मथुरा का रहस्यमयी सरोवर, जहां पारस पत्थर और नागमणि होने की मान्यता आज भी है जिंदा
मथुरा: ब्रज रहस्यों से भरा हुआ है. यहां हर कदम पर आस्था, इतिहास और किंवदंतियों से जुड़े कई ऐसे रहस्य मिलते हैं, जो लोगों को आज भी आकर्षित करते हैं. इन्हीं रहस्यों की पड़ताल के लिए लोकल 18 की टीम पहुंची गोवर्धन स्थित कुसुम सरोवर, जहां से जुड़े कई रोचक किस्से आज भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बने हुए हैं.
वृंदावन, मथुरा, गोवर्धन और गोकुल में भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का वर्णन हर जगह मिलता है. लेकिन गोवर्धन स्थित कुसुम सरोवर एक ऐसा स्थान है, जहां भगवान श्रीकृष्ण के परम भक्त रूप सनातन गोस्वामी से जुड़ी कई मान्यताएं और रहस्य प्रचलित हैं. कहा जाता है कि उनकी भगवान के प्रति ऐसी अटूट भक्ति थी कि उन्होंने बेशकीमती पारस पत्थर तक का मोह त्याग दिया. लोक मान्यताओं के अनुसार, उन्होंने अपनी भक्ति के प्रभाव से सैकड़ों पारस पत्थर प्रकट कर दिए थे.
लोकल 18 की टीम ग्राउंड रिपोर्ट के लिए कुसुम सरोवर पहुंची, जहां इन रहस्यों के बारे में जानने की कोशिश की गई. इस दौरान कई ऐसी बातें सामने आईं, जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं. लोकल 18 से बातचीत में पंडित हर्षवर्धन कौशिक ने बताया कि कुसुम सरोवर कोई साधारण सरोवर नहीं है, बल्कि यह बेहद रहस्यमयी स्थान माना जाता है. यहां हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं, लेकिन इसके पीछे की मान्यताओं और रहस्यों से अधिकांश लोग अनजान हैं.
कुसुम सरोवर की गहराई आज तक नहीं नापी जा सकी
बातचीत के दौरान पंडित हर्षवर्धन कौशिक ने बताया कि कुसुम सरोवर से जुड़ा सबसे बड़ा रहस्य इसकी गहराई है. लोक मान्यताओं के अनुसार, इसकी वास्तविक गहराई का आज तक पता नहीं चल सका है. उन्होंने दावा किया कि रूप सनातन गोस्वामी द्वारा एक पारस पत्थर इसी सरोवर में फेंका गया था, जिसके बारे में मान्यता है कि उसमें लोहे को सोना बनाने की शक्ति थी.
उन्होंने आगे बताया कि लोक मान्यता के अनुसार कुसुम सरोवर में आज भी पारस पत्थर और नागमणि मौजूद हैं. ऐसी मान्यता है कि जिसने भी इन्हें प्राप्त करने या छूने का प्रयास किया, वह या तो अंधा, गूंगा या बहरा हो गया, अथवा उसकी मृत्यु हो गई. हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की जा सकती.
पंडित हर्षवर्धन कौशिक के अनुसार, कुसुम सरोवर की गहराई इतनी अधिक है कि यदि एक के ऊपर एक 40 हाथी भी खड़े कर दिए जाएं, तब भी इसकी गहराई नहीं नापी जा सकती. उन्होंने यह भी बताया कि जब एक व्यक्ति ने पारस पत्थर को कुसुम सरोवर में फेंक दिया, तब रूप सनातन गोस्वामी ने सरोवर में हाथ डालकर बाहर निकाला तो उनके हाथ में सैकड़ों पारस पत्थर आ गए. यह चमत्कार देखकर वह व्यक्ति वहां से चला गया.
इच्छाधारी नाग की मणि से भी जुड़ी है मान्यता
मथुरा से करीब 28 किलोमीटर दूर गोवर्धन परिक्रमा मार्ग पर स्थित कुसुम सरोवर आज भी अनेक रहस्यों और लोक मान्यताओं को अपने भीतर समेटे हुए है. यहां एक और प्रचलित मान्यता इच्छाधारी नाग की नागमणि को लेकर भी है.
स्थानीय लोगों के अनुसार, कुसुम सरोवर में इच्छाधारी नाग की मणि आज भी मौजूद है. ऐसी मान्यता है कि जिसने भी उस नागमणि को पाने की इच्छा जताई या उसे प्राप्त करने का प्रयास किया, उसकी या तो मृत्यु हो गई या वह अंधा अथवा गूंगा हो गया. हालांकि, इन मान्यताओं के समर्थन में कोई वैज्ञानिक या ऐतिहासिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं.
लोकल 18 की टीम ने जब कुसुम सरोवर से जुड़े इन रहस्यों के बारे में स्थानीय लोगों और जानकारों से जानकारी जुटाई, तो कई रोचक मान्यताएं और कथाएं सामने आईं, जो आज भी इस ऐतिहासिक सरोवर को रहस्य और आस्था का केंद्र बनाए हुए हैं.