शौक में शुरू किया किचन गार्डन, बना कमाई का जरिया! गोंडा की महिला ने खेती से बदल दी किस्मत

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शौक में शुरू किया किचन गार्डन, बना कमाई का जरिया! गोंडा की महिला ने खेती से बदल दी किस्मत


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Gonda Farmer Success Story: गोंडा की रहने वाली विमला मौर्य ने अपनी मेहनत से एक ऐसी मिसाल पेश की है, जो आज हर महिला के लिए प्रेरणा बन चुकी है. सिर्फ 5वीं तक पढ़ी विमला ने कृषि विज्ञान केंद्र की सलाह पर घर की खाली पड़ी जगह में छोटा सा किचन गार्डन शुरू किया था, जो आज 2-3 बीघे के बड़े स्तर पर पहुंच चुका है. इस काम से वह न सिर्फ अपने परिवार को केमिकल फ्री ताजी सब्जियां खिला रही हैं, बल्कि 4 साल से बीमार अपने पति का इलाज और बच्चों की पढ़ाई का खर्च भी अकेले इसी कमाई से उठा रही हैं. जानिए कैसे उनका का यह छोटा सा शौक आज उनकी मोटी कमाई और आत्मनिर्भरता का सबसे बड़ा जरिया बन गया है.

गोंडा: कहते हैं कि अगर कुछ करने का जज्बा हो, तो कम पढ़ाई-लिखाई या सीमित साधन भी आपकी राह में रोड़ा नहीं बन सकते. उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले से एक ऐसा ही कहानी सामने आई है. यहां के विकासखंड परसपुर के तुलसीपुर गांव में रहने वाली एक साधारण हाउसवाइफ विमला मौर्य ने अपने घर की खाली पड़ी जमीन का ऐसा बेहतरीन इस्तेमाल किया कि आज वह आत्मनिर्भर बन चुकी हैं. विमला ने अपने घर के आसपास की जगह को एक शानदार और हरे-भरे किचन गार्डन में बदल दिया है, जिससे न केवल उनके परिवार को खाने के लिए ताजी और पौष्टिक सब्जियां मिल रही हैं, बल्कि इससे उनकी अच्छी-खासी आमदनी भी हो रही है.

गृह वैज्ञानिक की सलाह ने बदल दी जिंदगी
विमला मौर्य ने बताया कि वह केवल पांचवीं क्लास तक पढ़ी हैं. पढ़ाई के बाद जल्द ही उनकी शादी हो गई और वह घर-परिवार संभालने में व्यस्त हो गईं. एक आम हाउसवाइफ की तरह जिंदगी जी रही विमला को दीनदयाल शोध संस्थान, केवीके गोपाल ग्राम की गृह वैज्ञानिक डॉ. ममता त्रिपाठी से मिलने का मौका मिला. डॉ. ममता ने ही उन्हें किचन गार्डन के फायदों के बारे में समझाया और सब्जियां उगाने के लिए प्रेरित किया. विमला ने शुरुआत में शौक के तौर पर कुछ पौधे लगाए थे. लेकिन जब पौधों की अच्छी ग्रोथ हुई और घर के इस्तेमाल के लिए ताजी सब्जियां मिलने लगीं, तो उनका हौसला बढ़ गया. आज विमला लगभग दो से तीन बीघा के बड़े रकबे में बेहतरीन तरीके से किचन गार्डन चला रही हैं.

बगीचे में उगाई जा रही हैं हर तरह की सब्जियां
उन्होंने अपने इस बगीचे में टमाटर, भिंडी, लौकी, तोरई, मिर्च, बैंगन, अरबी (घुइयां), बोड़ा और हरा धनिया जैसी कई सब्जियां लगाई हैं. विमला बताती हैं कि हर दिन पौधों को समय पर पानी देती हैं, आसपास से खरपतवार साफ करती हैं और सबसे जरूरी बात यह है कि वह किसी भी तरह की रासायनिक खाद या केमिकल का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं करतीं. वह अपने खेतों में केवल गोबर की खाद और घर में तैयार होने वाली जैविक खाद ही डालती हैं, जिससे सब्जियां सेहत के लिए पूरी तरह सुरक्षित और बेहद स्वादिष्ट होती हैं.

किचन गार्डन से चल रहा है पूरा परिवार
विमला के लिए यह किचन गार्डन अब सिर्फ घर की जरूरत पूरी करने का साधन नहीं, बल्कि कमाई का मुख्य जरिया बन चुका है. बड़े स्तर पर सब्जियां उगाने के कारण अब वे इन्हें स्थानीय बाजार में सप्लाई भी करती हैं. उनके पति पिछले 4 सालों से काफी बीमार हैं. इस मुश्किल वक्त में उनके किचन गार्डन से इतनी अच्छी कमाई हो जाती है कि वह अपने बच्चों की अच्छे से देखभाल कर पा रही हैं, घर का पूरा खर्च चला रही हैं और इसी आमदनी से अपने बीमार पति का पूरा इलाज भी करवा रही हैं.

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Seema Nath

सीमा नाथ 6 साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत शाह टाइम्स में रिपोर्टिंग के साथ की जिसके बाद कुछ समय उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम …और पढ़ें



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