छोटा ठेला, बड़ा कमाल, सिर्फ 20 रुपये में कई फ्लेवर, मुगलसराय का जूस ठेला खूब चल रहा
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मुगलसराय के चकिया तिराहे के पास लगा शिवानी रस्तोगी जूस कॉर्नर इन दिनों लोगों की पसंद बन गया है. राकेश रस्तोगी अपने पिता की विरासत को आगे बढ़ाते हुए मात्र 20 रुपये में सिताफल जूस, आम का पन्ना, सत्तू, नींबू शरबत जैसे कई ठंडे पेय उपलब्ध करा रहे हैं. सस्ती कीमत, बेहतर स्वाद और ग्राहकों के भरोसे ने इस छोटे से ठेले को पूरे चंदौली जिले में पहचान दिला दी है.
चंदौली. जिले के मुगलसराय स्थित चकिया तिराहे के पास एक छोटा सा जूस ठेला इन दिनों लोगों के बीच खासा लोकप्रिय बना हुआ है. शिवानी रस्तोगी जूस कार्नर नाम से चलने वाला यह ठेला न केवल स्थानीय लोगों की प्यास बुझा रहा है, बल्कि अपनी सस्ती कीमत और स्वाद के कारण पूरे जिले में पहचान बना चुका है. इस जूस ठेले को चलाने वाले राकेश रस्तोगी ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि यह काम उनके परिवार की परंपरा का हिस्सा है. उन्होंने कहा कि पहले उनके पिताजी इसी स्थान पर लोगों को जूस पिलाते थे और अब उनकी विरासत को आगे बढ़ाते हुए वह खुद यह जिम्मेदारी निभा रहे हैं. राकेश ने कहा कि ग्राहकों का भरोसा और प्यार ही उनकी सबसे बड़ी पूंजी है.
यहां कई प्रकार के उपलब्ध हैं जूस
यहां मिलने वाले कई प्रकार के जूस की बात करें, तो ठेले पर सिताफल का जूस, आम का पन्ना, सत्तू का रस, नींबू शरबत, नींबू सोडा और रूह अफजा जैसे कई विकल्प उपलब्ध हैं. खास बात यह है कि हर जूस की कीमत मात्र 20 रुपये रखी गई है, जो इसे हर वर्ग के लोगों के लिए सुलभ बनाता है. गर्मी का मौसम बढ़ने के साथ ही इस ठेले पर ग्राहकों की भीड़ लगातार बढ़ती जा रही है.
सबसे कम कीमत में मिलता जूस
राकेश ने बताया कि इस समय सबसे ज्यादा मांग सिरफल के जूस और आम के पन्ना की रहती है, क्योंकि ये दोनों पेय शरीर को ठंडक देने में बेहद कारगर हैं. हालांकि, अन्य जूसों की भी अच्छी-खासी मांग बनी रहती है और ग्राहक अपनी पसंद के अनुसार पेय का आनंद लेते हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि कम कीमत में इतनी अच्छी गुणवत्ता और स्वाद कहीं और मिलना मुश्किल है.
छोटे से ठेले से शुरू हुआ यह सफर
यही वजह है कि आसपास के लोग ही नहीं, बल्कि दूर-दराज से आने वाले यात्री भी यहां रुककर जूस पीना पसंद करते हैं. छोटे से ठेले से शुरू हुआ यह सफर आज एक मिसाल बन चुका है कि मेहनत, गुणवत्ता और ग्राहक सेवा के दम पर कोई भी काम बड़ा बन सकता है. शिवानी रस्तोगी जूस कार्नर न केवल लोगों को राहत दे रहा है, बल्कि पारिवारिक परंपरा और मेहनत की एक प्रेरणादायक कहानी भी पेश कर रहा है.
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नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें