एक छोटे गांव से शुरू हुआ सफर, आज ‘झुमका सिटी’ के नाम से मशहूर, बरेली का इतिहास

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एक छोटे गांव से शुरू हुआ सफर, आज ‘झुमका सिटी’ के नाम से मशहूर, बरेली का इतिहास


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Bareilly History: बरेली को “बांस बरेली” भी कहा जाता था, क्योंकि उस समय यहां बांस की बहुत अधिकता थी. यह इलाका बांस के लिए प्रसिद्ध था. लेकिन बरेली के इतिहास की जड़ें यहां के एक छोटे से शहर जगतपुर से जुड़ा है. आपको इससे जुड़ी पूरी कहानी बताने वाले हैं.

बरेली: बरेली में एक मोहल्ला है, जिसका नाम जगतपुर है और इसका इतिहास से बहुत गहरा संबंध है. बरेली के वरिष्ठ इतिहासकार डॉक्टर राजेश शर्मा बताते हैं कि बरेली पहले “कठेर” का इलाका हुआ करता था. 16वीं शताब्दी के दौरान जमींदार जगत सिंह यहां आए थे. बाद में उन्होंने यहां एक गांव बसाया, जिसका नाम जगतपुर रखा गया. यही जगतपुर धीरे-धीरे फैलते बरेली के रूप में विकसित हो गया.

इतिहासकारों के अनुसार, बरेली को “बांस बरेली” भी कहा जाता था, क्योंकि उस समय यहां बांस की बहुत अधिकता थी और यह इलाका बांस के लिए प्रसिद्ध था. राजा जगत सिंह के दो पुत्र थे, बास देव और बरल देव. बरेली नाम इन्हीं के नामों से मिलकर बना है. उस समय यह इलाका प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर था और बांस का उपयोग निर्माण और अन्य कार्यों में बड़े पैमाने पर किया जाता था.

प्रशासनिक और व्यापारिक दृष्टि से महत्वपूर्ण
जगतपुर के पास ही एक कचहरी बनाई गई थी और वहां किले का भी निर्माण कराया गया था, जिससे इस क्षेत्र का महत्व और बढ़ गया. धीरे-धीरे यह इलाका प्रशासनिक और व्यापारिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बनता गया. लगभग 1665 ईस्वी के आसपास यह क्षेत्र मुगलों के अधीन आ गया. मुगलों के आने से पहले पूरा इलाका कठेर क्षेत्र के रूप में जाना जाता था और यह राजा जगत सिंह की ओर से बसाया गया प्रमुख क्षेत्र था.

समय के साथ बरेली का विस्तार होता गया. शुरुआत में यह पुराना शहर जगतपुर से बढ़ते-बढ़ते सराय तक पहुंचा. इसके बाद यह कुतुबखाने तक फैल गया. उस समय यहां एक ही मुख्य बाजार हुआ करता था, जिसे आज बड़ा बाजार के नाम से जाना जाता है. यही बाजार उस दौर में व्यापार का प्रमुख केंद्र था, जहां दूर-दूर से व्यापारी आते थे.

यहां से जुड़ी बरेली के इतिहास की जड़ें
आज का बरेली एक विकसित शहर के रूप में सामने है, लेकिन इसके इतिहास की जड़ें जगतपुर से ही जुड़ी हुई हैं. पुराने समय की बात करें तो यह एक छोटा-सा बसा हुआ इलाका था, जो धीरे-धीरे बढ़कर एक बड़े शहर में बदल गया. जगतपुर न सिर्फ बरेली के इतिहास का शुरुआती बिंदु है, बल्कि यह उस विरासत का प्रतीक भी है, जिसने इस शहर को पहचान दी.

आज भी जब हम बरेली के विकास को देखते हैं, तो यह समझ आता है कि किस तरह एक छोटे से गांव से शुरू होकर यह शहर व्यापार, संस्कृति और इतिहास का महत्वपूर्ण केंद्र बन गया. जगतपुर की कहानी बरेली के विकास की कहानी है, जो समय के साथ बदलती रही. लेकिन अपनी ऐतिहासिक पहचान को आज भी संजोए हुए है.

About the Author

आर्यन सेठ

आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.



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