मुंबई से भी महंगी है गोरखपुर की यह छोटी-सी दुकान, 30 साल से चल रहा कारोबार

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मुंबई से भी महंगी है गोरखपुर की यह छोटी-सी दुकान, 30 साल से चल रहा कारोबार


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Gorakhpur News: गोरखपुर के बदलते विकास की तस्वीर में यह छोटी-सी दुकान एक बड़ा संदेश देती है. शहर भले ही आधुनिक हो रहा हो, लेकिन उसकी असली पहचान आज भी उन छोटे कारोबारियों से जुड़ी है, जो सीमित संसाधनों में मेहनत के दम पर अपने परिवार का भविष्य संवार रहे हैं.

गोरखपुर: पिछले कुछ वर्षों में गोरखपुर का इंफ्रास्ट्रक्चर तेजी से बदला है. नए फ्लाईओवर, चौड़ी सड़कें और आधुनिक सुविधाओं ने शहर को विकास की नई पहचान दी है. इस बदलाव से जहां हजारों लोगों को रोजगार मिला, वहीं कई दुकानदारों को अपनी पुरानी दुकानें भी छोड़नी पड़ीं. बढ़ती महंगाई के बीच छोटे कारोबारियों के लिए दुकान चलाना भी आसान नहीं रहा. लेकिन इन्हीं परिस्थितियों के बीच शहर में एक ऐसी जगह भी है, जहां कुछ वर्ग मीटर की दुकान की कीमत और अहमियत किसी बड़े कमर्शियल स्पेस से कम नहीं है.

मुंबई वाली दुकान
आर्यनगर चौराहे के पास स्थित ‘ठाकुर मदन मोहन गली’ में कदम रखते ही दो बेहद छोटी दुकानें नजर आती हैं. पहली दुकान का आकार करीब 4.5 वर्ग मीटर, जबकि दूसरी करीब 3.5 वर्ग मीटर है. आकार भले ही छोटा हो, लेकिन इन दुकानों की कीमत और यहां कारोबार करने का महत्व इतना अधिक है कि स्थानीय लोग इसे मजाक में “मुंबई से भी महंगी जगह” कहने लगे हैं.

30 साल पहले शुरू हुआ सफर
इन्हीं दुकानों में से एक में हर्ष पटवा अपनी रोजी-रोटी कमाते हैं. लोकल 18 से बातचीत में हर्ष बताते हैं कि उनकी दुकान करीब 30 साल पुरानी है. इस दुकान की शुरुआत उनके पिता ने गुथाई आभूषणों में धागा और सजावटी काम के काम से की थी. समय बदला, पीढ़ी बदली, लेकिन दुकान आज भी उसी तरह परिवार का सहारा बनी हुई है. पिछले छह सालों से हर्ष खुद यहां बैठकर काम कर रहे हैं.

दुकान में शटर के अलावा कुछ नहीं
हर्ष बताते हैं कि दुकान का मासिक किराया 3000 रुपये है. दुकान इतनी छोटी है कि इसमें शटर के अलावा कोई विशेष सुविधा नहीं है. न बैठने की जगह और न सामान रखने की पर्याप्त व्यवस्था, बावजूद इसके इसी छोटी-सी जगह से पूरे परिवार का खर्च चलता है. इस गली की खासियत सिर्फ इसकी छोटी दुकानें नहीं, बल्कि यहां का व्यावसायिक महत्व भी है. शहर के प्रमुख बाजारों में होने के कारण यहां हर दिन बड़ी संख्या में ग्राहक पहुंचते हैं. यही वजह है कि कुछ वर्ग मीटर की यह जगह भी कारोबारियों के लिए किसी सोने की खान से कम नहीं मानी जाती.

मेहनत के दम परनचला रहे परिवार
गोरखपुर के बदलते विकास की तस्वीर में यह छोटी-सी दुकान एक बड़ा संदेश देती है. शहर भले ही आधुनिक हो रहा हो, लेकिन उसकी असली पहचान आज भी उन छोटे कारोबारियों से जुड़ी है, जो सीमित संसाधनों में मेहनत के दम पर अपने परिवार का भविष्य संवार रहे हैं. ठाकुर मदन मोहन गली की यह दुकान सिर्फ एक कारोबार नहीं, बल्कि संघर्ष, विरासत और आत्मनिर्भरता की जीवंत कहानी है.

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आर्यन सेठ

आर्यन सेठ, News18 Hindi में डिजिटल डेस्क पर जुड़े हैं और जनवरी 2026 से उत्तर प्रदेश की राजनीति, अपराध, प्रशासन, वायरल और अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर खबरें लिखते हैं. जामिया मिलिया इस्लामिया दिल्ल…और पढ़ें



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