नींद की गोली, पैसों से भरा 8 बैग.. कैसे घर के नौकरों ने चुराए करोड़ों रुपए?
हरदोई शहर कोतवाली क्षेत्र के रेलवेगंज निवासी थोक परचून व्यापारी पंकज अग्रवाल के घर हुई जिले की सबसे बड़ी नकदी चोरी का पुलिस ने खुलासा करते हुए दो बाल अपचारियों समेत 16 आरोपियों को गिरफ्तार किया है. पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 1 करोड़ 28 लाख 99 हजार 310 रुपये नकद बरामद किए हैं. पुलिस के अनुसार, वारदात की साजिश घर में काम करने वाले तीन घरेलू नौकरों ने रची थी. उन्होंने अपने साथियों को घर में रखी नकदी, अलमारी की चाबी और पूरे घर की जानकारी दी. कथित तौर पर परिवार को खाने में नींद की गोलियां देने के बाद आरोपी छत के रास्ते घर में घुसे, अलमारी से नोटों से भरे आठ बैग निकाले और फरार हो गए. सर्विलांस और एसओजी की मदद से पुलिस ने अधिकांश रकम बरामद कर ली है, जबकि कुछ आरोपी अभी भी फरार हैं.
घरेलू नौकरों के गायब होने से खुला चोरी का राज
रेलवेगंज निवासी पंकज अग्रवाल परचून और दाल-चावल के थोक व्यापारी हैं. उनके मकान में भूतल पर कार्यालय और गोदाम है. दूसरी मंजिल पर परिवार समेत पंकज रहते हैं. बीती 17 जुलाई की सुबह जब पंकज जागे तो उनके यहां सात साल से काम कर रहे पेड़ा निवासी शोभित और दो नाबालिग गायब मिले. यह लोग उनके घर में ही सोते थे. इसके बाद ही अलमारियां टूटी मिली थीं और रुपये गायब थे. पुलिस ने 17 जुलाई को प्राथमिकी दर्ज की थी. एसपी अशोक कुमार मीणा ने घटना का खुलासा करने के लिए सीओ सिटी अजीत चौहान के नेतृत्व में कई टीमे लगाई थीं.
एसओजी और सर्विलांस की मदद से ऐसे दबोचे गए आरोपी
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि पूरे मामले में देहात कोतवाली क्षेत्र के पेड़ा निवासी शोभित, टड़ियावां थाना क्षेत्र के बेलहा निवासी जय शुक्ला और विशाल उर्फ गोलू, शहर कोतवाली क्षेत्र के नघेटा पूर्वी निवासी मदन, शिवम और केशव, जमादार कॉलोनी निवासी सनी वाल्मीकि, बेहटागोकुल थाना क्षेत्र के कोड़रा सरैया निवासी प्रिंस, लखनऊ के मड़ियाव थाना क्षेत्र के हरिओमनगर निवासी दीपक साहू, सनी गुप्ता, बाराबंकी के सूरतगंज निवासी महफूज समेत 16 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. इनमें दो किशोर भी हैं. पुलिस ने 1 करोड़ 28 लाख 99 हजार 310 रुपये बरामद किए हैं. आरोपियों का मेडिकल कराया गया है. पकड़े गए 16 में से 14 लोगों को न्यायालय ने जेल भेज दिया, जबकि दो किशोरों को बाल संप्रेक्षण गृह भेजा गया.
किसी को नेपाल घूमना था, किसी को चाहिए थी नई बाइक
सीओ सिटी अजीत चौहान ने बताया कि गिरफ्तार किए गए दो किशोर व्यापारी के घर में ही काम करते थे. कुल पकड़े गए 16 में से 13 लोग या तो ऑटो चलाते हैं या मजदूरी करते हैं. नघेटा पूर्वी निवासी शिवम ने पूछताछ में बताया कि वह नेपाल जाना चाहता था. नेपाल में बीयर और डिस्को बार घूमने तथा विदेश यात्रा की चाहत ने उसे इस वारदात में शामिल कर दिया. वहीं बाराबंकी निवासी महफूज उर्फ लाली जल्द अमीर बनने के लालच में चोरी में शामिल हुआ. लखनऊ निवासी सनी गुप्ता नई बाइक खरीदना चाहता था, इसलिए उसने भी इस वारदात का हिस्सा बनने का फैसला किया.
नींद की गोलियां खिलाकर उड़ाए नोटों से भरे आठ बैग
पूछताछ में शोभित ने पुलिस को बताया कि पंकज अग्रवाल के घर में हर समय कई करोड़ रुपये रखे होने की जानकारी उसे थी. दोनों नाबालिगों को भी इस बारे में पता था. शोभित ने तीन अन्य लोगों से चर्चा कर पूरी योजना बनाई. 16 जुलाई की रात व्यापारी और उनके परिवार के खाने में नशीला पदार्थ मिला दिया गया. सभी के बेहोश होने के बाद आरोपियों ने अलमारी से नोटों से भरे आठ बैग निकाले. दो किशोर और एक अन्य आरोपी घर के अंदर से नकदी निकालते रहे, जबकि बाहर खड़े साथी बैग लेकर फरार होते गए. पकड़े जाने से बचने के लिए रास्ते में बैग भी बदल दिए गए.
चोरी से बड़ा सवाल, घर में 1.29 करोड़ रुपये कैश क्यों रखा था?
लेकिन इस चोरी ने चोरों से बड़ा सवाल सिस्टम पर खड़ा कर दिया है. जिस दौर में सरकार हर दुकान पर “डिजिटल इंडिया” और “कैशलेस इकोनॉमी” का संदेश दे रही है, उसी दौर में एक व्यापारी के घर से 1.29 करोड़ रुपये नकद निकल आते हैं. सवाल सिर्फ इतना नहीं कि चोरी किसने की, बल्कि यह भी है कि आखिर इतना बड़ा कैश घर में क्यों रखा गया था? क्या करोड़ों का कारोबार नकद में चल रहा था? अगर हाँ, तो आयकर विभाग और जीएसटी विभाग की निगरानी आखिर कहाँ थी? क्या विभागों की नजर कभी इस कारोबार पर नहीं पड़ी, या फिर सब कुछ सामान्य मानकर अनदेखा किया जाता रहा? अब पुलिस ने चोरी का राज खोल दिया है, लेकिन असली परीक्षा उन एजेंसियों की है जिन्हें यह देखना होगा कि इतनी बड़ी नकदी का स्रोत क्या था, उसका हिसाब-किताब क्या है और क्या उस पर कर नियमों का पूरी तरह पालन किया गया था. चोरी की गुत्थी भले सुलझ गई हो, लेकिन करोड़ों के कैश की कहानी अभी बाकी है.