रफी अहमद किदवई की विरासत, सुल्तानपुर में खास गैलरी में सुरक्षित, नेता जी से की थी मुलाकात
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मूल रूप से बाराबंकी में पैदा हुए रफी अहमद के विचार देशभक्ति वाले थे उनकी पढ़ाई इलाहाबाद विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन के तौर पर हुई और महात्मा गांधी द्वारा असहयोग आंदोलन के आह्वान पर रफी अहमद किदवई की पहली बार गिरफ्तारी हुई. 1922 में जहां लखनऊ में एक जेल में उनकी मुलाकात पंडित जवाहरलाल नेहरू से हो गई. देश की आजादी में रफी अहमद किदवई में काफी गहरा योगद
सुल्तानपुरः जिले में कई ऐसे स्वतंत्रता सेनानी पैदा हुए जिन्होंने भारत की आजादी में अहम भूमिका निभाई. उसी में एक थे रफी अहमद किदवई, जिन्होंने भारत को आजाद कराने में अहम भूमिका निभाई और वे भारत सरकार में आगे चलकर मंत्री भी बने. वैसे तो वे मूल रूप से बाराबंकी में जन्मे थे लेकिन उनका सुल्तानपुर से खासा संबंध रहा है. यही वजह है कि सुल्तानपुर जिले में आज भी उनके कपड़े, उनके आभूषण एक मकान में रखे गये हैं.
कादीपुर में सुभाष चंद्र बोष से हुई थी मुलाकात
सुल्तानपुर के वरिष्ठ पत्रकार विक्रम बृजेंद्र सिंह लोकल 18 से बताते हैं कि रफी अहमद किदवई से पंडित मोतीलाल नेहरू और भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू भी प्रभावित थे. उनका सुल्तानपुर से भी गहरा नाता रहा है क्योंकि सुल्तानपुर के बाबू गणपत सहाय, रफी अहमद किदवई के अच्छे मित्र थे सुल्तानपुर के जनपदीय संग्रहालय में आज भी रफी अहमद किदवई के जीवन से संबंधित कुछ सामान जैसे उनके कपड़े उनका चश्मा आदि रखे गए हैं. सुल्तानपुर के कादीपुर में स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान 1940 में एक बार सुभाष चंद्र बोस यहां पर आए थे और उसी दौरान रफी अहमद किदवई,विद्याधर बाजपेई और सुंदरलाल गुप्ता जैसे स्वतंत्रता सेनानियों ने कांग्रेस की बैठक को संबोधित किया था.
मूलरूप से बाराबंकी के थे रफीक अहमद
मूल रूप से बाराबंकी में पैदा हुए रफी अहमद के विचार देशभक्ति वाले थे उनकी पढ़ाई इलाहाबाद विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन के तौर पर हुई और महात्मा गांधी द्वारा असहयोग आंदोलन के आह्वान पर रफी अहमद किदवई की पहली बार गिरफ्तारी हुई. 1922 में जहां लखनऊ में एक जेल में उनकी मुलाकात पंडित जवाहरलाल नेहरू से हो गई. देश की आजादी में रफी अहमद किदवई में काफी गहरा योगदान दिया जिसके बाद 1952 में जवाहरलाल नेहरू की कैबिनेट में उनका खाद एवं कृषि मंत्री बनाया गया.
सुल्तानपुर में बनाई गई है गैलरी
रफी अहमद किदवई के जीवन से संबंधित कई सामान सुल्तानपुर की एक गैलरी में रखा गया है. इन सामानों में उनके कपड़े उनके द्वारा इस्तेमाल किए गए कप केतली,उनका चश्मा आदि है. रफी अहमद किदवई के जीवन से संबंधित सामग्रियों को सुरक्षित तरीके से रखा गया है अगर कोई चाहता है तो वह उनकी सामग्रियों के दर्शन कर सकता है . रफी अहमद किदवई और सुल्तानपुर के बाबू गणपत सहाय का संबंध जग जाहिर है वह दोनों बहुत ही अच्छे मित्र थे यही वजह थी कि रफी अहमद किदवई का सुल्तानपुर में आना-जाना भी हुआ करता था.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें