सऊदी अरब तक पहुंची जौनपुर के इत्र की महक, जकारिया परिवार सहेज रहा 7 पीढ़ी पुरानी विरासत
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Jaunpur Ittar Family: जौनपुर की पहचान सिर्फ अपनी ऐतिहासिक इमारतों और संस्कृति तक सीमित नहीं है. यहां की एक खुशबूदार विरासत भी है, जिसे एक परिवार पिछले करीब 200 साल से संभाल रहा है. वर्ष 1805 में शुरू हुआ इत्र का यह कारोबार अब सातवीं पीढ़ी तक पहुंच चुका है. परिवार आज भी पारंपरिक तरीके से इत्र तैयार करता है और इसकी मांग जौनपुर से बाहर देश के कई शहरों के साथ सऊदी अरब तक है. परिवार के यहां 200 से 250 से ज्यादा तरह के इत्र तैयार किए जाते हैं.
जौनपुर: यूपी के जौनपुर की पहचान सिर्फ अपनी ऐतिहासिक इमारतों और संस्कृति से ही नहीं है, बल्कि यहां की खुशबू भी अपनी अलग पहचान रखती है. शहर में इत्र बनाने और बेचने का काम लंबे समय से चला आ रहा है. इसी परंपरा को जकारिया परिवार करीब दो सदियों से संभाल रहा है. साल 1805 में शुरू हुआ यह कारोबार अब सातवीं पीढ़ी तक पहुंच चुका है और जौनपुर के इत्र की खुशबू देश के अलग-अलग शहरों से लेकर सऊदी अरब तक पहुंच रही है.
जकारिया परिवार के मोहम्मद मुस्तफा के मुताबिक, उनके परिवार में इत्र का कारोबार वर्ष 1805 से लगातार चला आ रहा है. परिवार की हर पीढ़ी इस काम से जुड़ी रही है. आज जौनपुर के साथ मुंबई, कोलकाता और सऊदी अरब में भी परिवार के लोग इत्र का कारोबार संभाल रहे हैं. उनके मुताबिक, परिवार की शुरुआत हाफिज जकारिया ने की थी और तब से यह परंपरा आगे बढ़ती चली आ रही है.
सात पीढ़ियों से संभाल रहे इत्र का कारोबार
मोहम्मद मुस्तफा बताते हैं कि वह परिवार की सातवीं पीढ़ी हैं, जो इत्र के कारोबार को आगे बढ़ा रहे हैं. परिवार के कई सदस्य आज भी इसी काम से जुड़े हुए हैं. जकारिया परिवार के मुताबिक, उनके यहां तैयार होने वाले इत्र की शुद्धता और अलग खुशबू लोगों को पसंद आती है. यही वजह है कि दूर-दूर से लोग जौनपुर पहुंचकर यहां से इत्र खरीदते हैं.
जौनपुर से देश के कई शहरों तक पहुंचती है खुशबू
जकारिया परिवार के इत्र की मांग सिर्फ जौनपुर तक सीमित नहीं है. मुंबई, दिल्ली, सुल्तानपुर समेत देश के कई हिस्सों से लोग यहां का इत्र खरीदते हैं. परिवार के मुताबिक, सऊदी अरब में भी जौनपुर के इत्र की मांग है. वहां परिवार की दुकान के जरिए इत्र की बिक्री की जाती है. विदेश में रहने वाले कई ग्राहक और परिवार के परिचित भारत आने पर जौनपुर से इत्र लेकर जाते हैं.
200 से ज्यादा तरह की खुशबू
जकारिया परिवार के यहां 200 से 250 से ज्यादा तरह के इत्र तैयार किए जाते हैं. इनमें चमेली, मजमुआ, बेला और गुलाब जैसे पारंपरिक इत्र शामिल हैं. वहीं बदलती पसंद को देखते हुए सबाया, अल-फारिस, इंटीमेट और ऊध जैसी खुशबू भी तैयार की जाती हैं. परिवार का कहना है कि बाजार में अल्कोहल वाले परफ्यूम की मांग बढ़ने के बावजूद प्राकृतिक इत्र की अपनी अलग पहचान है. जकारिया परिवार के अनुसार, पारंपरिक तरीके से तैयार किए गए इत्र की खुशबू लंबे समय तक बनी रहती है. यही वजह है कि करीब दो सौ साल पुरानी यह खुशबू आज भी नई पीढ़ी के बीच अपनी जगह बनाए हुए है.
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Seema Nath is a digital journalist and content creator with 6 years of experience in journalism, including ground reporting, regional news coverage and feature writing. She currently works as a Content Producer…
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