गेहूं की बुवाई से 72 घंटे पहले उल्टे पैर करें ये काम! खेत में नहीं उगेगा कोई खरपतवार, जानें ये धांसू तरीका

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गेहूं की बुवाई से 72 घंटे पहले उल्टे पैर करें ये काम! खेत में नहीं उगेगा कोई खरपतवार, जानें ये धांसू तरीका


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Wheat Cultivation Tips : रबी सीजन की शुरुआत के साथ ही किसान गेहूं की बुवाई में जुट गए हैं, लेकिन फसल की सबसे बड़ी परेशानी खरपतवार यानी मंडूसी (फालारिस माइनर) बनती है. अगर शुरुआत में ही सावधानी बरती जाए, तो इसे पूरी तरह खत्म किया जा सकता है.एक्सपर्ट के अनुसार, गेहूं की बुवाई से 72 घंटे पहले ये उपाय कारगर होता है.

सहारनपुर : रबी सीजन में गेहूं की फसल के साथ एक बड़ी समस्या मंडूसी खरपतवार (जिसे गुल्ली डंडा या कनकी भी कहा जाता है) के रूप में सामने आती है. यह भारत में गेहूं की सबसे हानिकारक घास मानी जाती है, जो खासकर धान-गेहूं फसल चक्र वाले खेतों में तेजी से फैलती है. मंडूसी के पौधों की गेहूं की तरह होते हैं, ऐसे में इनकी पहचान करना कठिन हो जाता है. गौरतलब है कि मंडूसी के पौधे हल्के हरे रंग की होती है और इसके तनों से लाल रंग का रस निकलता है. यह खरपतवार गेहूं की पैदावार को काफी हद तक प्रभावित कर देती है.

माना जाता है कि मंडूसी का बीज भारत में उस समय आया जब साठ के दशक में देश ने मैक्सिको से बौनी किस्म की गेहूं का बीज बड़े पैमाने पर आयात किया था. उच्च पैदावार देने वाली इन किस्मों के साथ-साथ मंडूसी को भी बढ़ने के लिए अनुकूल वातावरण मिल गया. खासकर अधिक खाद और लगातार सिंचाई वाले खेतों में. परिणामस्वरूप यह खरपतवार तेजी से फैल गया. वैज्ञानिक रिपोर्टों के अनुसार, मंडूसी गेहूं की पैदावार को 10 से 100 प्रतिशत तक प्रभावित कर सकती है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ता है.

करें ये 5 काम

  • खेत में हमेशा खरपतवार-मुक्त बीज का उपयोग करें.
  • गेहूं की बुवाई 15 नवंबर से पहले करें.
  • बीजाई लाइन में 18 सेंटीमीटर की दूरी पर करें
  • पौधों की संख्या बढ़ाने के लिए आड़ी-तिरछी बुवाई करें.
  • साथ ही खाद को बीज से 2-3 सेमी नीचे डालें
  • मंडूसी के फूल बनने से पहले ही उसे उखाड़कर पशु चारे के रूप में उपयोग करें.

इस तरह से करें दवा का छिड़काव
कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी डॉ. आई.के. कुशवाहा बताते हैं कि मंडूसी अब दवाओं के प्रति प्रतिरोधक हो चुकी है. इसलिए किसान अगर लगातार दो-तीन साल तक मंडूसी को बीज बनने से पहले काटकर नष्ट कर दें, तो यह खेतों से पूरी तरह खत्म हो जाती है.इसके अलावा, बुवाई से 72 घंटे पहले मोनेंट मोर नामक दवा (800 मिलीलीटर प्रति एकड़, 200 लीटर पानी में मिलाकर) खेत में छिड़काव करनी चाहिए. यह दवा तीन प्रकार के साल्ट में उपलब्ध होती है और मंडूसी की वृद्धि को प्रभावी रूप से रोकती है. छिड़काव करते समय उल्टा चलते हुए स्प्रे का प्रयोग करें और बुवाई के बाद 20-22 दिन में पहली सिंचाई अवश्य करें.

mritunjay baghel

मीडिया फील्ड में 5 साल से अधिक समय से सक्रिय. वर्तमान में News-18 हिंदी में कार्यरत. 2020 के बिहार चुनाव से पत्रकारिता की शुरुआत की. फिर यूपी, उत्तराखंड, बिहार में रिपोर्टिंग के बाद अब डेस्क में काम करने का अनु…और पढ़ें

मीडिया फील्ड में 5 साल से अधिक समय से सक्रिय. वर्तमान में News-18 हिंदी में कार्यरत. 2020 के बिहार चुनाव से पत्रकारिता की शुरुआत की. फिर यूपी, उत्तराखंड, बिहार में रिपोर्टिंग के बाद अब डेस्क में काम करने का अनु… और पढ़ें

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