर चिंता जताते हुए लोकल 18 से कहा कि इसके पीछे सरकारीकरण की मंशा नहीं होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि अगर किसी प्रशासनिक पद की आवश्यकता है तो ऐसे व्यक्ति की नियुक्ति हो, जो वैष्णव परंपरा, धर्म और राम मंदिर की मर्यादाओं को समझता हो. पूरी निष्ठा और भक्ति भाव से सेवा कर सके. सीताराम दास ने कहा कि कि संत समाज मंदिर की व्यवस्था में किसी भी ऐसे बदलाव का विरोध करेगा, जिससे भविष्य में सरकारी हस्तक्षेप की आशंका बढ़े.
किस बात की आशंका सबसे ज्यादा
हनुमानगढ़ी के पुजारी देवेशा आचार्य ने CEO की नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए कहा कि राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र पहले से एक सुव्यवस्थित ट्रस्ट है. ट्रस्ट में अनुभवी पदाधिकारी और धार्मिक समिति में अयोध्या के वरिष्ठ संत मौजूद हैं. ऐसे में CEO की आवश्यकता क्यों पड़ी, यह स्पष्ट किया जाना चाहिए. उन्होंने आशंका जताई कि सरकारी तंत्र के माध्यम से मंदिरों के संचालन में हस्तक्षेप बढ़ सकता है. वरुण दास ने कहा कि राम जन्मभूमि कोई कंपनी नहीं, बल्कि एक धार्मिक संस्था और मंदिर है. इसलिए इसके संचालन में CEO के बजाय धर्माधिकारी और अनुभवी धार्मिक पदाधिकारियों की व्यवस्था होनी चाहिए.
जन्मभूमि आंदोलन वालों को मिले जगह
वरुण दास का कहना है कि अयोध्या की परंपराओं और राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े संतों को भी व्यवस्था में उचित भूमिका मिलनी चाहिए. संतों के बयानों से साफ है कि CEO की नियुक्ति केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि धार्मिक और सामाजिक दृष्टि से भी संवेदनशील मुद्दा बन गई है. अब सभी की नजर इस बात पर है कि ट्रस्ट CEO की भूमिका और अधिकारों को किस रूप में तय करता है.
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प्रियांशु गुप्ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…
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