क्या भारत लौट आया पोलियो वायरस? गाजियाबाद के 1.5 लाख घरों का क्यों हो रहा सर्वे, जानें
गाजियाबाद: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से एक ऐसी खबर सामने आई थी, जिसने लोगों की चिंता बढ़ा दी. दरअसल, गाजियाबाद के डुंडाहेड़ा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) से लिए गए सैंपल में वैक्सीन-डिराइव्ड पोलियोवायरस टाइप-1 (VDPV1) की मौजूदगी मिली थी. इससे स्वास्थ्य महकमे में हड़ंकप मच गया और आनन-फानन में टीमों को जांचों के लिए जमीन पर उतार दिया. एक हफ्ते के अंदर अंदर 30 हजार घरों का सर्वे पूरा कर लिया गया है.
दो हजार से अधिक बच्चों की जांच
इस सर्वे में 5,421 घरों की जांच की गई, जिनमें पांच साल से कम उम्र के 2,590 बच्चे थे. स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इन 12 इलाकों में से दो (बुलंदशहर और शास्त्री नगर) का सर्वे पूरा हो चुका है. इनके अलावा जिन अन्य इलाकों में सर्वे किया जा रहा है उनमें राज नगर, दौलतपुरा, पंचवटी कोट गांव, घुकना, हिंडन विहार, कैला भट्टा, मिर्जापुर, विजय नगर 1, विजय नगर 2 और खराती नगर शामिल हैं. इन इलाकों में लगभग 1.5 लाख लोग रहते हैं.
5 जून का मामला
गौरतलब है, यह वायरस 5 जून को विजय नगर सीवेज पंपिंग स्टेशन से लिए गए एक सैंपल में मिला था. इसके बाद, डिस्ट्रिक्ट सर्विलांस यूनिट ने सीवेज ड्रेनेज नेटवर्क का मैप तैयार किया और प्रभावित इलाके में आने वाले 12 इलाकों की पहचान की. यह सर्वे मंगलवार को शुरू हुआ और उत्तर प्रदेश सरकार, नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (NCDC) और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) इसकी बारीकी से निगरानी कर रहे हैं. हालांकि, अच्छी बात यह है कि मिला हुआ स्ट्रेन ज्यादा खतरनाक नहीं है. एक अधिकारी ने कहा, इससे पहले वाराणसी और मेघालय में भी ऐसे मामले सामने आए थे. हर दो हफ्ते में रूटीन सैंपल कलेक्शन और टेस्ट किए जाते हैं.
सबसे पहले समझिए क्या हुआ?
गाजियाबाद के डुंडाहेड़ा STP से सीवर का नमूना लिया गया.
जांच में वैक्सीन-डिराइव्ड पोलियोवायरस टाइप-1 (VDPV1) मिला.
यह वायरस ओरल पोलियो वैक्सीन (OPV) से जुड़ा हुआ पाया गया.
अभी तक किसी बच्चे में पोलियो का मामला सामने नहीं आया है.
स्वास्थ्य विभाग, केंद्र सरकार और WHO मिलकर स्थिति पर नजर रख रहे हैं.
क्या भारत में फिर से पोलियो लौट आया है?
नहीं. भारत अभी भी पोलियो मुक्त देश है. देश में आखिरी वाइल्ड पोलियो वायरस का मामला 2011 में मिला था. इसके बाद लगातार तीन साल तक कोई मामला सामने नहीं आने पर WHO ने 2014 में भारत को पोलियो-मुक्त घोषित किया था. सीवर में वायरस मिलने का मतलब यह नहीं है कि पोलियो की बीमारी वापस आ गई है.
वैक्सीन-डिराइव्ड पोलियोवायरस (VDPV) क्या होता है?
पोलियो की ओरल वैक्सीन (OPV) में वायरस का कमजोर रूप होता है. यह शरीर में जाकर प्रतिरोधक क्षमता विकसित करता है. वैक्सीन लेने के बाद यह कमजोर वायरस कुछ समय तक आंतों में रहता है और मल के जरिए बाहर निकल सकता है. आमतौर पर इससे कोई खतरा नहीं होता, लेकिन अगर किसी क्षेत्र में टीकाकरण कम हो और वायरस लंबे समय तक फैलता रहे तो उसमें आनुवंशिक बदलाव (Mutation) हो सकते हैं. दुर्लभ मामलों में यही वायरस फिर फैलने की क्षमता हासिल कर लेता है. इसे वैक्सीन-डिराइव्ड पोलियोवायरस कहा जाता है.
सीवर में वायरस क्यों खोजा जाता है?
इसे पर्यावरणीय निगरानी (Environmental Surveillance) कहा जाता है. इसके तहत सीवर के पानी की जांच की जाती है ताकि वायरस की मौजूदगी का पता बीमारी फैलने से पहले ही चल सके. विशेषज्ञों के मुताबिक, पोलियो के अधिकतर संक्रमित लोगों में कोई लक्षण नहीं दिखते. ऐसे में सीवर की निगरानी शुरुआती चेतावनी की तरह काम करती है.
क्या बच्चों को खतरा है?
फिलहाल ऐसा कोई संकेत नहीं मिला है. स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि यह वायरस गैर-घातक (Non-virulent) है. किसी बच्चे में पोलियो संक्रमण या लकवा जैसी स्थिति सामने नहीं आई है. फिर भी एहतियात के तौर पर निगरानी बढ़ाई गई है.
पोलियो के लक्षण क्या हैं?
- बुखार
- थकान
- सिरदर्द
- उल्टी
- गर्दन में अकड़न
- मांसपेशियों में दर्द
- हाथ-पैरों में कमजोरी
- अचानक लकवा (Acute Flaccid Paralysis)
- स्थायी विकलांगता
माता-पिता को क्या करना चाहिए?
- बच्चों का पोलियो टीकाकरण समय पर कराएं.
- पल्स पोलियो अभियान में जरूर हिस्सा लें.
- टीके की कोई भी खुराक न छोड़ें.
- स्वास्थ्य विभाग के सर्वे में सहयोग करें.
- अफवाहों पर ध्यान न दें.