पूर्वांचल का ‘नया सुल्तान’ बनने को तैयार बृजेश सिंह! 2027 में साइकिल होगी पंचर!

0
पूर्वांचल का ‘नया सुल्तान’ बनने को तैयार बृजेश सिंह! 2027 में साइकिल होगी पंचर!


up politics news: पूर्वांचल की राजनीति में सालों से जो नाम सबसे ज्यादा चर्चा में रहा है. वह है-बृजेश सिंह. अभी तक पर्दे के पीछे से राजनीति करने वाले और अपनी बिसात बिछाने वाले बृजेश सिंह ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है. उन्होंने खुद से ऐलान कर दिया है कि वह 2027 का विधानसभा चुनाव लड़ेंगे. यह खबर सामने आते ही लखनऊ से लेकर दिल्ली तक के सियासी गलियारों में हलचल मच गई है. दशकों से पूर्वांचल की राजनीति जिस ‘मुख्तार बनाम बृजेश’ के इर्द-गिर्द घूमती थी, अब वह सीधे आमने-सामने के जंग में बदलने वाली है. तो चलिए जानते हैं इस नए समीकरण की पूरी कहानी.

मैदान में ताल ठोकने को तैयार बृजेश सिंह

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, रविवार को वाराणसी के प्रसिद्ध अस्सी घाट पर पप्पू की चाय की दुकान पर पहुंचे पूर्व एमएलसी बृजेश सिंह ने जब बनारसी अंदाज में कहा कि हां विधानसभा चुनाव लडूंगा और कहां से लडूंगा, इसकी जानकारी भी जल्द मिल जाएगी.’ इसके बाद चारों तरफ हल्‍ला मच गया. अभी तक पर्दे के पीछे से चुनाव लड़ाने और एमएलसी चुनाव तक लड़ने वाले बृजेश सिंह पहली बार 2027 का विधानसभा चुनाव लड़ेंगे. तभी तो उन्होंने कहा, ‘मैं रघुवंशी हूं, वचन देता हूं कि आपकी किसी पीड़ा में प्राण देकर शामिल होऊंगा.’ यानी उनका इरादा बिल्कुल पक्‍का है. उनका मानना है कि उन्हें धन-दौलत की आवश्यकता नहीं है, बल्कि जनता की सेवा के लिए राजनीति की जरूरत है. अब अटकले यह जरूर लग रही हैं कि आखिर वह कहां से चुनाव लड़ने वाले हैं. मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उनके समर्थकों का मानना है कि वे वाराणसी, चंदौली या जौनपुर में से किसी एक हॉट सीट को चुन सकते हैं. उनका यह फैसला न केवल उन सीटों पर बल्कि आसपास की दर्जन भर विधानसभाओं के समीकरणों को पूरी तरह से उलट-पुलट कर सकता है. वे अपनी बात के पक्के माने जाते हैं, इसलिए उनके समर्थकों में भारी उत्साह है.

पीडीए के सामने नया ‘क्षत्रिय’ चक्रव्यूह

समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव इन दिनों ‘पीडीए’ यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक फॉर्मूले पर जोर दे रहे हैं. 2024 के लोकसभा चुनाव में इसका असर भी दिखा. लेकिन बृजेश सिंह की एंट्री इस पूरे समीकरण को चुनौती दे सकती है. राजनीति के जानकार मानते हैं कि बृजेश सिंह का सीधा मैदान में उतरना पूर्वांचल के सवर्ण मतों, खासकर राजपूत और भूमिहार समाज को एकजुट कर सकता है. अगर ऐसा हुआ, तो यह बीजेपी और उसके सहयोगी दलों के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच जैसा होगा. मीडिया में छपी खबरों के मुताबिक, वे अगर निर्दलीय भी लड़ते हैं, तो भी वे किसी भी पार्टी के उम्मीदवार के लिए बड़ी मुसीबत खड़ी करने में सक्षम हैं.

बदल जाएगा पूर्वांचल का पूरा गणित

पूर्वांचल में मुख्तार अंसारी के निधन के बाद जो ‘पॉवर वैक्यूम’ बना है, उसे भरने की होड़ मची है. बृजेश सिंह का खुद चुनाव लड़ना, अंसारी परिवार की पकड़ ढीली करने की एक बड़ी कोशिश मानी जा रही है. उनके परिवार का पहले से ही वाराणसी और चंदौली क्षेत्र में दबदबा रहा है. पत्नी अन्नपूर्णा सिंह एमएलसी हैं और भतीजे सुशील सिंह विधायक हैं. अब खुद ‘किंग’ के मैदान में आने से ‘किंगमेकर’ वाली छवि पीछे छूट जाएगी. इससे सपा-कांग्रेस गठबंधन की टेंशन बढ़ गई है, क्योंकि उनके पास इस नए और मजबूत क्षत्रिय चेहरे का तोड़ फिलहाल नजर नहीं आ रहा है.

अतुल राय की सक्रियता से बढ़ी बेचैनी

सिर्फ बृजेश सिंह ही नहीं, बल्कि घोसी के पूर्व सांसद अतुल राय का भी सक्रिय होना सियासी समीकरणों को और भी पेचीदा बना रहा है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अतुल राय ने जेल से बाहर आने के बाद से ही अपनी ताकत दिखानी शुरू कर दी है. वे भी अंसारी परिवार के गढ़ में सेंधमारी करने की तैयारी में हैं. एक तरफ बृजेश सिंह और दूसरी तरफ अतुल राय की सक्रियता, इन दोनों दिग्गजों के कदम कहीं न कहीं अंसारी परिवार के लिए दोतरफा घेराबंदी का संकेत दे रहे हैं. गाजीपुर की मोहम्मदाबाद सीट, जिसे अंसारी परिवार का किला माना जाता है, वहां भी अब मुकाबला काफी दिलचस्प होने वाला है.

पार्टी कौन सी होगी, अभी सस्पेंस बरकरार

हालांकि, बृजेश सिंह ने अभी यह साफ नहीं किया है कि वे किस पार्टी से चुनाव लड़ेंगे. चर्चा है कि बीजेपी के साथ उनके पुराने संबंध रहे हैं. अगर बीजेपी बाहुबलियों से दूरी बनाने की अपनी नीति पर कायम रहती है, तो गठबंधन के छोटे दल जैसे सुभासपा या निषाद पार्टी उनके लिए दरवाजे खोल सकते हैं. वे अक्सर ओम प्रकाश राजभर के कार्यक्रमों में देखे जाते हैं, जो इस बात की ओर इशारा करता है कि एनडीए गठबंधन में ही उनकी कोई भूमिका तय हो सकती है. अब देखना यह है कि क्या वे वाकई विधानसभा की कुर्सी तक पहुंच पाएंगे या फिर विपक्ष उनके अतीत को मुद्दा बनाकर इस चुनावी जंग को और तीखा करेगा.



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *