ग्रेजुएशन की पढ़ाई के बाद बने डिलीवरी बॉय, मगर कंपनी की मनमानी ने बढ़ाई मुश्किल
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Firozabad News: जब युवाओं को पढ़ाई-लिखाई के बाद भी रोजगार नहीं मिल पाता है, तो उनमें से कई युवा डिलिवरी ब्वॉय का काम करने लगते हैं. अब युवाओं को कम सैलरी में परिवार का गुजारा करना मुश्किल हो गया है. वहीं युवाओं को समय से ऑर्डर पहुंचाने पर कम इंसेटिंव भी मिल रहा है. इसको लेकर उन्होंने अपना दर्द बयां किया है.
फिरोजाबाद: फिरोजाबाद में घर-घर ऑनलाइन ऑर्डर की डिलिवरी करने वाले युवाओं को कम पेआउट मिलने के कारण आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है. कंपनी की तरफ से प्रति किमी कम पेमेंट मिलने से युवओं के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है. युवा बाइक की मदद से जल्दी ऑर्डर डिलिवर करने के लिए जाते हैं, जिसमें उनको कई तरह का खतरा रहता है. अब युवाओं को कम सैलरी में परिवार का गुजारा करना मुश्किल हो गया है. वहीं युवाओं को समय से ऑर्डर पहुंचाने पर कम इंसेटिंव भी मिल रहा है. इसको लेकर युवाओं ने अधिकारियों से भी बातचीत की है, लेकिन कोई समाधान नहीं निकल रहा है.
ग्रेजुएशन की पढ़ाई के बाद कर रहे हैं डिलिवरी बॉय का काम
फिरोजाबाद की ब्लिंगकिट कंपनी में काम करने वाले युवा अदनान ने लोकल 18 से बातचीत करते हुए कहा कि वह पिछले एक महीने से डिलिवरी बॉय का काम कर रहा है. बीकॉम की पढ़ाई करने के बाद जब कहीं नौकरी नहीं मिली, तो इस काम को करना शुरू कर दिया, लेकिन इसमें कंपनी की मनमानी के चलते सही से गुजारा नहीं हो पा रहा है.
युवा ने कहा कि जहां एक पार्सल डिलिवर करने पर 25 रुपए मिलते हैं, लेकिन यहां सिर्फ 15 रुपए मिल रहे हैं, जिसमें बाइक की पेट्रोल का भी खर्चा नहीं निकल पा रहा है. दूसरे युवा ललित ने कहा कि आज के समय में मंहगाई आसमान छू रही है. हर चीज मंहगी हो रही है, ऐसे में डिलिवरी बॉय कम पैसे में कैसे परिवार का गुजारा कर सकते हैं.
काम छोड़कर भाग रहे युवा
प्रति किमी रेंज के हिसाब से पैसा मिलता है, लेकिन इतना नही मिल पा रहा है. रोजाना 12 घंटे मेहनत करने के बाद सिर्फ 600 रुपए मिलते हैं, जिसंमें 300 रुपए का पेट्रोल खर्च हो जाता है, बचे हुए पैसों से कैसे गुजारा होगा. शिवम अग्रवाल ने बताया कि अभी कुछ महीने पहले कंपनी से पेआउट सही मिल रहा था, लेकिन अब गड़बड़ कर दिया है. कई शादीशुदा युवा इस काम को करते हैं. दिनभर मेहनत मजदूरी करने के बाद भी घर का खर्चा न चले, तो फिर क्या करें. इसलिए युवा इस काम को छोड़कर भाग रहे हैं.
इंसेटिंव में हो रही कटौती
सुशील कुमार ने कहा कि पढ़-लिखकर य़ुवाओं को नौकरी नहीं मिल रही है, तो ऑनलाइन डिलिवरी से ही परिवार का खर्चा चला रहे हैं. लेकिन इसमें भी युवाओं का भविष्य खराब हो रहा है. कंपनी शुरुआत में अच्छे पैसे देने की बात करती है, लेकिन बाद में उसमें कटौती कर देती है. युवाओं को दस मिनट में पार्सल डिलिवर करना होता है, जिससे वह स्पीड से बाइक लेकर कस्टमर के पास तक पहुंचते हैं. लेकिन कई बार उनके साथ हादसे भी हो जाते हैं. वहीं समय से पहले पार्सल डिलिवर करने पर इंसेटिंव भी मिलता है. जो पहले दस रुपए इंसेटिंव था, वो घटाकर 6 रुपए कर दिया है. इन सभी समस्याओं को लेकर मैनेजर से भी बात की है, लेकिन कोई समाधान नहीं है. वहीं जिलाधिकारी को भी इस समस्या के बारे में बताया है.
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आर्यन सेठ, News18 Hindi में डिजिटल डेस्क पर जुड़े हैं और जनवरी 2026 से उत्तर प्रदेश की राजनीति, अपराध, प्रशासन, वायरल और अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर खबरें लिखते हैं. जामिया मिलिया इस्लामिया दिल्ल…और पढ़ें