धान में निकलने वाले हैं कल्ले, अगस्त का अंतिम सप्ताह सबसे नाजुक, इन 3 खतरों से बचा ले गए तो नैय्या पार
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dhan me bali nikalte samay kya kare : अगस्त महीने का अंतिम सप्ताह धान की फसल में कल्लों के निकलने का समय होता है. जरा सी लापरवाही पूरी मेहतनत पर पानी फेर सकती है. नुकसान होना तय है.
रायबरेली. अगस्त माह का अंतिम सप्ताह चल रहा है. धान की फसल पीक पर है. उसकी ग्रोथ का ये सटीक समय है. इस दौरान फसल अच्छी देखभाल मांगती है. थोड़ी सी चूक से फसल पर कई तरह के रोगों और कीटों का हमला होना तय है. खेत में खरपतवार के जमाव का भी यही समय है. इससे फसल के खराब होने का डर लगा रहता है. अगर फसल पर किसी प्रकार के रोग और कीट के लक्षण दिखाई दे रहे हैं, या खेत में खरपतवार है तो क्या करें. आइए कृषि विशेषज्ञ से जानते हैं कि आखिर अगस्त के महीने में धान रोपाई वाले अपनी फसल की देखभाल करते समय किन बातों का ध्यान रखें.
न होने दें पानी का जमाव
कृषि के क्षेत्र में 10 साल का अनुभव रखने वाले रायबरेली जिले के राजकीय कृषि केंद्र शिवगढ़ के प्रभारी अधिकारी शिव शंकर वर्मा (बीएससी एग्रीकल्चर, डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय, फैजाबाद) लोकल 18 से बताते हैं कि अगस्त महीने के अंतिम सप्ताह में धान की फसल में फुटाव यानी बाली निकलने का समय होता है. इस दौरान की गई जरा सी लापरवाही फसल को बर्बाद कर सकती है. धान की बाली निकलने के दौरान खेत में पानी का जमाव न होने दें. इससे धान के पौधे का तना गलने का खतरा बढ़ जाता है. इसका सीधा असर बाली के फुटाव पर पड़ता है. इससे बचाव के लिए खेत की हल्की-हल्की सिंचाई करते रहें.
उर्वरक छिड़काव में रखें ध्यान
कृषि एक्सपर्ट शिव शंकर वर्मा बताते हैं कि किसान भाई धान की फसल में शाम के समय ही उर्वरक का छिड़काव करें. ध्यान रखें की खेत में पानी अधिक न हो. शाम के समय खेत में उर्वरक का छिड़काव करने से फसल की ग्रोथ पर अच्छा प्रभाव पड़ता है. इससे पैदावार बढ़ती है. धान की बाली बनने के समय फसल पर खैरा रोग, झुलसा रोग और सफेद रोग लगने का खतरा ज्यादा रहता है. इसीलिए कृषि विशेषज्ञ की सलाह पर उचित कीटनाशक का छिड़काव जरूर कर दें. इससे फसल को इन रोगों से बचाया जा सकता है.