गोरखपुर से सिलीगुड़ी सिर्फ 6 घंटे में! यूपी-बिहार-WB एक्सप्रेसवे से बदल जाएगी तस्वीर
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उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल के लोगों को बहुत बड़ी खुशखबरी मिलने जा रही है. तीनों राज्यों से होकर गुजरने वाला एक्सप्रेसवे न केवल इन राज्यों के बीच बेहतरीन कनेक्टिविटी देगा बल्कि गोरखपुर से सिलीगुड़ी पहुंचने में अब 14-15 नहीं बल्कि सिर्फ 6-8 घंटे लगेंगे. आइए जानते हैं इस एक्सप्रेसवे के बारे में..
तीन राज्यों से होकर गुजरने वाला एक्सप्रेसवे जल्द ही यूपी, बिहार और पश्चिम बंगाल की तस्वीर बदल देगा. हवा की रफ्तार वाले इस प्रस्तावित एक्सप्रेसवे से गोरखपुर से सिलीगुड़ी पहुंचने में बस 6 घंटे का वक्त लेगा. यह एक्सप्रेसवे 32,000 करोड़ रुपये की लागत बन रहा है. हाल ही में इसके निर्माण कार्य को तेज किया गया है. लोगों के लिए खुशखबरी है कि इस हाई-स्पीड कॉरिडोर के पूरा होने के बाद यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा, माल ढुलाई मजबूत होगी और क्षेत्र के प्रमुख आर्थिक व पर्यटन केंद्रों तक पहुंच आसान हो जाएगी.

News24 की रिपोर्ट के मुताबिक, फिलहाल इस एक्सप्रेसवे को छह लेन वाले ग्रीनफील्ड कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जा रहा है, हालांकि इसके विस्तार की योजना अभी से तैयार कर ली गई है और भविष्य में आठ लेन तक बढ़ा दिया जाएगा. इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब 32,000 करोड़ रुपये है. और इस पर 120 किमी प्रति घंटे की हवा की रफ्तार से वाहनों की आवाजाही हो सकेगी.

यह एक्सप्रेसवे तीन राज्यों के प्रमुख क्षेत्रों को जोड़ते हुए पूर्वी उत्तर प्रदेश से उत्तरी पश्चिम बंगाल तक बिहार के रास्ते एक बेहतरीन सड़क कॉरिडोर बनाएगा. इसका रूट गोरखपुर के पास जगदीशपुर से शुरू होकर सिलीगुड़ी तक जाएगा. इस शहर को भारत के पूर्वोत्तर का प्रवेश द्वार माना जाता है. सिलीगुड़ी की भारत-नेपाल सीमा के पास स्थिति और ‘चिकन नेक’ के नाम से मशहूर संकरी सिलीगुड़ी कॉरिडोर के नजदीक होने के कारण यह एक्सप्रेसवे क्षेत्रीय पहुंच को तो बेहतर बनाएगा ही पूर्वोत्तर राज्यों से कनेक्टिविटी को भी मजबूत करेगा.
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यह एक्सप्रेसवे तीन राज्यों के 12 जिलों से गुजरेगा. उत्तर प्रदेश में एक्सप्रेसवे लगभग 84 किमी लंबा होगा और गोरखपुर, देवरिया और कुशीनगर जिलों से होकर जाएगा. सबसे लंबा हिस्सा बिहार में होगा, जहां एक्सप्रेसवे करीब 416 किमी तक फैला होगा. यह रूट पश्चिम चंपारण, शिवहर, पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी, सुपौल, मधुबनी, अररिया और किशनगंज जैसे जिलों से होकर गुजरने की उम्मीद है. ऐसे में इससे बिहार राज्य को सबसे बड़ा फायदा मिलने वाला है.

इस परियोजना का सबसे बड़ा फायदा गोरखपुर से सिलीगुड़ी के बीच यात्रा समय में कमी होगा. अभी सड़क मार्ग से यह सफर आमतौर पर 14 से 15 घंटे में पूरा होता है. एक्सप्रेसवे शुरू होने के बाद यह समय घटकर लगभग 6 से 8 घंटे रह जाएगा, जिससे यात्रियों और व्यापारिक ट्रैफिक के लिए रास्ता काफी तेज और सुविधाजनक हो जाएगा. वहीं अपनी गाड़ी से लोग इस बेहतर सफर का लुत्फ उठा सकेंगे.

गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे को गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे से जोड़ा जाएगा, जो आगे पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जुड़ता है. इससे उत्तर भारत में एक बड़ा हाई-स्पीड रोड नेटवर्क बनेगा, जिससे प्रमुख शहरों के बीच पहुंच आसान होगी और माल व यात्रियों की आवाजाही भी बेहतर होगी. अधिकारियों का मानना है कि यह कॉरिडोर क्षेत्र में पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों को बड़ा बढ़ावा दे सकता है. सिलीगुड़ी दार्जिलिंग, गंगटोक और कई पूर्वोत्तर राज्यों जैसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों का मुख्य प्रवेश द्वार है.

बेहतर सड़क कनेक्टिविटी से बिहार और आसपास के क्षेत्रों के यात्रियों को फायदा मिलेगा, जो अक्सर इन जगहों पर जाते हैं. यह परियोजना शहरी केंद्रों, सीमा क्षेत्रों और प्रमुख आर्थिक कॉरिडोर के बीच पहुंच को बेहतर बनाकर व्यापार, लॉजिस्टिक्स और क्षेत्रीय विकास को भी मजबूत करेगी.
निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है और गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे पूर्वी भारत के सबसे महत्वपूर्ण सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में से एक बनने जा रहा है. तीन राज्यों को हाई-स्पीड कॉरिडोर से जोड़कर यह परियोजना क्षेत्र में आवाजाही, यात्रा समय और दीर्घकालिक आर्थिक विकास को बेहतर बनाएगी.