पाठा क्षेत्र में कर रहे हैं धान की खेती… रखें इन खास बातों का ध्यान! सूखे में भी होगी बंपर पैदावार
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Paddy Farming Tips : चित्रकूट जिले के मानिकपुर पाठा क्षेत्र पानी की भयंकर कमी के लिए फेमस है. ऐसे में यहां धान की खेती थोड़ी मुश्किल है. लेकिन, किसान अगर धान की रोपाई से पहले कुछ बातों का ध्यान दें तो अच्छा मु…और पढ़ें
चित्रकूट : चित्रकूट का पाठा क्षेत्र खेती के मामले में सबसे पिछड़ा माना जाता था. यहां के किसान खेती को घाटे का सौदा मानकर दूसरे जिलों में मजदूरी करने चले जाते थे. लेकिन अब समय बदल रहा है और यहां के किसान भी खेती की ओर रुख कर रहे हैं. अगर आप भी इन दिनों धान की रोपाई की तैयारी में लगे हैं और कम लागत में ज्यादा फसल पाना चाहते हैं, तो एक्सपर्ट द्वारा बताए गए तरीकों को अपनाकर आप भी अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं.
वैज्ञानिक विधि से करें खेती
जिला कृषि अधिकारी आर. पी. शुक्ला ने लोकल 18 को बताया कि अगर खेत की तैयारी वैज्ञानिक विधियों से की जाए तो खरपतवार कम उगते हैं, सिंचाई की जरूरत भी कम होती है और फसल की गुणवत्ता बेहतर होती है. इससे किसानों को बाजार में अच्छी कीमत मिलती है. उन्होंने बताया कि धान की खेती के लिए सबसे पहले क्षेत्र के अनुसार बीज की प्रजाति का चुनाव करना जरूरी है. इसमें हाइब्रिड और सामान्य प्रजातियां दोनों शामिल हैं.
इन बातों का रखें ध्यान
हाइब्रिड किस्म के लिए एक पौधा और सामान्य किस्म के लिए तीन से चार पौधे प्रति स्थान लगाने चाहिए. नर्सरी तैयार करने के 28 से 30 दिन बाद रोपाई करनी चाहिए. धान की फसल सामान्यत: 130 से 180 दिन में तैयार हो जाती है. पानी धान की खेती में बेहद जरूरी होता है, लेकिन अच्छी बात यह है कि यह फसल बरसात के पानी में ही तैयार हो जाती है. अगर मौसम साथ दे और तकनीक सही अपनाई जाए, तो किसान अच्छी पैदावार से मोटा मुनाफा कमा सकते हैं.