किसी ने उगाए मोती तो कोई बना हनी मैन… मिलिए मुरादाबाद के टॉप 5 किसानों से

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किसी ने उगाए मोती तो कोई बना हनी मैन… मिलिए मुरादाबाद के टॉप 5 किसानों से


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Top Progressive Farmers of Moradabad: मुरादाबाद के 5 प्रगतिशील किसानों ने जैविक खेती, मोती पालन और मधुमक्खी पालन में अपनी अनूठी मिसाल पेश की है. 33 लाख रुपये का पैकेज छोड़कर मोती पालन करने वाले डॉ. अयूब हुसैन से लेकर वैज्ञानिक की नौकरी छोड़ ऑर्गेनिक फार्मिंग करने वाले युवा शुभांकर सिंह तक, इन किसानों ने खेती को नए दौर का लाभकारी बिजनेस बना दिया है. जानिए हनी मैन नेपाल सिंह, मोती उगाने वाले ओमप्रकाश सिंह और प्राकृतिक खेती के मास्टर आरेन्द्र बड़गोती की कहानी.

मुरादाबाद में पांच ऐसे किसान हैं, जिन्होंने खेती-किसानी के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है. इन किसानों ने सिर्फ एक तरह की खेती नहीं, बल्कि कई तरह की फसलों, ऑर्गेनिक और जैविक खेती में महारत हासिल की है. इनमें आरेन्द्र बड़गोती, ओमप्रकाश सिंह, नैपाल सिंह, शुभांकर सिंह और डॉ. अयूब हुसैन शामिल हैं. ये किसान आधुनिक तकनीक और प्राकृतिक तरीकों से खेती कर लोगों के लिए प्रेरणा बने हुए हैं.

मुरादाबाद के प्रगतिशील किसान आरेन्द्र बड़गोती खेती के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना चुके हैं. उन्होंने प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा देकर किसानों के सामने एक सफल उदाहरण पेश किया है. उनका मानना है कि रासायनिक खादों पर निर्भरता कम करके कम लागत में बेहतर मुनाफा कमाया जा सकता है. इसी सोच के साथ वे प्राकृतिक खेती, गो आधारित कृषि पद्धतियों और मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने वाली तकनीकों पर लगातार काम कर रहे हैं.

आरेन्द्र बड़गोती समय-समय पर किसानों को प्रशिक्षण देकर प्राकृतिक खेती के फायदे बताते हैं और उन्हें खेती को लाभकारी बनाने के लिए प्रेरित करते हैं. फसलों के साथ-साथ कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण और बिक्री पर भी उनका विशेष ध्यान रहता है, जिससे किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिल सके. खेती में नए प्रयोग, कम लागत, बेहतर उत्पादन और पर्यावरण संरक्षण को साथ लेकर चलना उनकी सबसे बड़ी खासियत है. आज वे मुरादाबाद के साथ आसपास के जिलों के किसानों के लिए भी प्रेरणा बने हुए हैं.

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मुरादाबाद के युवा किसान शुभांकर सिंह ने वैज्ञानिक के रूप में अपना करियर छोड़कर खेती-किसानी को चुना. उन्होंने साबित किया कि आधुनिक तकनीक के साथ खेती भी एक सम्मानजनक और लाभकारी पेशा बन सकती है. वैज्ञानिक सोच के साथ वे खेती में नए प्रयोग, आधुनिक तकनीक और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपना रहे हैं. उनका उद्देश्य कम लागत में अधिक उत्पादन के साथ मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखना और किसानों की आय बढ़ाना है. वे बेहतर बीज, फसल प्रबंधन, सिंचाई और वैज्ञानिक तरीके से खेती करने पर जोर देते हैं.

शुभांकर सिंह खेती को सिर्फ पारंपरिक काम नहीं, बल्कि शोध और नए प्रयोगों का माध्यम मानते हैं. इसी सोच के चलते वे युवाओं को खेती से जुड़ने के लिए प्रेरित कर रहे हैं. वे दर्जनों वैरायटी की ऑर्गेनिक चीजों का उत्पादन कर लोगों तक शुद्ध और प्राकृतिक उत्पाद पहुंचाने का काम कर रहे हैं. उनका उद्देश्य खेती को आधुनिक, लाभकारी और आत्मनिर्भर बनाना है.

मुरादाबाद के प्रगतिशील किसान ओमप्रकाश सिंह अपनी अनोखी और नई तकनीक वाली खेती के लिए जाने जाते हैं. उन्होंने पारंपरिक खेती के साथ मोती पालन और ऑर्गेनिक खेती को भी सफलतापूर्वक अपनाया है. तालाबों में सीप के जरिए मोती तैयार करने की तकनीक से उन्होंने खेती को अतिरिक्त आय का जरिया बनाया है. इसके अलावा वे जैविक खाद, गोबर की खाद और प्राकृतिक तरीकों से सब्जियों, फलों और अन्य फसलों का उत्पादन करते हैं. कम लागत, अच्छी गुणवत्ता और पर्यावरण संरक्षण उनकी खेती की खास पहचान है.

मुरादाबाद के किसान नैपाल सिंह शहद उत्पादन के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना चुके हैं. जिले में लोग उन्हें हनी मैन के नाम से भी जानते हैं. उन्होंने मधुमक्खी पालन को किसानों की आय बढ़ाने का बेहतर माध्यम बनाया है. नैपाल सिंह अन्य किसानों को भी मधुमक्खी पालन का प्रशिक्षण देकर स्वरोजगार के लिए प्रेरित करते हैं. उनका मानना है कि फसलों के साथ मधुमक्खी पालन करने से परागण बेहतर होता है, उत्पादन बढ़ता है और अतिरिक्त आमदनी भी मिलती है. इसी वजह से वे युवाओं और किसानों के लिए प्रेरणा बने हुए हैं.

मुरादाबाद के डॉ. अयूब हुसैन ने भी खेती और कृषि से जुड़े कामों में अपनी अलग पहचान बनाई है. उन्होंने 33 लाख रुपये के पैकेज वाली नौकरी छोड़कर मोती पालन का काम शुरू किया था. आज वे मोती पालन के क्षेत्र में मुरादाबाद ही नहीं, बल्कि आसपास के जिलों में भी अपनी पहचान बना चुके हैं. उन्होंने इस काम को सफल बिजनेस में बदलकर खुद को आत्मनिर्भर बनाया है और अन्य लोगों को भी रोजगार से जोड़ने का काम कर रहे हैं.

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