बरेली की तहसील से शाहजहांपुर कैसे बना यूपी का शक्तिशाली जिला, जानें इतिहास

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बरेली की तहसील से शाहजहांपुर कैसे बना यूपी का शक्तिशाली जिला, जानें इतिहास


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Shahjahanpur History: वीरों की धरती और ऐतिहासिक विरासतों को समेटे शाहजहांपुर का इतिहास जितना गौरवशाली है, इसका प्रशासनिक सफर भी उतना ही रोचक रहा है. कभी बरेली जिले की एक छोटी सी तहसील कहलाने वाला यह क्षेत्र आज उत्तर प्रदेश का एक प्रमुख औद्योगिक और ऐतिहासिक केंद्र बन चुका है. रुहेला शासकों के पतन से लेकर ब्रिटिश हुकूमत के दौर में एक स्वतंत्र जिले के रूप में उभरने तक, शाहजहांपुर ने वक्त के साथ कई बड़े बदलाव देखे हैं. प्रख्यात इतिहासकार डॉ. विकास खुराना के अनुसार, इस जिले के विकास की नींव उन दूरदर्शी प्रशासनिक अधिकारियों ने रखी थी, जिन्होंने इसे तहसील से जिला बनाने और इसकी सामाजिक व्यवस्था को आधुनिक रूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

Shahjahanpur History: उत्तर प्रदेश का शाहजहांपुर जिला न केवल अपनी ऐतिहासिक इमारतों और वीरों की गाथाओं के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि इसका प्रशासनिक सफर भी बेहद दिलचस्प रहा है. रुहेला शासकों के अधीन रहने के बाद, इस जिले ने मुगल काल से लेकर ब्रिटिश हुकूमत तक कई बड़े बदलाव देखे. डॉ विकास खुराना ने बताया कि कैसे यह जिला बरेली की एक तहसील से स्वतंत्र जिला बना और यहां के जिलाधिकारियों ने अपनी कार्यकुशलता से इसके विकास में योगदान दिया.

प्रख्यात इतिहासकार डॉ. विकास खुराना ने बताया कि शाहजहांपुर कभी रुहेलखंड का सबसे दक्षिणी जिला हुआ करता था. 1773 में मीरानपुर कटरा के युद्ध के बाद यह क्षेत्र अवध के प्रभाव में आया और फिर 1801 में ब्रिटिश शासन का हिस्सा बना. वर्ष 1813 के आसपास इसे एक स्वतंत्र जिले के रूप में पहचान मिली. उन्होंने विशेष रूप से उन प्रशासनिक अधिकारियों का उल्लेख किया जिन्होंने यहां की सामाजिक व्यवस्था को सुधारा, जिनमें पोल बुलर का नाम प्रमुख है, जिन्होंने सामुदायिक वानिकी की शुरुआत की.

शाहजहांपुर जिला ऐतिहासिक रूप से रुहेलखंड क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है. डॉ. विकास खुराना बताते हैं कि रुहेला शासकों के कार्यकाल के दौरान, यह रुहेलखंड का सबसे दक्षिणी जिला था. इसकी भौगोलिक स्थिति इसे रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण बनाती थी. 18वीं शताब्दी में हुए युद्धों और सत्ता परिवर्तनों ने इस क्षेत्र के भविष्य को नई दिशा दी. रुहेला संस्कृति और स्थापत्य कला की झलक आज भी यहां के कई ऐतिहासिक स्थलों पर स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है.

अवध का प्रभाव और ब्रिटिश शासन का आगमन
1773 में मी रानपुर कटरा के ऐतिहासिक युद्ध के बाद शाहजहांपुर का नियंत्रण अवध के नवाबों के हाथों में चला गया. लगभग तीन दशकों तक यह अवध के प्रभाव में रहा, लेकिन नवंबर 1801 में अंग्रेजों ने इसे अपनी रियासत में मिला लिया. शुरुआती दिनों में इसे स्वतंत्र जिले के बजाय बरेली जिले की एक तहसील के रूप में रखा गया था. उस समय का प्रशासन ‘जॉइंट मजिस्ट्रेट’ स्तर के अधिकारियों द्वारा संचालित होता था, जो जिले की कानून व्यवस्था और राजस्व देखते थे.

तहसील से स्वतंत्र जिला बनने तक का सफर
शाहजहांपुर को 1813 के आसपास एक स्वतंत्र जिले का दर्जा मिला. 1814 में मूर मैक्युटर्नी को यहां का पहला अतिरिक्त मजिस्ट्रेट नियुक्त किया गया. धीरे-धीरे यहां प्रशासनिक ढांचा मजबूत हुआ और 1819 में यह पश्चिमी राजस्व बोर्ड के अधीन आ गया. डॉ. खुराना ने रॉबर्ट लॉथर और हेनरी स्वीटनहैम जैसे जिलाधिकारियों का जिक्र किया, जिन्होंने जिले के विकास के लिए व्यापक कार्य किए. इन अधिकारियों ने कृषि, शिक्षा और बुनियादी ढांचे को सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी.

प्रशासनिक अधिकारियों का योगदान और 1857 की क्रांति
1857 की क्रांति के दौरान भी शाहजहांपुर एक प्रमुख केंद्र रहा. डॉ. खुराना ने बताया कि क्रांति के समय यहां कई अधिकारियों ने अपनी जान गंवाई, लेकिन यहां के लोगों का जज्बा कम नहीं हुआ। 1886 में जी.एस. पोर्टर जैसे अधिकारियों ने जनहित में कार्य किए, जिनके नाम पर आज भी तिलहर में पोर्टरगंज बाजार प्रसिद्ध है. स्वतंत्रता के बाद भी भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों ने शाहजहांपुर को विकास की नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया, जिससे आज यह एक औद्योगिक और ऐतिहासिक हब बन गया है.

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Rahul Goel

राहुल गोयल न्यूज़ 18 हिंदी में हाइपरलोकल (यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश) के लिए काम कर रहे हैं. मीडिया इंडस्ट्री में उन्हें 16 साल से ज्यादा का अनुभव है, जिसमें उनका फोकस हमेशा न्यू मीडिया और उसके त…और पढ़ें



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