शारदा की तबाही का डरावना मंजर, नदी में समा रहे खेत-खलिहान और सड़कें

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शारदा की तबाही का डरावना मंजर, नदी में समा रहे खेत-खलिहान और सड़कें


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Lakhimpur Kheri News: लखीमपुर खीरी के रामनगर कलां गांव में शारदा नदी का कटान विकराल रूप ले चुका है. शारदा नदी के तेज कटान के कारण अब तक करीब 120 बीघा खड़ी गन्ने की फसल शारदा नदी में समा चुकी है. शारदा के कटान का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे ग्रामीणों और किसानों की चिंता बढ़ गई है.

लखीमपुर खीरी: उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में शारदा नदी का जलस्तर कम हो गया है. शारदा नदी का जलस्तर कम होने के साथ ही कटान में विकराल रूप ले लिया है. जहां एक ओर बाढ़ पीड़ितों को बाढ़ से राहत मिली, तो वहीं दूसरी ओर शारदा नदी का जलस्तर कम होने के बाद किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं.

वहीं अगर बात की जाए तहसील गोला के रामनगर कलां गांव के मजरा रामपुर की, तो यहां शारदा नदी का कटान विकराल रूप ले चुका है. शारदा नदी के तेज कटान के कारण अब तक करीब 120 बीघा खड़ी गन्ने की फसल शारदा नदी में समा चुकी है. शारदा के कटान का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे ग्रामीणों और किसानों की चिंता बढ़ गई है.

खेत को आगोश में ले लेती है शारदा की एक लहर
मेहनत मजदूरी और कर्ज लेकर किसान अपने खेतों में फसल लगते हैं और महज कुछ घंटे के अंदर शारदा नदी फसल को अपने आगोश में ले लेती है. किसान फसल खेतों में लगाते हैं और फसल तैयार होने तक विभिन्न सपने देखते हैं, लेकिन उनको क्या पता होता है कि शारदा की तबाही के कारण उनका सबकुछ बर्बाद हो जाएगा.

पीड़ित किसान रामसिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि उन्होंने बैंक से कर्ज लेकर खेती की थी और फसल भी अच्छी थी. लेकिन अब सब कुछ कटकर नदी में बह गया. उनकी मेहनत और पूंजी दोनों डूब गई है, जिससे परिवार का भरण-पोषण करना मुश्किल हो गया है.

बढ़ जाता है जीव-जन्तुओं का खतरा
वहीं दूसरी ओर निघासन तहसील क्षेत्र के ग्रॅट नंबर 12 गांव में शारदा नदी का जल स्तर कम हुआ है, जहां बाढ़ का पानी कम हो गया है. ऐसे में अब कटान तेज हो गया है. मिली जानकारी के अनुसार, जब नदी का जलस्तर कम होता है, तो कटान तेज हो जाता है. ऐसे में किसानों के खेत नदी में समाते जा रहे हैं. वहीं दूसरी ओर गांव तक पहुंचने के लिए संपर्क मार्ग बनाया गया था, वह संपर्क मार्ग भी लगातार नदी में समा रहा है.

यहां तक पहुंचने के लिए ग्रामीणों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. तराई क्षेत्र के रहने वाले लोगों को जुलाई से लेकर सितंबर तक सबसे अधिक मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. इस समय कहीं शारदा नदी का जलस्तर बढ़ता है, तो कहीं शारदा नदी का जलस्तर कम होता है. ऐसे में जीव-जंतुओं का भी खतरा बढ़ जाता है.

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आर्यन सेठ

आर्यन सेठ, News18 Hindi में डिजिटल डेस्क पर जुड़े हैं और जनवरी 2026 से उत्तर प्रदेश की राजनीति, अपराध, प्रशासन, वायरल और अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर खबरें लिखते हैं. जामिया मिलिया इस्लामिया दिल्ल…

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