गोरखपुर की आराधना सामत जूट के प्रोडक्ट हैंडबैग डीएम साहब को भी आया था पसंद, जानें

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गोरखपुर की आराधना सामत जूट के प्रोडक्ट हैंडबैग डीएम साहब को भी आया था पसंद, जानें


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गोरखपुर की आराधना सामत जूट के प्रोडक्ट बनाकर महिलाओं के लिए मिसाल बनीं. उनके बनाए हैंडबैग डीएम को भी पसंद आए. वे हर महीने 25-50 हजार रुपये कमाती हैं. आराधना बताती हैं कि वह खास तौर पर जूट से बने प्रोडक्ट तैयार करवाती हैं. इसके लिए उनकी अलग-अलग टीमें काम करती हैं. कुछ लोग जूट से खूबसूरत ज्वेलरी तैयार करते हैं, तो कुछ वाटर बोतल के कवर और बैग बनाने का काम करते हैं. इस तरह जूट के सामान्य से दिखने वाले रेशों को आकर्षक और उपयोगी प्रोडक्ट में बदलकर बाजार तक पहुंचाया जा रहा है.

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गोरखपुर: गोरखपुर की रहने वाली आराधना सामत की कहानी उन महिलाओं के लिए मिसाल है, जो घर की जिम्मेदारियों के बीच अपने हुनर को नई पहचान देना चाहती हैं. जहां कई महिलाएं घर तक सीमित रह जाती हैं, वहीं आराधना ने अपने हुनर और मेहनत के दम पर जूट के प्रोडक्ट तैयार करने का काम शुरू किया और आज उनके बनाए सामान शहर के अधिकारियों तक पहुंच रहे हैं.

जूट से तैयार हो रहे कई तरह के प्रोडक्ट

आराधना बताती हैं कि वह खास तौर पर जूट से बने प्रोडक्ट तैयार करवाती हैं. इसके लिए उनकी अलग-अलग टीमें काम करती हैं. कुछ लोग जूट से खूबसूरत ज्वेलरी तैयार करते हैं, तो कुछ वाटर बोतल के कवर और बैग बनाने का काम करते हैं. इस तरह जूट के सामान्य से दिखने वाले रेशों को आकर्षक और उपयोगी प्रोडक्ट में बदलकर बाजार तक पहुंचाया जा रहा है.

डीएम को पसंद आया जूट का हैंडबैग

आराधना के बनाए जूट के हैंडबैग की खास पहचान बन रही है. वह बताती हैं कि उनके यहां तैयार किया गया जूट का हैंडबैग गोरखपुर के डीएम को भी दिया गया था, जिसे उन्होंने काफी पसंद किया. इसके अलावा शहर के कई बड़े अधिकारी भी उनके यहां जरी से बने छोटे बैग और दूसरे प्रोडक्ट के ऑर्डर देते हैं. ऑर्डर मिलने के बाद आराधना अपनी टीम के साथ उन्हें तैयार करवाकर ग्राहकों तक पहुंचाती हैं. आराधना के मुताबिक जूट का प्रोडक्ट बनाना जितना आसान दिखाई देता है, असल में उसमें उतनी ही मेहनत लगती है. खासकर किसी नए प्रोडक्ट का डिजाइन तैयार करना सबसे चुनौतीपूर्ण काम होता है. ग्राहक की पसंद, डिजाइन और उसकी उपयोगिता को ध्यान में रखते हुए प्रोडक्ट तैयार किया जाता है. यही वजह है कि हर ऑर्डर उनके लिए एक नई चुनौती लेकर आता है.

हर महीने 25 से 50 हजार रुपये तक की कमाई

आराधना बताती हैं कि, मेहनत के बाद इस काम से उन्हें अच्छी आमदनी भी हो रही है. वह महीने में करीब 25 से 50 हजार रुपये तक कमा लेती हैं. जूट से बने छोटे प्रोडक्ट की कीमत करीब 100 रुपये से शुरू होती है, जबकि बैग जैसे बड़े और डिजाइनर प्रोडक्ट 500 से 1000 रुपये तक में बिकते हैं. आराधना अब अपने काम को और बड़े स्तर पर ले जाना चाहती हैं। उनका लक्ष्य जूट के प्रोडक्ट का प्रोडक्शन बढ़ाने के साथ-साथ इसकी वैरायटी में भी इजाफा करना है. उनका मानना है कि अगर मेहनत, हुनर और सही दिशा में काम किया जाए तो घर से शुरू किया गया छोटा कारोबार भी अपनी अलग पहचान बना सकता है.

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Rajneesh Kumar Yadav

Rajnish Kumar Yadav is a digital journalist and content publisher with over seven years of experience in print and digital media. He is currently working with News18 Digital (Local18) as a Content Publisher, wh…

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