इस महिला के तरीके से करें लौकी की खेती, नहीं लगेंगे रोग, बंपर हो जाएगी पैदावार

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इस महिला के तरीके से करें लौकी की खेती, नहीं लगेंगे रोग, बंपर हो जाएगी पैदावार


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Agricultural Tips: बिट्टन देवी ने बताया कि मचान विधि में लकड़ी और बांस की सहायता से एक ऊंचा ढांचा तैयार किया जाता है, जिस पर लौकी की बेलें चढ़ाई जाती है. इससे लौकी जमीन पर नहीं गिरती और खराब नहीं होती. साथ ही, …और पढ़ें

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प्रगतिशील महिला किसान बिट्टन देवी.

गोंडा: उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के विकासखंड पंडरी कृपाल के ग्राम सभा खमरिया हरबंस की एक महिला ने खेती का ऐसा तरीका अपनाया है. जिससे वह आज लाखों रुपये कमा रही है. यह महिला पारंपरिक खेती से हटकर मचान विधि से लौकी उगा रही है, जिससे फसल की गुणवत्ता बेहतर हो रही है और लागत भी कम हो रही है.

लोकल 18 से बातचीत में महिला किसान बिट्टन देवी ने बताया कि मचान बनाकर उस पर लौकी की बेल चढ़ाई जाती है. मचान की वजह से लौकी जमीन पर नहीं गिरती और खराब होने का खतरा कम हो जाता है. साथ ही, पौधे में हवा और धूप भी ठीक से लगती है, जिससे उत्पादन बढ़ता है.बिट्टन देवी ने बताया कि उन्होंने इंटर तक की पढ़ाई की है. वह पहले हाउसवाइफ थीं लेकिन पिछले एक साल से पानी संस्थान से जुड़कर खेती कर रही है. उन्होंने कहा कि वह इस समय लौकी की खेती कर रही है.

मचान विधि से खेती का आइडिया उन्हें पानी संस्थान से मिला. दिसंबर में नर्सरी लगाई गई और जनवरी के अंत में लौकी को लगाया गया.इस विधि से खेती में लागत बहुत कम आई है क्योंकि लौकी के बीज उद्यान विभाग द्वारा मुफ्त में मिले थे और मचान बनाने के लिए भी संसाधन पर्याप्त थे. उन्होंने बताया कि ऊपर लौकी की खेती होती है और नीचे प्याज लगाकर अतिरिक्त आय भी हो जाती है. बिट्टन देवी बताती हैं कि इस विधि से हर महीने लगभग 15 से 20 हजार रुपये की कमाई हो रही है.

बिट्टन देवी ने बताया कि मचान विधि में लकड़ी और बांस की सहायता से एक ऊंचा ढांचा तैयार किया जाता है, जिस पर लौकी की बेलें चढ़ाई जाती है. इससे लौकी जमीन पर नहीं गिरती और खराब नहीं होती. साथ ही, बेलों को पर्याप्त धूप और हवा मिलती है, जिससे फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों बढ़ते है.

उन्होंने कहा कि इस विधि से लागत और मेहनत दोनों कम लगती है. बिट्टन देवी ने यह तरीका यूट्यूब से सीखा और अपने खेत में आजमाया. शुरुआत में कुछ कठिनाइयां आईं, लेकिन अब उनकी लौकी स्थानीय बाजारों में अच्छे दाम पर बिक रही है. उनकी सफलता को देखकर गांव की अन्य महिलाएं भी इस पद्धति को अपनाने लगी है.

बिट्टन देवी की मेहनत और सोच न केवल उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बना रही है, बल्कि दूसरे किसानों के लिए भी प्रेरणा बन रही है. मचान विधि से खेती कर वह साबित कर रही हैं कि सही तरीकों से कम संसाधनों में भी बड़ी सफलता पाई जा सकती है.

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