नोएडा में भड़की हिंसा के आठ दिन बाद कैसा है माहौल? पटरी पर लौटी एनसीआर की अर्थव्यवस्था
नोएडा: पिछले हफ्ते नोएडा में भड़की हिंसा, तोड़फोड़ और आगजनी की कोशिशों को अब आठ दिन बीत चुके हैं. उस दिन का मंजर ऐसा था कि अगर थोड़ी देर और होती तो न जाने क्या होता… वाली लाइन हर किसी की जुबान पर है. ग्राउंड जीरो पर पहुंचकर जब मार्केट, फैक्ट्री एरिया और आम लोगों से बात की गई, तो एक ही बात सामने आई. नोएडा उस दिन बड़े हादसे से बाल-बाल बचा. आज तस्वीर अलग है, बाजार खुल चुके हैं, फैक्ट्रियों में मशीनें फिर चल रही हैं और मजदूर अपनी रोजी-रोटी पर लौट आए हैं. लेकिन उस दिन का डर अभी भी लोगों की आवाज में साफ झलकता है.
रील नहीं रीयल में थे उपद्रवी
सेक्टर 62 के बी-ब्लॉक मार्केट में दुकानदारों ने उस दिन की कहानी सुनाते हुए बताया कि हालात फिल्मी दंगे जैसे हो गए थे. बस फर्क इतना कि यह रील नहीं, रियल था. उपद्रवी हाथों में डंडे, पत्थर और पेट्रोल-डीजल में भीगे कपड़े लेकर घूम रहे थे. एक दुकानदार ने कहा, हमें लगा कि अब हमारी मार्केट भी आग के हवाले होने वाली है. लेकिन तभी पुलिस की एंट्री हुई और हालात संभाले गए. समय रहते फोर्स की तैनाती ने बड़ा नुकसान टाल दिया, वरना कई दुकानें राख में बदल सकती थीं.
दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे और इलेक्ट्रॉनिक सिटी के आसपास हालात और भी तनावपूर्ण थे. यहां उपद्रवियों ने जाम लगाने की कोशिश की, वहीं पास के एक सर्विस सेंटर पर गाड़ियों में तोड़फोड़ और आगजनी भी की गई. आसपास काम करने वाले लोगों, ऑटो ड्राइवरों और दुकानदारों ने बताया कि माहौल इतना खराब था कि लोगों को जबरन रोककर हिंसा में शामिल होने का दबाव बनाया जा रहा था. एक ऑटो चालक ने कहा, सड़क पर निकलना मतलब खुद को खतरे में डालना था. भीड़ सिर्फ गुस्से में नहीं थी, बल्कि उसे भड़काया भी जा रहा था.
जेपी यूनीवर्सिटी में था डर का माहौल
वहीं, जेपी यूनिवर्सिटी के कैंपस में भी खतरे की आहट साफ सुनाई दे रही थी. सीनियर एडमिन मैनेजर अजीत तोमर के मुताबिक, करीब 2 हजार छात्रों की सुरक्षा सबसे बड़ी चिंता थी. पुलिस ने पहले ही अलर्ट कर दिया था, जिसके बाद कैंपस में सुरक्षा बढ़ा दी गई. कई बार लगा कि उपद्रवी यूनिवर्सिटी की तरफ बढ़ सकते हैं, लेकिन भारी पुलिस बल की मौजूदगी ने उन्हें रोक दिया. दूसरी ओर, सेक्टर 57-59 और 58 के इंडस्ट्रियल एरिया में गारमेंट्स कारोबारी राजेश कटियार ने बताया कि उन्होंने सबसे पहले अपने वर्कर्स को सुरक्षित किया. हालात ऐसे थे कि फैक्ट्री बचाना बाद की बात थी, पहले लोगों की जान बचाना जरूरी था. इस पूरे घटनाक्रम में एक बात साफ दिखी—अगर समय रहते पुलिस हरकत में नहीं आती, तो नोएडा की कई मार्केट और फैक्ट्रियां आज सिर्फ राख की कहानी सुनातीं.
30 से 35 प्रतिशत कम गए वर्कर्स
आपको बता दें कि अबतक पुलिस कमिश्नरेट ने हालात को भांपते हुए तेजी से कार्रवाई की और मुख्य आरोपियों आदित्य आनंद, रूपेश राय और मनीषा चौहान समेत कई लोगों को गिरफ्तार कर लिया है. अब आठ दिन बाद हालात सामान्य हैं, डर कम हो चुका है और जिंदगी फिर पटरी पर लौट आई है. हालांकि कंपनी मालिकों का कहना है कि हिंसा के दौरान घर गए वर्कर्स काम पर नहीं लौटे है और कंपनियों में फिलहाल 30 से 35 प्रतिशत वर्कर्स की गारमेंट्स सेक्टर में कमी देखी जा रही है.