किसान बकरी की इन 4 नस्लों का करें पालन, नोटों से खचाखच भर जाएगाी तिजोरी

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किसान बकरी की इन 4 नस्लों का करें पालन, नोटों से खचाखच भर जाएगाी तिजोरी


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Goat Farming: पशु चिकित्सालय इंद्रजीत वर्मा के मुताबिक बकरियों को रखने के लिए साफ, हवादार और सूखी जगह का होना जरूरी है.उनके बाड़े में पानी निकलने की उचित व्यवस्था होनी चाहिए. ताकि बरसात में गीलापन न रहे.बकरियों को हरा चारा, दाना, भूसा और मिनरल मिक्स खिलाना चाहिए

बकरी पालन ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में आय का बेहतर साधन है.इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि बकरियों को पालने के लिए बहुत बड़े निवेश की जरूरत नहीं होती है .छोटे स्तर पर भी किसान बकरियां पालकर अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं.बकरी पालन शुरू करने के लिए सबसे पहले स्वस्थ नस्ल की बकरियां चुनना जरूरी है, जो दूध, मांस या बकरी के बच्चों के हिसाब से लाभदायक हों.

पशु चिकित्सा के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखने वाले रायबरेली जिले के राजकीय पशु चिकित्सालय शिवगढ़ के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर इंद्रजीत वर्मा (MVSC मथुरा) लोकल 18 से बात करते हुए बताते हैं कि बकरी पालन का व्यवसाय लोगों के लिए कम लागत में अधिक मुनाफे वाला व्यवसाय है. परंतु इसकी सही जानकारी और उन्नत नस्ल का चयन ही इसकी सबसे बड़ी खासियत होती है. साथ ही बकरी पालन करने वाले किसान इससे जुड़ी कुछ जरूरी बातों का विशेष ध्यान रखें. जिससे उन्हें किसी भी प्रकार के नुकसान का सामना न करना पड़े.

बकरी के लिए उचित जगह और आहार
इंद्रजीत वर्मा के मुताबिक बकरियों को रखने के लिए साफ, हवादार और सूखी जगह का होना जरूरी है.उनके बाड़े में पानी निकलने की उचित व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि बरसात में गीलापन न रहे.बकरियों को हरा चारा, दाना, भूसा और मिनरल मिक्स खिलाना चाहिए.इसके अलावा समय-समय पर टीकाकरण और इलाज कराना भी जरूरी है, ताकि बीमारी का खतरा न रहे.

नस्ल और प्रजनन से फायदा
इंद्रजीत वर्मा बताते हैं कि हमारे भारत देश में बकरी की कई नस्लें मशहूर हैं जैसे – जमुनापारी, सिरोही, बरबरी और बीटल. ये नस्लें दूध और मांस उत्पादन के लिए जानी जाती हैं. एक बकरी साल में दो बार बच्चे दे सकती है और एक बार में 2-3 बच्चे देना आम बात है. इस वजह से बकरी पालन में तेजी से संख्या बढ़ती है और किसान को अच्छा मुनाफा मिलता है

बकरी पालन से आय के साधन
बकरी पालन से सिर्फ मांस और दूध ही नहीं, बल्कि बकरी का गोबर भी खेतों के लिए जैविक खाद का काम करता है. बकरी का दूध दवा के रूप में भी उपयोग होता है, जिससे इसका मूल्य और बढ़ जाता है.बाजार में बकरी के बच्चों की अच्छी कीमत मिलती है. त्योहारों और शादी-विवाह के सीजन में बकरियों की मांग और अधिक हो जाती है, जिससे किसानों को और ज्यादा लाभ मिलता है.

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