कद्दू बेचने आए किसान के साथ किया कुछ ऐसा, फेमस हो गए मुरादाबाद के ये कलेक्टर
मुरादाबाद: वैसे तो इतिहास में बहुत-सी ऐसी चीजे हैं, जो आज भी मौजूद हैं और लोगों को कुछ ना कुछ नई शिक्षा देती है. ऐसी ही एक कहानी है मुरादाबाद में ब्रिटिश काल में मौजूद एक कलेक्टर की, जिसके राउंड पर निकलते ही सब कांप उठते थे. उन्होंने एक किसान के साथ ऐसा काम किया था, जो आज भी इतिहास में दर्ज है और उनकी ओर से किए गए काम को आज भी एक सबक के रूप में लिया जाता है. लोगों के बीच आज भी उस घटना की बात होती है.
हार्डी नाम के कलेक्टर की मशहूर किवदंती
इतिहासकार डॉ. राजीव सक्सेना ने बताया कि आजादी के पहले से जुड़ा एक बहुत ही मजेदार किस्सा है. मुरादाबाद में देश आजाद होने से पहले एक हार्डी नाम के कलेक्टर थे. वह नाम के अनुरूप अपने कठोर अनुशासन और काम के प्रति काफी एक्टिव थे. साथ ही साथ उन्हें न्याय प्रिय भी माना गया है. उनकी न्याय प्रियता, जनसुनवाई और जनता की भलाई का एक नमूना एक कहानी के तौर पर आज भी मौजूद है, जिसे हर कोई दोहराता है.
उन्होंने बताया कि जहां आज ऑफिसर्स हॉस्टल है, वहां पहले कभी चुंगी हुआ करती थी. कांठ और अगवानपुर की तरफ से आने वाले लोगों से चुंगी कर वसूला जाता था. वहां एक मुंशी जी बैठा करते थे. मुंशी जी बहुत ही लालची स्वभाव के व्यक्ति थे. उनके बारे में बहुत सारी कहानियां प्रचलित हैं. वह व्यापारियों और किसानों को काफी परेशान करते थे.
यह हुआ था मामला
हुआ यूं था कि एक किसान दो बड़े-बड़े कद्दू जिसे काशीफल भी कहा जाता है, उसे बेचने के लिए मुरादाबाद शहर की ओर आ रहा था. मुंशी जी ने चुंगी पर उसे रोककर पूछा कि तुम यह क्या लेकर आए हो. उसने कहा कि मैं यह कद्दू लेकर आया हूं और मैं इसे शहर में बेचने जा रहा हूं. मुंशी जी ने कहा कि इस कद्दू की पहले तुम्हें चुंगी चुकानी होगी, उसके बाद तुम्हें शहर में इसे बेचने जाने दिया जाएगा.
किसान ने कहा कि साहब मैं इसे घर से लेकर सीधा यहां आया हूं. अभी मुझे कोई आमदनी नहीं हुई है, तो मैं आपको चुंगी कैसे चुकाऊंगा. उन्होंने कहा कि चुंगी मैं चुका देता हूं और तुम एक कद्दू मेरे पास रख दो. दूसरे कद्दू को बेचकर जो तुम्हें पैसा मिले, वह चुंगी तुम मुझे चुका देना. उस मुंशी के मन में लालच भरा हुआ था और वह जानता था कि इस कद्दू को बेचकर उससे ज्यादा पैसे नहीं मिलेंगे और मुझे सस्ते में कद्दू मिल जाएगा. इस प्रकार वह किसान एक कद्दू देकर दूसरे कद्दू को लेकर शहर की तरफ चल दिया.
कलेक्टर देखते ही ले गए थे घर
किसान जब रास्ते में एक कद्दू लेकर जा रहा था, उस समय कलेक्टर हार्डी गस्त पर निकले हुए थे. उनके बारे में यह मशहूर था कि वह रोजाना शहर में गस्त करते थे. जब वह गस्त करते थे तो सड़कें सुनसान हो जाती थीं और पुलिस वाले भी सतर्क हो जाते थे. जब कलेक्टर साहब ने सुनसान सड़क पर किसान को कंधे पर कद्दू ले जाते देखा तो उन्होंने पूछा कि तुम किधर जा रहे हो. उसने कहा कि मैं कद्दू बेचने जा रहा हूं.
कलेक्टर ने कहा कि एक ही कद्दू लेकर आए हो तो किसान ने जवाब दिया कि नहीं साहब, मैं कद्दू तो दो लाया था. लेकिन एक कद्दू रास्ते में चुंगी पर मुंशी जी ने रखवा लिया कि तुमने चुंगी नहीं दी है तो यह कद्दू यहां पर छोड़ जाओ. जिस कीमत का यह कद्दू बिके, उतनी कीमत चुका देना. इस प्रकार उन्होंने मेरा एक कद्दू रख लिया. हार्डी तुरंत समझ गया था कि मुंशी ने इसके साथ चीटिंग की है. हार्डी के पास इस तरह की शिकायत पहले से ही थी.
किसान को घोड़े पर बिठाकर ले गए थे कलेक्टर
कलेक्टर ने कहा कि अच्छा यह बात है तो मेरे साथ घोड़े पर बैठो और वह अपने साथ घोड़े पर बिठाकर किसान को अपने आवास पर ले गए और किसान को एक सोने की मोहर दे दी. कलेक्टर ने कहा कि यह लो हम तुम्हारे कद्दू की कीमत एक गोल्ड कॉइन देते हैं. उसके बाद वह किसान को लेकर उसी चुंगी पर चले गए और कलेक्टर ने उस चुंगी वाले मुंशी से कहा कि तुमने कहा था कि जो एक कद्दू की कीमत हो, वह मुझे दे देना.
कलेक्टर ने कहा कि अब मैंने इन्हें इनके एक कद्दू के बदले एक गोल्ड कॉइन दिया है. अब तुम दूसरे वाले कद्दू की कीमत एक गोल्ड कॉइन दो. मुंशी ने जब देखा कि कलेक्टर ने एक कद्दू की कीमत सोने की मोहर चुकाई है, तो मुंशी समझ गया और उसकी हवा उड़ गई. वह कलेक्टर के पैरों में गिर गया कि हुजूर मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई, मुझे माफ कर दीजिए.
मुंशी को निकाला जिले के बाहर
हार्डी बहुत न्याय प्रिय था. उसने कहा कि बेईमानी के लिए कोई माफी नहीं है. अब बेहतर तरीका यही है कि तुम्हें जिले से बाहर किया जाता है. 24 घंटे के अंदर-अंदर तुम जिला छोड़कर चले जाओ. मैं इस तरह की बेईमानी सहन नहीं करूंगा और जनता के साथ अन्याय नहीं होने दूंगा. यह किस्सा आज भी किवदंती के रूप में मशहूर है. इस प्रकार यह कलेक्टर आज भी मशहूर है. इनके किस्से कई जगह आज भी प्रचलित हैं.