कादूनाला जंगल में आज भी भटकती है शहीदों की आत्माएं, यहां रात तो छोड़िए दिन में भी आने से कतराते हैं लोग

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कादूनाला जंगल में आज भी भटकती है शहीदों की आत्माएं, यहां रात तो छोड़िए दिन में भी आने से कतराते हैं लोग


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Amethi News: अमेठी के मुसाफिरखाना क्षेत्र में कादूनाला स्थल वीरों की धरती है, जहां 1857 की क्रांति में 600 से अधिक क्रांतिकारियों ने शहादत दी थी. आज भी लोग यहां जाने से कतराते हैं.

अमेठी: हमारे आसपास कई रोचक और चर्चित स्थान होते हैं जिनके बारे में हर कोई जानना चाहता है और इनका अपना एक इतिहास होता है. ऐसा ही एक स्थान अमेठी में है, जहां आज भी देर शाम के बाद लोग जाने से कतराते हैं. वजह यह है कि यह स्थान रोचक होने के साथ-साथ आजादी से जुड़ा हुआ है. इस स्थान पर 50, 100 नहीं बल्कि 600 से अधिक लोगों ने अपनी शहादत और कुर्बानियां दी थीं. इस स्थान पर आज भी लोग जाने से पहले उस मंजर को सोचकर कांप उठते हैं.

600 सिरों को काटकर पाट दिया गया था कुआं

हम बात कर रहे हैं मुसाफिरखाना क्षेत्र के कादूनाला स्थल की. कादूनाला स्थल वीरों की धरती कहा जाता है. 1857 की क्रांति में 8 और 9 मार्च को यहां पर 600 से अधिक क्रांतिकारियों को अंग्रेजों ने मौत के घाट उतारकर उनके सर को एक कुएं में पाट दिया था. इस कारण आज भी लोग यहां जाने से सहम जाते हैं. यह स्थान आजादी से जुड़ा है. 1857 की क्रांति से 1947 तक यहां पर कई भीषण युद्ध हुए और आखिरकार यहां के वीर सपूतों ने देश को आजादी दिलाई और अपनी जान की कुर्बानियां देकर अपना नाम इतिहास के अमिट पत्थरों में दर्ज करवा दिया.

वीरों की धरती है ‘कादूनाला’

मुसाफिरखाना क्षेत्र के इतिहासकार और स्थानीय निवासी अवधेश सिंह बताते हैं कि कादूनाला वीरों की धरती कही जाती है. यहां पर 600 से अधिक लोगों ने अपनी शहादत दी. घुसपैठियों की वजह से कई बार युद्ध हुए, लेकिन आखिरकार उन्हें अपनी जान की कुर्बानियां देनी पड़ीं. अपने लहू का कतरा कतरा बहाकर यहां के लोगों ने इस स्थान को ऐतिहासिक भूमि बना दिया. उन्होंने कहा कि एक कुआं यहां पर मौजूद है, जहां पर 600 से अधिक लोगों के सर को काटकर उस कुएं को उनके सरों से पाट दिया गया था. आज भी हम लोग उन वीरों को नमन करते हैं और क्रांति दिवस के रूप में यह स्थान जाना जाता है.

शहीदों की आत्माएं

अमेठी जिले के इस क्षेत्र में आज भी कई प्रमाणित धरोहर मौजूद हैं. लोग इस स्थान पर नहीं जाना चाहते, क्योंकि उन्हें लगता है कि आज भी शहीदों की आत्माएं यहां मौजूद हैं. इसके साथ ही एक पुल है जिसे आखिरकार बंद करना पड़ा. वजह थी कि वहां पर कई हादसे हुए. इसके अलावा आज भी यहां पर एक नदी बहती है और एक प्राचीन स्मारक स्थल भी बना है जो लोगों के लिए ऐतिहासिकता का केंद्र है.

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