महराजगंजः घने जंगल व शांत वातावरण के बीच स्थित है बरगदही कुटी, प्रचलित है डरावनी कहानियां

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महराजगंजः घने जंगल व शांत वातावरण के बीच स्थित है बरगदही कुटी, प्रचलित है डरावनी कहानियां


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महराजगंज की बरगदही कुटी अब श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र बन गई है. नेपाल सीमा से सटे इस धार्मिक स्थल पर माता दुर्गा और भगवान शिव की प्रतिमाएं हैं. मंदिर के पुजारी नारायण प्रसाद ने बताया कि पहले इस स्थान पर बहुत कम लोग आते थे. चारों ओर घना जंगल, सुनसान वातावरण और स्थानीय स्तर पर प्रचलित डरावनी कहानियों के कारण लोग यहां आने से बचते थे. समय के साथ लोगों की आस्था बढ़ी और धीरे-धीरे श्रद्धालुओं की आवाजाही भी बढ़ने लगी.

महराजगंजः उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले में स्थित बरगदही कुटी अब श्रद्धालुओं के लिए आस्था का एक प्रमुख केंद्र बन गई है. नेपाल सीमा से सटे और वन क्षेत्र से घिरे इस इलाके में माता दुर्गा और भगवान शिव की उपस्थिति के कारण इस धार्मिक स्थल का विशेष महत्व माना जाता है. स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, बरगदही कुटी का इतिहास सैकड़ों साल पुराना है. कहा जाता है कि जब यह क्षेत्र घने जंगल और वीराने से घिरा हुआ था, उसी समय इस धार्मिक स्थल की स्थापना हुई थी. उस दौर में आसपास आबादी कम होने के कारण मंदिर तक पहुंचना आसान नहीं था.

घने जंगल व शांत वातावरण के बीच है मंदिर

मंदिर के पुजारी नारायण प्रसाद ने बताया कि पहले इस स्थान पर बहुत कम लोग आते थे. चारों ओर घना जंगल, सुनसान वातावरण और स्थानीय स्तर पर प्रचलित डरावनी कहानियों के कारण लोग यहां आने से बचते थे. समय के साथ लोगों की आस्था बढ़ी और धीरे-धीरे श्रद्धालुओं की आवाजाही भी बढ़ने लगी. बरगदही कुटी की एक खास बात यह है कि यहां माता दुर्गा और भगवान शिव की प्रतिमाएं एक ही धार्मिक परिसर में स्थापित हैं. श्रद्धालु यहां पूजा-अर्चना के साथ-साथ ध्यान और साधना के लिए भी पहुंचते हैं. स्थानीय लोगों के अलावा, आसपास के जिलों से भी बड़ी संख्या में भक्त दर्शन के लिए आते हैं.

लोकविश्वास के संगम के रूप में है पहचान

बरगदही कुटी का प्राकृतिक वातावरण इस धार्मिक स्थल को और भी खास बनाता है. मंदिर के आसपास हरियाली और जंगल का क्षेत्र है, जिससे यहां आने वाले लोगों को शांत वातावरण का अनुभव होता है. सोहगीबरवा वन्यजीव अभयारण्य के आसपास होने के कारण यहां प्राकृतिक सुंदरता भी देखने को मिलती है. पहले जिस जगह पर सुनसान माहौल और जंगल के कारण लोग जाने से कतराते थे, आज उसी स्थान के आसपास काफी चहल-पहल दिखाई देती है. मंदिर के सामने विकसित चौराहे पर दिनभर लोगों की आवाजाही बनी रहती है. स्थानीय लोग यहां बैठकर बातचीत करते हैं और कई लोग मंदिर परिसर में शांति से समय बिताते हैं. बरगदही कुटी अब केवल पूजा-अर्चना का स्थल नहीं, बल्कि आस्था, प्रकृति और स्थानीय लोकविश्वास के संगम के रूप में अपनी पहचान बना चुकी है.

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Rajneesh Kumar Yadav

Rajnish Kumar Yadav is a digital journalist and content publisher with over seven years of experience in print and digital media. He is currently working with News18 Digital (Local18) as a Content Publisher, wh…

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