सादे कपड़ों में पहुंची एसपी साउथ को सैल्यूट न करना पड़ा भारी, सिपाही को ट्रेनिंग पर भेजा
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आंवला थाने के औचक निरीक्षण पर पहुंचीं बरेली की एसपी साउथ अंशिका वर्मा को गेट पर तैनात नए सिपाही परम सिंह ने सैल्यूट नहीं किया. सिपाही ने बाद में माफी मांगते हुए कहा कि एसपी साउथ सादे कपड़ों में थीं, इसलिए वह उन्हें पहचान नहीं सका. घटना के बाद एसपी ने उसे 15 दिनों के लिए रिजर्व पुलिस लाइन भेजने का आदेश दिया, जहां उसे ड्रिल और वरिष्ठ अधिकारियों को सैल्यूट करने की विशेष ट्रेनिंग दी जाएगी. मामला सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद एसपी साउथ ने स्पष्ट किया कि यह कोई सजा नहीं, बल्कि नए सिपाहियों की कमियों को सुधारने की सामान्य विभागीय प्रशिक्षण प्रक्रिया है.
बरेली की एसपी साउथ अंशिका वर्मा
बरेली. अंशिका वर्मा ने 9 मई को आंवला थाने का औचक निरीक्षण किया, निरीक्षण के दौरान थाने के मुख्य गेट पर तैनात नए सिपाही परम सिंह ने उन्हें सैल्यूट नहीं किया. यह घटना उस समय हुई जब एसपी साउथ सादे कपड़ों में थाने पहुंची थी, मामले को लेकर पुलिस विभाग में चर्चा शुरू हो गई और बाद में यह खबर सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो गई. घटना के बाद सिपाही परम सिंह ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए एसपी साउथ से माफी मांगी. उसने बताया कि वह उन्हें पहचान नहीं सका, क्योंकि उस समय वह पुलिस वर्दी में नहीं थी. नए सिपाही होने के कारण वह असमंजस में पड़ गया और नियमानुसार सैल्यूट नहीं कर पाया. सिपाही ने कहा कि उसका किसी तरह का अनादर करने का इरादा नहीं था.
15 दिन की विशेष ट्रेनिंग का आदेश
मामले को गंभीरता से लेते हुए एसपी साउथ अंशिका वर्मा ने सिपाही परम सिंह को 15 दिनों के लिए रिजर्व पुलिस लाइन भेजने का आदेश दिया. यहां उसे ड्रिल, अनुशासन और वरिष्ठ अधिकारियों को सैल्यूट करने की विशेष ट्रेनिंग दी जाएगी. विभागीय अधिकारियों के अनुसार यह प्रशिक्षण नए सिपाहियों में अनुशासन और व्यवहारिक दक्षता बढ़ाने के उद्देश्य से कराया जाता है.
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ मामला
सिपाही को ट्रेनिंग पर भेजे जाने का आदेश सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद लोगों ने इस पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दी. कुछ लोगों ने इसे अनुशासन बनाए रखने के लिए जरूरी कदम बताया, जबकि कुछ ने इसे छोटी गलती पर कठोर कार्रवाई माना. देखते ही देखते मामला चर्चा का विषय बन गया.
एसपी साउथ ने दी सफाई
विवाद बढ़ने पर एसपी साउथ अंशिका वर्मा ने अपनी सफाई में कहा कि यह किसी प्रकार की सजा नहीं है. उन्होंने स्पष्ट किया कि नए सिपाहियों की कमियों को दूर करने और उन्हें बेहतर पुलिस प्रशिक्षण देने के लिए इस तरह की विभागीय प्रक्रिया अपनाई जाती है. उनका कहना है कि पुलिस बल में अनुशासन और व्यवहारिक प्रशिक्षण बेहद महत्वपूर्ण होता है, इसलिए समय-समय पर ऐसे अभ्यास कराए जाते हैं.
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नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें