गाय-भैंस में अगर दिखाई दे ये लक्षण, तो पशुपालक हो जाएं सावधान, तुरंत करें ये काम, वरना हो जाएगा बड़ा नुकसान
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Animal Husbandry Tips: रायबरेली के डॉ इंद्रजीत वर्मा ने गलघोंटू बीमारी के लक्षण, बचाव और टीकाकरण पर जोर दिया. बरसात में पशुपालकों को सावधानी और सरकारी अभियान का लाभ लेने की सलाह दी गई.
पशु चिकित्सा के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखने वाले रायबरेली जिले के राजकीय पशु चिकित्सालय शिवगढ़ के प्रभारी अधिकारी डॉ इंद्रजीत वर्मा एमवीएससी मथुरा लोकल 18 से बात करते हुए बताते हैं कि गलघोंटू बीमारी का लक्षण भैंस में सबसे ज्यादा दिखता है. हालांकि गाय में भी यह बीमारी देखने को मिलती है. बरसात के मौसम में पशुशाला के आसपास अगर बरसात का पानी जमा होता तो इससे इस रोग के होने की संभावना अधिक हो जाती है . बाढ़ के इलाकों में भी यह रोग देखा जाता है .
इस रोग के मुख्य लक्षणों में तेज बुखार पशु को अचानक तेज बुखार (105-107 डिग्री F) हो जाता है.सांस लेने में तकलीफ, नाक और मुंह से स्राव, और गले, गर्दन और छाती में सूजन शामिल हैं.यह रोग ‘पास्चुरेला मल्टोसीडा’ नामक जीवाणु के संक्रमण से होता है. यह जीवाणु आमतौर पर श्वसन तंत्र में मौजूद होता है, लेकिन प्रतिकूल परिस्थितियों में सक्रिय हो जाता है.
डॉ. इंद्रजीत वर्मा ने बताया कि गलघोंटू से बचाव का सबसे कारगर उपाय समय पर टीकाकरण है. पशुओं को हर साल टीका लगवाना चाहिए, खासकर बरसात शुरू होने से पहले. इसके अलावा, बीमार पशु को तुरंत अलग कर देना चाहिए ताकि संक्रमण अन्य पशुओं में न फैले. पशुशाला की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें और जलभराव से बचें. आगे की जानकारी देते हुए बताते हैं कि सरकार द्वारा गला घोटू रोग से बचाव के लिए वृहद स्तर पर टीकाकरण अभियान चलाया जाता है.जो भी किसान पशुपालन का काम करते हैं. वह अपने नजदीकी पशु चिकित्सालय से संपर्क कर अपने पशुओं का आसानी से समय रहते टीकाकरण अवश्य करा लें.जिससे उन्हें किसी भी प्रकार के नुकसान का सामना न करना पड़े.
मीडिया फील्ड में एक दशक से अधिक समय से सक्रिय. वर्तमान में News-18 हिंदी में कार्यरत. 2010 से नई दुनिया अखबार से पत्रकारिता की शुरुआत की. फिर हिंदुस्तान, ईटीवी भारत, शुक्रवार पत्रिका, नया इंडिया, वेबदुनिया समे…और पढ़ें
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