बूंद-बूंद पानी को तरसता गांव, यहां कोई बेटी ब्‍याहना नहीं चाहता, 40 युवा कुंवारे बैठे

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बूंद-बूंद पानी को तरसता गांव, यहां कोई बेटी ब्‍याहना नहीं चाहता, 40 युवा कुंवारे बैठे


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Mahoba Water Crisis Reality : यूपी के महोबा के इस गांव की कहानी ना केवल दुखभरी, बल्कि परेशानियों से भरी है. सरकारी लापरवाही का शिकार इंसान कैसे होते हैं, ये बात महोबा जनपद के इस मुड़हरा गांव पर सटीक बैठती है. आरोप है कि सदर विधायक राकेश गोस्वामी जीतने के बाद पांच साल में एक बार भी यहां नहीं फटकते. नमामि गंगे योजना के तहत पाइपलाइन तो बिछा दी गई. पानी की टंकी भी खड़ी कर दी, लेकिन ढाई साल बीत जाने के बाद भी ग्रामीणों को आज तक पानी नसीब नहीं हुआ. देखिए इस गांव की ये रिपोर्ट…

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महोबा के मुड़हरा गांव के लोग बूंद-बूंद पानी को तरस रहे.

महोबा : यूपी में इस वक्‍त पड़ रही भीषण गर्मी के बीच महोबा से सामने आई ये तस्‍वीर शर्मिंदा करने वाली है. जल जो हर किसी के लिए जीवन है, वह यहां के बाशिंदों को मयस्‍सर नहीं है. हालांकि ये है कि महोबा मुख्यालय से सिर्फ 6 किलोमीटर दूर पर बूंद-बूंद पानी के लिए पूरा गांव तरस रहा है. यह हालात महोबा जनपद के मुड़हरा गांव के हैं, जो आज हर घर नल योजना के दावों की पोल खोल रहा है. करोड़ों की पानी की टंकी और पाइपलाइन सिर्फ दिखावा बनकर रह गई हैं. हालात इतने बदतर हैं कि पानी के इस भीषण संकट के कारण गांव के 40 से ज्यादा युवाओं की शादी तक नहीं हो पा रही.

बुंदेलखंड के महोबा जनपद के सदर तहसील के मुड़हरा गांव की ये कहानी है. कहने को तो सरकार ने यहां नमामि गंगे योजना के तहत पाइपलाइन बिछा दी. पानी की टंकी भी खड़ी कर दी, लेकिन ढाई साल बीत जाने के बाद भी ग्रामीणों को आज तक नसीब हुई तो सिर्फ पानी की टेस्टिंग. टेस्टिंग के बाद से नलों से पानी की एक बूंद तक नहीं उगली है. 2 हजार से ज्यादा आबादी वाला यह गांव आज भीषण गर्मी में सिर्फ तीन हैंडपंपों और एक मंदिर के कुएं के भरोसे जीने को मजबूर है.

दो हैंडपंपों का पानी इतना खारा कि बस पूछो मत
कहानी आगे और गंभीरता बयां करती है, क्‍योंकि तीन में से दो हैंडपंपों का पानी इतना खारा है कि उसे पीना तो दूर, इस्तेमाल करना भी बीमारी को न्योता देना है. गांव के बाहर लगा एकमात्र हैंडपंप ही अब प्यास बुझाने का इकलौता जरिया है, जहां दिनभर बच्चे, महिलाएं और बुजुर्गों की लाइन लगी रहती है.

पानी के इस संघर्ष ने अब यहां के युवाओं का भविष्य भी दांव पर लगा दिया है. गांव में करीब 30 से 40 लड़के ऐसे हैं, जिनकी उम्र शादी की हो चुकी है, लेकिन पानी की किल्लत देखकर कोई भी पिता इस गांव में अपनी बेटी ब्याहने को तैयार नहीं है. ग्रामीणों का कहना है कि रिश्तेदार आते हैं तो उनके नहाने के लिए पानी नहीं होता, उन्हें तालाब भेजना पड़ता है.

सदर विधायक राकेश गोस्वामी तो चुनाव बाद आकर फटकते भी नहीं
शादी-ब्याह के कार्यक्रमों में रुपये खर्च करके बाहर से पानी के टैंकर मंगवाने पड़ते हैं. गांव की सुमित्रा, संतोषी और सुमन जैसी महिलाओं का दर्द है कि उनकी पूरी जिंदगी सिर्फ पानी ढोने में बीत गई. अब उनके बच्चों की पढ़ाई भी इस समस्या की भेंट चढ़ रही है. ग्रामीणों में स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ भारी आक्रोश है. लोगों का आरोप है कि चुनाव के समय हाथ जोड़कर वोट मांगने वाले नेता और सदर विधायक राकेश गोस्वामी जीतने के बाद पांच साल में एक बार भी उनकी सुध लेने नहीं आए. हर घर जल का सरकारी दावा मुड़हरा गांव की जमीनी हकीकत के आगे पूरी तरह दम तोड़ चुका है.

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Sandeep KumarSenior Assistant Editor

I currently serve as a Senior Assistant Editor at News18 Hindi, leading State & Local18 operations across Uttar Pradesh, Uttarakhand, Delhi, Himachal Pradesh and Haryana. With over 17 years of experience in jou…और पढ़ें





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