न दशहरी, न चौसा…गोंडा के प्रवीण ने लगाया अंबिका आम, चौंका देंगी इसकी खूबियां
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Top mango varieties : मनकापुर क्षेत्र में रहने वाले प्रवीण सिंह ने पारंपरिक खेती के साथ अंबिका वैरायटी के आम की बागवानी से अपनी अलग पहचान बनाई है. प्रवीण ने शुरुआत में इस वैरायटी के केवल 30 पौधे ट्रायल के तौर पर लगाए थे. लोकल 18 से प्रवीण सिंह कहते हैं कि अंबिका वैरायटी का आम स्वाद और रंग में अनूठा है. अंबिका एक लेट वैरायटी का आम है. इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि जब दूसरी किस्मों का सीजन खत्म होने लगता है, तब इस वैरायटी के फल बाजार में आते हैं. प्रवीण इसकी बागवानी का विस्तार करने की तैयारी कर रहे हैं.
गोंडा. आम की बागवानी किसानों के लिए हमेशा से फायदे का सौदा रही है. उत्तर प्रदेश में के गोंडा के प्रगतिशील किसान प्रवीण सिंह ने पारंपरिक खेती के साथ अंबिका वैरायटी के आम की बागवानी शुरू कर अपनी अलग पहचान बनाई है. मनकापुर क्षेत्र में रहने वाले प्रवीण ने शुरुआत में इस वैरायटी के केवल 30 पौधे ट्रायल के तौर पर लगाए थे, लेकिन बेहतर उत्पादन और अच्छी गुणवत्ता मिलने के बाद अब वह इसकी बागवानी का विस्तार करने की तैयारी कर रहे हैं. उनकी सफलता को देख आसपास के कई किसान भी उनके बाग का दौरा कर रहे हैं और इस वैरायटी की खेती के बारे में जानकारी ले रहे हैं.
नियमित देखभाल जरूरी
लोकल 18 से प्रवीण सिंह कहते हैं कि अंबिका वैरायटी का आम स्वाद में काफी मीठा होता है. इसके फल का आकार, रंग और गुणवत्ता अच्छी होने के कारण बाजार में इसकी मांग भी ज्यादा रहती है. मांग अधिक होने से किसानों को इस आम की कीमत भी सामान्य किस्मों की तुलना में बेहतर मिल जाती है. यह वैरायटी मुनाफे का अच्छा विकल्प बन सकती है. प्रवीण सिंह बताते हैं कि अच्छी पैदावार के लिए समय-समय पर सिंचाई, संतुलित मात्रा में खाद और पौधों की नियमित देखभाल बहुत जरूरी है. यदि किसान शुरुआत से पौधों की सही तरीके से देखरेख करें तो कुछ वर्षों बाद उन्हें अच्छा उत्पादन मिलने लगता है. अभी उनके लगाए गए पौधों से अच्छे परिणाम मिल रहे हैं, जिससे उनका उत्साह और बढ़ गया है.
कीमत क्यों ज्यादा
प्रवीण सिंह के मुताबिक अंबिका एक लेट वैरायटी का आम है. इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि जब दूसरी किस्मों का सीजन खत्म होने लगता है, तब इस वैरायटी के फल बाजार में आते हैं. उस समय आम की उपलब्धता कम होने से किसानों को बेहतर कीमत मिलने की संभावना रहती है. यही कारण है कि भविष्य में वह इस किस्म के और पौधे लगाने की योजना बना रहे हैं. प्रवीण सिंह कहते हैं कि जो किसान आम की बागवानी शुरू करना चाहते हैं, वे अंबिका वैरायटी के कुछ पौधे जरूर लगाएं. पहले कम संख्या में पौधे लगाकर अनुभव प्राप्त करें और परिणाम अच्छे मिलने पर धीरे-धीरे बाग का विस्तार करें.
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प्रियांशु गुप्ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…
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