झांसी रेल मंडल में बदली कमाई की कहानी, मालगाड़ी नहीं.. यात्री ट्रेन बनी नंबर-1

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झांसी रेल मंडल में बदली कमाई की कहानी, मालगाड़ी नहीं.. यात्री ट्रेन बनी नंबर-1


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Jhansi News: झांसी रेल मंडल में पहली बार पैसेंजर ट्रेनों ने मालगाड़ियों को पीछे छोड़ दिया है. ट्रेनों में यात्रियों ने रिकॉर्ड यात्रा की, जिसके चलते रेल मंडल को अच्छी आमदनी हुई. आइए आंकड़ों से जानते हैं कि कितना मुनाफा हुआ है.

झांसी: झांसी रेल मंडल से इस बार एक अलग ही तस्वीर सामने आई है. आमतौर पर रेलवे की सबसे ज्यादा कमाई मालगाड़ियों से होती है, लेकिन इस बार कहानी बदल गई है. इस बार पैसेंजर ट्रेनों ने मालगाड़ियों को पीछे छोड़ दिया है. बड़ी संख्या में यात्रियों ने ट्रेनों से सफर किया है, जिसके चलते यात्री किराया अब माल भाड़े से आगे निकल गया है. सोशल चर्चा में भी यह बात तेजी से सामने आ रही है. लोग इसे रेलवे के लिए बड़ा बदलाव मान रहे हैं.

जन संपर्क अधिकारी मनोज कुमार सिंह ने कहा कि अगर आंकड़ों की बात करें, तो इस वित्तीय वर्ष में झांसी मंडल को यात्री किराए से 2060.80 करोड़ रुपये की कमाई हुई है, जबकि लक्ष्य 1963.14 करोड़ रुपये रखा गया था. इसका मतलब है कि रेलवे ने अपने लक्ष्य से ज्यादा कमाई की है. यह दिखाता है कि लोगों का भरोसा ट्रेन यात्रा पर बढ़ रहा है और ज्यादा लोग अब ट्रेन से सफर करना पसंद कर रहे हैं.खास बात यह भी है कि यात्री किराया माल भाड़े से 4.97 प्रतिशत ज्यादा रहा है, जो अपने आप में एक बड़ी बात मानी जा रही है.

यात्री किराया रेलवे की कमाई का बड़ा हिस्सा
उन्होंने कहा कि इस बदलाव के पीछे कई कारण माने जा रहे हैं. ट्रेनों की संख्या में बढ़ोतरी, बेहतर सुविधा और लोगों का सस्ता और सुरक्षित सफर चुनना. इन सब वजहों से यात्रियों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है. छोटे शहरों और गांवों से लेकर बड़े शहरों तक लोग ट्रेन से सफर कर रहे हैं. त्योहारों और छुट्टियों के समय तो ट्रेनों में भीड़ और ज्यादा बढ़ जाती है. यही वजह है कि इस बार यात्री किराया रेलवे की कमाई का बड़ा हिस्सा बन गया है.

यात्री सेवाओं पर और ध्यान देने की जरूरत
अब इस आंकड़े से रेलवे को एक साफ संदेश मिल रहा है कि यात्री सेवाओं पर और ध्यान देने की जरूरत है. जब लोग ज्यादा सफर कर रहे हैं, तो उन्हें बेहतर सुविधा देना भी जरूरी है. साफ-सफाई, समय पर ट्रेन और सुरक्षित सफर, ये सब बातें अब और जरूरी हो जाती हैं. झांसी मंडल के लिए यह एक अच्छी खबर है. आगे भी अगर इसी तरह काम हुआ, तो रेलवे को और ज्यादा फायदा हो सकता है.

About the Author

आर्यन सेठ

आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.



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