बारिश के बाद फसलों पर तना सड़न का हमला! देखते ही देखते सूख रही फसलें, जानें बचाव के उपाय

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बारिश के बाद फसलों पर तना सड़न का हमला! देखते ही देखते सूख रही फसलें, जानें बचाव के उपाय


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बारिश के बाद फसलों पर तना सड़न का हमला! देखते ही देखते सूख रही फसलें

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Agriculture News: उत्तर प्रदेश में मौसम का मिजाज बदलते ही किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गई हैं. उमस भरी गर्मी और अचानक हुई बारिश ने मूंग, उड़द और लौकी-कद्दू जैसी फसलों पर स्टेम रॉट यानी तना सड़न का खतरा बढ़ा दिया है. कृषि विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर समय रहते पौधों का इलाज नहीं किया गया, तो पूरी मेहनत पर पानी फिर सकता है. जानिए कैसे आप अपनी फसलों को इस जानलेवा फंगस से बचा सकते हैं

शाहजहांपुर: उत्तर प्रदेश के कई जिलों में उमस भरी गर्मी और अचानक हुई बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. खासकर कद्दूवर्गीय सब्जियों और मूंग-उड़द की फसल में ‘स्टेम रॉट’ यानी तना सड़न की समस्या तेजी से फैल रही है. कृषि एक्सपर्ट का कहना है कि मौसम में आए इस अचानक बदलाव को पौधे सहन नहीं कर पा रहे हैं, जिससे तनों में सड़न पैदा हो रही है. अगर समय रहते उपचार न किया गया, तो पूरी फसल बर्बाद हो सकती है. कृषि विभाग ने किसानों को विशेष सावधानी बरतने और रसायनों के छिड़काव किए जाने की सलाह दी है.

कृषि एक्सपर्ट डॉ. हादी हुसैन खान ने बताया कि मई के अंत में जब अत्यधिक गर्मी और उमस के बीच अचानक बारिश होती है, तो पौधे इस विपरीत स्थिति को झेल नहीं पाते हैं. इससे तनों में सड़न (Stem Rot) शुरू हो जाती है. ऐसे में किसान खेत में नमी बनाए रखने के लिए समय पर सिंचाई करें. अगर सड़न के लक्षण दिखें, तो कॉपर ऑक्सीक्लोराइड का 3 ग्राम प्रति लीटर पानी के घोल बनाकर पौधों की जड़ों के पास ड्रेंचिंग करें. जिसके प्रभावी परिणाम देखने को मिलेंगे.

मौसम का फसलों पर प्रतिकूल प्रभाव
वर्तमान में पड़ रही भीषण गर्मी और उसके बाद होने वाली छिटपुट बारिश ने वातावरण में उमस बढ़ा दी है. यह नमी और उच्च तापमान में फंगल इन्फेक्शन तेजी से फैलता है. कद्दूवर्गीय फसलें जैसे लौकी, तरोई, कद्दू और ग्रीष्मकालीन दलहन की फसल मूंग और उड़द इस समय संवेदनशील अवस्था में हैं. अचानक तापमान गिरने और फिर बढ़ने से पौधों की प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है, जिससे तना सड़न जैसी बीमारियां हावी होने लगती हैं और उत्पादन पर सीधा असर पड़ता है.
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 स्टेम रॉट के लक्षण और पहचान
‘स्टेम रॉट’ की पहचान करना काफी आसान है, लेकिन समय पर पहचान जरूरी है. इस बीमारी में पौधे के तने का निचला हिस्सा जो मिट्टी के करीब होता है, वह गलने या काला पड़ने लगता है. धीरे-धीरे यह सड़न ऊपर की ओर बढ़ती है और पौधा सूखकर गिर जाता है. किसानों को अपने खेतों का नियमित निरीक्षण करना चाहिए. अगर किसी भी पौधे में तना कमजोर या चिपचिपा दिखाई दे, तो समझ लेना चाहिए कि फफूंद का हमला शुरू हो चुका है और तुरंत उपचार की जरूरत है.

 वैज्ञानिक उपचार और ड्रेंचिंग विधि से बचाव 
इसके रोकथाम के लिए कॉपर ऑक्सीक्लोराइड का छिड़काव रामबाण है. 3 ग्राम दवा को 1 लीटर पानी में घोलकर सीधे पौधों की जड़ों के पास डालें, जिसे ‘ड्रेंचिंग’ कहा जाता है. यह विधि इसलिए कारगर है क्योंकि पौधा जाइलम ऊतकों के जरिए दवा को जड़ से लेकर ऊपरी तने तक खींच लेता है. इससे न केवल मौजूदा सड़न रुकती है, बल्कि आने वाले समय में भी फफूंद के आक्रमण से पौधे सुरक्षित रहते हैं.

सिंचाई प्रबंधन में बरतें सावधानी 
रोकथाम के लिए रसायन के छिड़काव के साथ-साथ प्रबंधन भी बेहद जरूरी है. पौधों को गर्मी के तनाव से बचाने के लिए हल्की और नियमित सिंचाई करते रहना चाहिए. खेत में पानी को रुकने न दें, क्योंकि ठहरा हुआ पानी सड़न को बढ़ा सकता है. सिंचाई हमेशा शाम के समय या सुबह जल्दी करनी चाहिए ताकि तापमान का संतुलन बना रहे. वैज्ञानिक तकनीक को अपनाकर किसान अपनी मेहनत की फसल को बर्बाद होने से बचा सकते हैं और बेहतर मुनाफा कमा सकते हैं.

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Seema Nath

सीमा नाथ 6 साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत शाह टाइम्स में रिपोर्टिंग के साथ की जिसके बाद कुछ समय उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम …और पढ़ें



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