कुंदरू समझकर न खा लें ये फल, पड़ जाएंगे मुसीबत में, जानें कैसे करें असली और नकली की पहचान?
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Wild Kundru Fruit: कुंदरू की सब्जी तो आपने कई बार खाई होगी, लेकिन क्या आपने कभी कुंदरू जैसी दिखने वाली जंगली बेल के बारे में सुना है? गांवों और खेतों की मेड़ों पर उगने वाला यह फल पहली नजर में बिल्कुल कुंदरू जैसा दिखाई देता है, लेकिन असल में यह खाने योग्य नहीं होता. ग्रामीण इलाकों में इसे कौवा का मामा के नाम से जाना जाता है. इसकी सबसे बड़ी खासियत और खतरा यही है कि यह देखने में कुंदरू जैसा लगता है, जिससे कई बार लोग पहचान नहीं पाते. किसान बताते हैं कि इसके फल पर सफेद धारियां और कड़वा स्वाद इसकी पहचान है.
सुल्तानपुर: हरी-भरी बेल पर उगने वाली कुंदरू की सब्जी तो आपने खूब खाई होगी, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसी जैसी दिखने वाली एक जंगली बेल भी होती है, जिसे देखकर कई बार लोग धोखा खा जाते हैं. यह जंगली फल देखने में बिल्कुल कुंदरू जैसा लगता है, लेकिन खाने के लायक नहीं होता. ग्रामीण इलाकों में इसे कौवा का मामा कहा जाता है. खास बात यह है कि जहां कुंदरू स्वादिष्ट सब्जी के रूप में खाई जाती है, वहीं इसकी जंगली किस्म से सावधान रहने की जरूरत होती है.
किसान योगेश कुमार पांडेय बताते हैं कि खेतों, मेड़ों और झाड़ियों में कई बार ऐसी बेल उग जाती है, जिसके फल देखने में कुंदरू जैसे ही लगते हैं. शुरुआत में इसका रंग हरा होता है, लेकिन पकने के बाद यह लाल रंग का हो जाता है. यही वजह है कि कई लोग इसे पहचान नहीं पाते. देसी कुंदरू और इस जंगली किस्म में अंतर समझना जरूरी है, क्योंकि दोनों दिखने में काफी मिलते-जुलते हैं.
सफेद धारियों से कर सकते हैं पहचान
जंगली कुंदरू यानी कौवा का मामा की पहचान इसके फल और बेल से की जा सकती है. इसके फल पर अक्सर सफेद धारियां दिखाई देती हैं और नीचे का हिस्सा थोड़ा नुकीला होता है. वहीं इसका स्वाद काफी कड़वा होता है. अनुभवी किसान और ग्रामीण लोग इसकी बेल, पत्तियों और फल को देखकर आसानी से पहचान लेते हैं कि यह खाने वाला कुंदरू है या जंगली किस्म.
इसलिए पड़ा नाम कौवा का मामा
ग्रामीण क्षेत्रों में इस जंगली फल को कौवा का मामा नाम से जाना जाता है. माना जाता है कि इसका फल इतना कड़वा होता है कि इंसान इसे खाना पसंद नहीं करते. कई इलाकों में इसे पक्षियों से जोड़कर यह नाम दिया गया. कुछ जगहों पर इसे तिलकोर के नाम से भी जाना जाता है.
पत्तियों से बनाई जाती है खास डिश
हालांकि इसके फल खाने योग्य नहीं माने जाते, लेकिन कुछ क्षेत्रों में इसकी कोमल पत्तियों का इस्तेमाल किया जाता है. बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में इसकी पत्तियों से तिलकोर का तरुआ और पकौड़े बनाए जाते हैं. लोग इसे स्वाद के साथ खाते हैं, लेकिन इसके लिए सही पौधे की पहचान होना बेहद जरूरी है.
कुंदरू समझकर न खाएं, पहचान जरूरी
कुंदरू आजकल घरों में खूब पसंद की जाने वाली सब्जियों में शामिल है. इसकी खेती भी बड़े स्तर पर होती है और लोग इसकी सब्जी, भरवा कुंदरू और दूसरी डिश बनाकर खाते हैं. लेकिन खेत या झाड़ियों में उगने वाले किसी भी कुंदरू जैसे फल को बिना पहचान के नहीं खाना चाहिए. जंगली और खाने वाले कुंदरू में अंतर समझना बहुत जरूरी है. किसी भी जंगली फल या सब्जी का सेवन करने से पहले स्थानीय किसान या जानकार व्यक्ति से सलाह जरूर लें.
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Seema Nath is a digital journalist and content creator with 6 years of experience in journalism, including ground reporting, regional news coverage and feature writing. She currently works as a Content Producer…
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