गोंडा की गिरिजा देवी पारंपरिक खेती छोड़ सांवा और रागी की खेती, न पानी, न खाद, बंपर पैदावार
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गोंडा की किसान गिरिजा देवी बताती हैं कि सांवा और रागी की खेती में बुवाई के बाद न तो अतिरिक्त सिंचाई की जरूरत पड़ती है और न ही रासायनिक खाद की. बरसात के पानी से ही फसल अच्छी तरह तैयार हो जाती है. बुवाई के करीब चार महीने बाद इसकी कटाई कर ली जाती है, जिससे कम लागत में अच्छा उत्पादन मिलता है. गिरिजा देवी बताती है कि रागी और सांवा दोनों ही मोटे अनाज की श्रेणी में आते हैं. इनमें कई तरह के पोषक तत्व पाए जाते हैं. रागी में कैल्शियम, आयरन और फाइबर भरपूर मात्रा में होता है, जबकि सावा भी स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है. यही कारण है कि आजकल लोग इन अनाजों से बने आटा, दलिया और अन्य खाद्य पदार्थों का अधिक उपयोग कर रहे हैं.
गोंडा: उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के विकासखंड झंझरी की एक महिला किसान ने पारंपरिक खेती से अलग हटकर सांवा और रागी जैसे मोटे अनाज की खेती शुरू की है. उनकी मेहनत अब रंग ला रही है. इस खेती से उन्हें अच्छी आमदनी होने के साथ-साथ दूसरे किसानों को भी नई फसलें अपनाने की प्रेरणा मिल रही है. लोकल 18 से बातचीत के दौरान प्रगतिशील महिला किसान गिरिजा देवी का कहना है कि पहले वह सामान्य फसलों की खेती करती थीं, लेकिन बाद में उन्होंने सांवा और रागी की खेती करने का फैसला किया. और इस समय लगभग एक बीघा में सावा और रागी जैसे मोटे अनाज की खेती कर रही हैं. भविष्य में स्कोर आगे बढ़ाना है.
न पानी, न खाद, फिर भी शानदार पैदावार
किसान गिरिजा देवी बताती हैं कि सांवा और रागी की खेती में बुवाई के बाद न तो अतिरिक्त सिंचाई की जरूरत पड़ती है और न ही रासायनिक खाद की. बरसात के पानी से ही फसल अच्छी तरह तैयार हो जाती है. बुवाई के करीब चार महीने बाद इसकी कटाई कर ली जाती है, जिससे कम लागत में अच्छा उत्पादन मिलता है. गिरिजा देवी बताती है कि रागी और सांवा दोनों ही मोटे अनाज की श्रेणी में आते हैं. इनमें कई तरह के पोषक तत्व पाए जाते हैं. रागी में कैल्शियम, आयरन और फाइबर भरपूर मात्रा में होता है, जबकि सावा भी स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है. यही कारण है कि आजकल लोग इन अनाजों से बने आटा, दलिया और अन्य खाद्य पदार्थों का अधिक उपयोग कर रहे हैं. बढ़ती मांग का फायदा किसानों को भी मिल रहा है.
पोषण संबंधी जागरूकता है जरूरी
महिला किसान ने बताया कि इन फसलों की खेती में लागत बहुत कम आती है. यदि समय पर बुवाई और खरपतवार नियंत्रण किया जाए तो अच्छी पैदावार मिलती है. उन्होंने अन्य किसानों से भी मोटे अनाज की खेती अपनाने की अपील की है. गिरिजा देवी का कहना है कि बदलते मौसम और बढ़ती पोषण संबंधी जागरूकता को देखते हुए सांवा और रागी जैसी फसलों का महत्व लगातार बढ़ रहा है. सरकार भी मोटे अनाज की खेती को बढ़ावा दे रही है. ऐसे में किसान इन फसलों की खेती कर अपनी आय बढ़ा सकते हैं. गोंडा की इस महिला किसान की सफलता यह साबित करती है कि नई सोच और सही खेती की तकनीक अपनाकर किसान कम लागत में बेहतर उत्पादन और अच्छी कमाई कर सकते हैं.
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Rajnish Kumar Yadav is a digital journalist and content publisher with over seven years of experience in print and digital media. He is currently working with News18 Digital (Local18) as a Content Publisher, wh…
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