चित्रकूट का चमत्कारी बलकेश्वरी माता मंदिर, जहां नेत्रहीनों को मिलती है दृष्टि
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चित्रकूट के पहाड़ी ब्लॉक के लोहदा गांव में स्थित यह मंदिर लगभग 963 साल पुराना है. इसका निर्माण चंदेल काल में हुआ था. इसकी प्राचीन वास्तुकला आज भी देखने योग्य है. स्थानीय मान्यता के अनुसार इस मंदिर में देवी माता…और पढ़ें
963 साल पुराना है मंदिर
चित्रकूट के पहाड़ी ब्लॉक के लोहदा गांव में स्थित यह मंदिर लगभग 963 साल पुराना है. इसका निर्माण चंदेल काल में हुआ था. इसकी प्राचीन वास्तुकला आज भी देखने योग्य है. स्थानीय मान्यता के अनुसार इस मंदिर में देवी माता के दर्शन और पूजन से नेत्रहीन लोगों को दृष्टि वापस मिल जाती है. यह विश्वास पीढ़ी-दर-पीढ़ी लोगों के मन में गहराई से जुड़ा हुआ है.
गांव में निवासी ने बताई मान्यता
गांव के बुजुर्ग निवासी जगदीश गौतम ने जानकारी में बताया कि उन्होंने अपने बचपन से यहां कई अद्भुत घटनाएं देखी हैं. एक साधु जो पहले नेत्रहीन थे, मंदिर में रहने लगे. उन्होंने देवी के स्नान जल और मंदिर परिसर के कंकड़ों को आंखों पर लगाया, जिसके बाद धीरे-धीरे उनकी दृष्टि लौट आई. ऐसे किस्से ग्रामीणों और श्रद्धालुओं के बीच आज भी चर्चा का विषय हैं. मंदिर में सालभर श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है, लेकिन नवरात्रि के दौरान यहां खास रौनक देखने को मिलती है. इस समय दूर-दराज से लोग देवी के दर्शन और पूजा के लिए पहुंचते हैं. गांव में समय-समय पर मंदिर प्रांगण में दंगल और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं.