बरसात के मौसम में करें इस सब्जी की खेती, सर्दी में होगी छप्पर फाड़ कमाई

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बरसात के मौसम में करें इस सब्जी की खेती, सर्दी में होगी छप्पर फाड़ कमाई


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कृषि अधिकारी भगवती प्रसाद ने बताया कि झालर वाली लौकी की खेती करने की तकनीकी खेतों में दो-दो मीटर की दूरी पर बस की बंबू गढ़कर उसमें तार एवं राशियों से बांधकर झालर बनाया जाता है. जब पौधे तैयार होते हैं. उन्हें बस …और पढ़ें

बरसात के मौसम में सब्जियों की खेती करना बहुत ही कठिन होता है. लेकिन बरसात शुरू होने से पहले ही जून माह में लौकी की खेती करना अपनाये. बरसात की सीजन वाली महंगी दामों में बिकती है. लेकिन जैसे आमतौर पर लोग लौकी की खेती करते हैं. उसे तरीके को छोड़कर झालर विधि से लौकी की खेती करना अपनाये. जमीनी स्तर से बरसात में लौकी की खेती करने पर खेतों में खरपतवार अधिक संख्या में उत्पन्न हो जाते हैं. सब्जियों में कीड़े भी लगने लगते हैं. इस तरह में सब्जियों को सड़ना ज्यादा संभावित हो जाता है. जिससे किसान का काफी नुकसान भी हो जाता है.

बरसात के मौसम में झालर विधि से लौकी की खेती करने पर किसान भाई को किसी भी प्रकार का नुकसान भी नहीं होगा. इस विधि से खेती करने में लागत भी काम आती है. फसल अच्छी तैयार होती है और फल भी ज्यादा उत्पन्न होते हैं. झालर विधि से लौकी की खेती करने पर लौकी में चिकनाहट ज्यादा एवं साफ सुथरा भी होती है. फिर उसे बेचने में भी थोड़ा सी भी हिचकी चाहत नहीं होती है. और अच्छे दामों में भी बिक जाती है. इस विधि से खेती करने पर लागत काम मुनाफा अधिक होता है.

लौकी की करें खेती
बाजारों में अधिकतर लोग साफ सुथरा ही सामग्री लेना पसंद करते हैं. इस तरह की सब्जियां अच्छे दामों में भी बिकती हैं. झालर विधि से की गई लौकी की खेती में सीधे एवं अच्छे फल की पैदावार होती है. फल साफ सुथरा भी रहता है. इस विधि से खेती करने पर किस में ना तो सड़ने का डर रहता है ना कीड़े लगने का डर रहता है. किसान को लौकी की तोड़ाई करने में भी दिक्कतें नहीं होती है.

झालर विधि से करें लौकी की खेती
कृषि अधिकारी भगवती प्रसाद ने बताया कि झालर वाली लौकी की खेती करने की तकनीकी खेतों में दो-दो मीटर की दूरी पर बस की बंबू गढ़कर उसमें तार एवं राशियों से बांधकर झालर बनाया जाता है. जब पौधे तैयार होते हैं तो उन्हें बस के बंबू एवं तार के सहारे से चढ़ाया जाता है. लौकी के पौधों को चढ़ाने से जो भी फल उत्पन्न होते हैं वह नीचे को और लटकने लगते हैं. लौकी का फल 1 किलो से 2 किलो का वजन का होता है.यह काफी लंबा भी होता है. जब फल झालर के नीचे लटक आते हैं तो इसमें से सड़ने का एवं कीड़े लगने का संकट दूर हो जाता है. झालर विधि से लौकी की खेती करने में कितना खर्च आता है. एक बीघे की लागत कम से कम 10 से 15 हजार का खर्च आता है. बात करें एक बीघे की मुनाफे की तो लगभग 60 से 70 तक का मुनाफा भी हो जाता है.

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