तहसील नहीं, अब ग्राम सचिवालय बनेगा राजस्व सेवाओं का नया केंद्र
चित्रकूट: उत्तर प्रदेश सरकार ने ग्रामीणों को राजस्व संबंधी सेवाएं उनके गांव के करीब उपलब्ध कराने की दिशा में एक अहम कदम उठाया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के सभी लेखपालों को निर्धारित रोस्टर के अनुसार ग्राम सचिवालयों में नियमित रूप से कैंप लगाने के निर्देश दिए हैं. साथ ही सभी जिलों के जिलाधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे तय रोस्टर के अनुसार लेखपालों की ग्राम सचिवालयों में उपस्थिति सुनिश्चित करें.
इस व्यवस्था के लागू होने के बाद ग्रामीणों को छोटे-छोटे राजस्व कार्यों के लिए बार-बार तहसील के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे. उनकी समस्याओं का समाधान गांव में ही समयबद्ध तरीके से हो सकेगा.
ग्राम सचिवालय में पहले से मिल रही हैं कई ऑनलाइन सेवाएं
ग्राम सचिवालयों के माध्यम से पंचायत सहायकों द्वारा पहले से ही कई ऑनलाइन सेवाएं संचालित की जा रही हैं. इनमें आय प्रमाणपत्र, जाति प्रमाणपत्र, निवास प्रमाणपत्र, हैसियत प्रमाणपत्र, खतौनी की नकल सहित राजस्व विभाग की करीब 10 प्रमुख सेवाएं शामिल हैं.
इन सेवाओं के निस्तारण में लेखपाल की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है. ऐसे में यदि लेखपाल नियमित रूप से रोस्टर के अनुसार ग्राम सचिवालय में मौजूद रहेंगे, तो ग्रामीणों को दस्तावेज बनवाने या अन्य राजस्व संबंधी कार्यों के लिए तहसील जाने की जरूरत काफी हद तक कम हो जाएगी. इससे लोगों का समय और पैसा दोनों बचेंगे.
ग्रामीणों ने बताया राहत देने वाला फैसला
इसी विषय को लेकर लोकल 18 की टीम चित्रकूट के ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंची और लोगों की राय जानी. चित्रकूट के सरहट गांव निवासी राजन कोल ने बताया कि यह फैसला ग्रामीणों के हित में बेहद महत्वपूर्ण है.
उन्होंने कहा कि पहले किसी भी राजस्व कार्य के लिए कई किलोमीटर दूर तहसील मुख्यालय जाना पड़ता था. वहां भी कई बार लेखपाल उपलब्ध नहीं मिलते थे, जिसके कारण एक ही काम के लिए बार-बार चक्कर लगाने पड़ते थे. इससे मजदूरी करने वाले लोगों का समय और आय, दोनों प्रभावित होते थे. उनका मानना है कि यदि लेखपाल नियमित रूप से ग्राम सचिवालय में बैठेंगे, तो ग्रामीणों की बड़ी परेशानी दूर हो जाएगी और अधिकांश काम गांव में ही आसानी से हो सकेंगे.
नियमित निगरानी और कार्रवाई की भी उठी मांग
वहीं, सरहट गांव के रहने वाले राकेश नत्थू और बूटी बाई ने लोकल 18 से बातचीत में कहा कि वे सरकार के इस फैसले का स्वागत करते हैं. हालांकि, उनका कहना है कि इस व्यवस्था की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि लेखपाल वास्तव में अपने निर्धारित रोस्टर के अनुसार ग्राम सचिवालय पहुंचते हैं या नहीं.
उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन को लेखपालों की उपस्थिति की नियमित निगरानी करनी चाहिए. यदि कोई लेखपाल रोस्टर के अनुसार ग्राम सचिवालय नहीं पहुंचता है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई भी की जानी चाहिए. इससे सरकार की इस पहल का लाभ वास्तव में ग्रामीणों तक पहुंच सकेगा.