घंटाघर की ये मशहूर गलियां हैं गोरखपुर की पहचान, जानिए इनके अनोखे नामों का राज

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घंटाघर की ये मशहूर गलियां हैं गोरखपुर की पहचान, जानिए इनके अनोखे नामों का राज


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गोरखपुर का घंटाघर क्षेत्र अपने पुराने बाजार और ऐतिहासिक पहचान के लिए जाना जाता है. यहां की कई गलियां अपने अनोखे नाम और खास कारोबार की वजह से वर्षों से लोगों के बीच प्रसिद्ध हैं. इनके नामों के पीछे छिपी कहानियां आज भी शहर की सांस्कृतिक और व्यापारिक विरासत को जीवंत बनाए हुए हैं.

गोरखपुर के अलीनगर की 6:30 वाली गली अपने अनोखे नाम के लिए जानी जाती है. स्थानीय लोगों के अनुसार, कई दशक पहले यहां अंसारी नाम के दुकानदार की कपड़े की दुकान थी, जहां हर तरह का कपड़ा 6 रुपये 30 पैसे प्रति मीटर की तय कीमत पर मिलता था. इसी वजह से लोगों ने इस जगह को “6:30 वाली गली” कहना शुरू कर दिया और समय के साथ यही नाम प्रचलित हो गया.

गोलघर स्थित गांधी आश्रम के बगल से गुजरने वाली गली को लोग गांधी गली के नाम से जानते हैं. वर्षों से शहर की पहचान रहे गांधी आश्रम की वजह से ही इस गली का नाम पड़ा. आज भी स्थानीय लोग इसी नाम से इस रास्ते की पहचान करते हैं.

घंटाघर क्षेत्र की मुरब्बा गली अपने नाम के पीछे दिलचस्प कहानी समेटे हुए है. हालांकि इस गली में अधिकतर कपड़ों की दुकानें हैं, लेकिन यहां करीब 70 साल पुरानी मुरब्बे की दुकान ने पूरे इलाके को पहचान दिलाई. समय के साथ लोग इस रास्ते को मुरब्बा गली के नाम से बुलाने लगे और आज यह नाम शहर में काफी प्रसिद्ध है.

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घंटाघर से आगे स्थित विशाता गली कॉस्मेटिक और सौंदर्य प्रसाधन की दुकानों के लिए जानी जाती है. यहां महिलाओं के मेकअप, ब्यूटी और फैशन से जुड़े सामान की कई दुकानें हैं. इसी विशेषता के कारण लोगों ने इस गली को विशाता गली के नाम से पहचान देना शुरू किया.

रेती चौक की ओर जाने पर समारुख गली पड़ती है, जो बच्चों के कपड़ों और खिलौनों की दुकानों के लिए प्रसिद्ध है. वर्षों से लोग यहां बच्चों से जुड़े सामान की खरीदारी के लिए आते रहे हैं. इसी वजह से स्थानीय लोगों के बीच यह इलाका लंबे समय से समारुख गली के नाम से जाना जाता है.

पुराने गोरखपुर का घंटाघर क्षेत्र शहर के सबसे पुराने और व्यस्त बाजारों में गिना जाता है. यहां की अलग-अलग गलियां अपने विशेष सामान और व्यापार के लिए जानी जाती हैं. कहीं कपड़ों का बड़ा बाजार है तो कहीं कॉस्मेटिक, खिलौने और पारंपरिक सामान की दुकानें हैं. सामने स्थित ऐतिहासिक क्लॉक टावर इस पूरे इलाके की पहचान को और खास बनाता है, इसलिए घंटाघर की गलियां आज भी गोरखपुर की सांस्कृतिक और व्यापारिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती हैं.

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