जिस कलक्ट्रेट में दलितों पर चटकाई थीं लाठियां, वहां ट्रैक्टर लेकर घुसे किसान
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उत्तर प्रदेश के मेरठ के जिस कलक्ट्रेट परिसर में कुछ दिन पहले दलितों को घुसने से रोका गया और उन पर लाठियां बरसाई गई थीं, मंगलवार को उसी कलक्ट्रेट में किसान अपने ट्रैक्टर लेकर धड़ल्ले से घुस गए. हैरानी की बात यह रही कि मौके पर तैनात मेरठ पुलिस और अधिकारी मूकदर्शक बने देखते रहे. पुलिस के इस दोहरे रवैये की खूब चर्चा हो रही है. माना जा रहा है कि 8 जुलाई की घटना के बाद हुई फजीहत और वेस्ट यूपी में किसान नेताओं के दबदबे के कारण पुलिस बैकफुट पर नजर आई.
क्लेक्ट्रेट में ट्रैक्टर लेकर घुसे किसान प्रदर्शनकारी
मेरठ: पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ कलक्ट्रेट से एक ऐसा नजारा सामने आया है, जिसने पुलिस प्रशासन के दोहरे रवैये की पोल खोल दी है. मंगलवार को भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के कार्यकर्ता ‘ट्रेड डील’ के विरोध में प्रदर्शन करने पहुंचे. जोश से लबरेज किसान अपने ट्रैक्टर्स के काफिले के साथ सीधे कलक्ट्रेट परिसर में घुस गए. हैरान करने वाली बात यह रही कि भारी संख्या में मौजूद पुलिस-प्रशासन तमाशबीन बना रहा. किसी भी अधिकारी ने उन्हें रोकने की जुर्रत नहीं की. यह वही कलक्ट्रेट है, जहां महज कुछ दिन पहले न्याय मांगने आए दलितों पर पुलिस ने बेरहमी से लाठियां भांजी थीं.
दरअसल, मेरठ में एक दलित छात्रा ललिता की हत्या के बाद उसके परिजन पुलिस की लचर कार्यप्रणाली और आरोपियों को बचाने का आरोप लगा रहे थे. इसी कड़ी में 8 जुलाई को कई दलित संगठनों ने कमिश्नरी पर पंचायत बुलाई थी. जब यह भीड़ कलक्ट्रेट जाकर डीएम को ज्ञापन सौंपना चाह रही थी, तो उन्हें गेट पर ही रोक दिया गया. विरोध में दलित सड़क पर धरने पर बैठ गए. इसके बाद मेरठ के एसएसपी ने भारी फोर्स के साथ प्रदर्शनकारियों पर थप्पड़ और लाठियां बरसाईं. कुछ अफसरों के वीडियो भी वायरल हुए जिसमें वे अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करते सुने गए. पुलिस ने कई नेताओं को गंभीर धाराओं में जेल भेज दिया था.
सियासी बवाल और सीएम के दखल से बैकफुट पर आई पुलिस
दलितों पर हुए इस पुलिसिया एक्शन की जबरदस्त फजीहत हुई. सपा, कांग्रेस और आसपा समेत कई दलों ने सड़क पर उतरकर विरोध जताया. सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने पीड़ित परिवार से मिलकर दो लाख की मदद दी, तो वहीं खुद सीएम योगी आदित्यनाथ ने परिवार से मुलाकात कर 5 लाख रुपये, नौकरी और मकान का आश्वासन दिया. सरकार की सख्ती के बाद पुलिस को बैकफुट पर आना पड़ा और गिरफ्तार नेताओं से गंभीर धाराएं हटाई गईं.
किसानों के सामने ‘शांत’ रहे लाठी भांजने वाले अफसर
8 जुलाई की इसी फजीहत का नतीजा मंगलवार को देखने को मिला. जब भाकियू के किसान ट्रेड डील के खिलाफ ट्रैक्टर लेकर कलक्ट्रेट पहुंचे, तो पुलिस के तेवर बिल्कुल ठंडे पड़े थे. जानकारों का मानना है कि वेस्ट यूपी में किसानों और टिकैत परिवार के दबदबे, साथ ही सत्ता में रालोद प्रमुख जयंत चौधरी की हिस्सेदारी के कारण प्रशासन ने चुप्पी साधे रखी. जो पुलिस अफसर और जवान कुछ दिन पहले दलितों पर कहर बनकर टूट रहे थे, वे किसानों के इस उग्र प्रदर्शन के दौरान उनके साथ-साथ शांति से कदमताल करते नजर आए.
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Deep Raj Deepak working with News18 Hindi (hindi.news18.com/) Central Desk since 2022. He has strong command over national and international political news, current affairs and science and research-based news. …और पढ़ें