उन्नत बीज, फिर भी फसल खराब क्यों? उड़द और मूंग की बुवाई से पहले किसान अपनाएं ये तरीका
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Agriculture News: शाहजहांपुर के कृषि विशेषज्ञ डॉ. हादी हुसैन खान ने उड़द और मूंग की खेती करने वाले किसानों को एक बड़ी चेतावनी दी है. अक्सर किसान अच्छी पैदावार के लिए महंगे बीज तो खरीद लाते हैं, लेकिन मिट्टी में पहले से मौजूद उन हानिकारक फंगस और बैक्टीरिया को नजरअंदाज कर देते हैं जो बीज के अंकुरित होते ही नन्हे पौधों को जड़ से सुखा देते हैं. इस समस्या का एकमात्र और सबसे सस्ता समाधान भूमि शोधन है. ट्राइकोडर्मा और स्यूडोमोनास जैसे जैविक कल्चर को गोबर की खाद के साथ मिलाकर मिट्टी में डालने से फसल के चारों ओर एक सुरक्षा कवच तैयार हो जाता है. बुवाई से पहले किया गया यह छोटा सा निवेश न केवल फसल को बीमारियों से बचाता है, बल्कि रासायनिक कीटनाशकों पर होने वाले हजारों रुपये के फालतू खर्च को भी पूरी तरह खत्म कर देता है.
शाहजहांपुर: खेती में सफलता केवल अच्छे बीजों और खाद पर निर्भर नहीं करती, बल्कि मिट्टी के स्वास्थ्य पर भी टिकी होती है. अक्सर किसान उड़द और मूंग जैसी फसलें बोते हैं, लेकिन मिट्टी में पहले से मौजूद हानिकारक वायरस, बैक्टीरिया और फंगस छोटे पौधों पर हमला कर देते हैं, जिससे फसलें शुरुआती दौर में ही बर्बाद हो जाती हैं. इस समस्या से बचने के लिए ‘भूमि शोधन’ जरूर करें. किसान जैविक तरीकों से मिट्टी को रोगों से मुक्त कर सकते हैं. इससे किसानों की फसल सुरक्षित रहेगी, और लागत भी कम लगेगी.
कृषि एक्सपर्ट डॉ. हादी हुसैन खान ने बताया कि बचाव उपचार से बेहतर उपाय है, मिट्टी में प्राकृतिक रूप से हानिकारक रोगाणु मौजूद होते हैं, जो बीज के अंकुरित होते ही उस पर हमला कर देते हैं. इससे फसल की गुणवत्ता और मात्रा दोनों प्रभावित होती हैं. ऐसे में किसान भूमि शोधन करें, भूमि शोधन के लिए ट्राइकोडर्मा, बवेरिया बेसियाना और स्यूडोमोनास फ्लोरेसेंस का इस्तेमाल करें. अगर किसान बुवाई से पहले इन जैविक कल्चर को गोबर की खाद के साथ मिलाकर मिट्टी में डालें, तो हानिकारक फंगस और बैक्टीरिया खत्म हो जाते हैं, जिससे फसल पूरी तरह स्वस्थ और सुरक्षित रहती है.
भूमि शोधन का महत्व
भूमि शोधन के लिए तीन मुख्य जैविक तत्वों ट्राइकोडर्मा, बवेरिया बेसियाना और स्यूडोमोनास फ्लोरेसेंस का इस्तेमाल करें. इन तीनों की 2.5 से 3 किलोग्राम मात्रा का उपयोग प्रति एकड़ के हिसाब से किया जाना चाहिए. ये मित्र फफूंद और बैक्टीरिया होते हैं जो मिट्टी में मौजूद शत्रु रोगाणुओं को नष्ट कर देते हैं. यह एक सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल तरीका है, जो रासायनिक कीटनाशकों की तुलना में अधिक प्रभावी और टिकाऊ नतीजे देता है.
खाद और कल्चर तैयार करने की विधि
भूमि शोधन के लिए लगभग 100 किलोग्राम सड़ी हुई गोबर की खाद की जरूरत होती है. खाद के तीन अलग-अलग ढेर बनाएं और उनमें ऊपर बताए गए तीनों कल्चर को अलग-अलग मिलाएं. इन ढेरों पर रोजाना पानी का हल्का छिड़काव करना चाहिए. लगभग 8 से 10 दिनों में इन ढेरों में काले, सफेद या हरे रंग की फंगस विकसित होने लगेगी. जब यह कल्चर पूरी तरह तैयार हो जाए.
बुवाई के समय इस्तेमाल का तरीका
तैयार किए गए इस कल्चर को खेत की पहली और दूसरी जुताई के समय समान रूप से फैला देना चाहिए. जब आप इस कल्चर को मिट्टी में मिलाते हैं, तो यह हानिकारक जीवाणुओं के खिलाफ एक सुरक्षा कवच बना देता है. इससे फसल में बीमारियां लगने की संभावना लगभग खत्म हो जाती है.
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सीमा नाथ 6 साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत शाह टाइम्स में रिपोर्टिंग के साथ की जिसके बाद कुछ समय उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम …और पढ़ें