सावन में इन 7 शिव मंदिरों में करें पूजा-अर्चना, भोलेनाथ का मिलेगा आशीर्वाद

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सावन में इन 7 शिव मंदिरों में करें पूजा-अर्चना, भोलेनाथ का मिलेगा आशीर्वाद


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सावन माह शुरू होते ही लखीमपुर खीरी के गोला गोकर्णनाथ धाम में भक्तों का सैलाब उमड़ने लगता है. छोटी काशी के नाम से प्रसिद्ध यह शिवधाम अपनी धार्मिक मान्यता और आस्था के लिए दूर-दूर तक जाना जाता है, जहां लाखों श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करने पहुंचते हैं.

लखीमपुर शहर के मोहल्ला सिविल लाइन में पुराने एसपी बंगले के पास स्थित जंगली नाथ मंदिर का इतिहास काफी पुराना है. मान्यता है कि यहां पहले घने जंगल हुआ करते थे और इन्हीं जंगलों के बीच शिवलिंग मिली थी. जंगल में शिवलिंग मिलने के कारण इस मंदिर का नाम जंगली नाथ पड़ गया. सावन माह में यहां हजारों की संख्या में शिव भक्त भगवान भोलेनाथ की आराधना के लिए पहुंचते हैं. शहर के बीचों-बीच स्थित होने के कारण प्रतिदिन भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूजा-अर्चना करने आते हैं. सोमवार के दिन यहां सबसे अधिक भीड़ रहती है. मान्यता है कि इस मंदिर में मांगी गई हर मनोकामना पूरी होती है.

लखीमपुर खीरी के मेला मैदान में स्थित भुईफोरवानाथ मंदिर शहर और आसपास के क्षेत्रों में आस्था का प्रमुख केंद्र है. यह मंदिर अपनी प्राचीनता, धार्मिक महत्व और अनूठी मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध है. मंदिर का नाम भुईफोरवानाथ इसलिए पड़ा क्योंकि मान्यता है कि यहां स्थापित शिवलिंग भूमि को फोड़कर स्वयं प्रकट हुआ था, जिसे स्वयंभू शिवलिंग के रूप में पूजा जाता है. सावन माह में हजारों की संख्या में शिव भक्त यहां पहुंचकर भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं और अपनी मनोकामना मांगते हैं.

लखीमपुर खीरी जिले में स्थित प्राचीन पालन नाथ शिव मंदिर अपनी अनूठी परंपरा और धार्मिक मान्यता के लिए प्रसिद्ध है. मान्यता है कि यहां मनोकामना पूरी होने पर श्रद्धालु भगवान शिव को झाड़ू चढ़ाते हैं. मोहम्मदी-बरवर रोड पर स्थित यह मंदिर महाभारत कालीन माना जाता है और कहा जाता है कि यहां स्थापित शिवलिंग की स्थापना भी उसी काल में हुई थी. सावन माह में यहां हजारों की संख्या में शिव भक्त भगवान शिव के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं.

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लखीमपुर खीरी जिले में स्थित एक प्राचीन शिव मंदिर के बारे में मान्यता है कि यहां की मिट्टी जहां रख दी जाए, वहां सांप नहीं आते. लखीमपुर शहर से पश्चिम दिशा में करीब नौ किलोमीटर दूर स्थित यह स्थान पौराणिक देवकली तीर्थ के नाम से प्रसिद्ध है. यह स्थल महाभारत कालीन राजा जन्मेजय की नाग यज्ञ स्थली के रूप में भी जाना जाता है.

लखीमपुर जिला मुख्यालय से करीब 55 किलोमीटर दूर स्थित टेढ़े नाथ शिव मंदिर एक प्राचीन और प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है. मान्यता है कि इस मंदिर की स्थापना महाभारत काल में अर्जुन ने की थी. श्रद्धालुओं के अनुसार यहां जलाभिषेक करने के बाद मांगी गई मन्नत पूरी होती है, इसलिए मंदिर की मान्यता लगातार बढ़ती जा रही है. सावन माह में लाखों की संख्या में कांवरिये यहां पहुंचकर भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं.

महाभारतकालीन लिलौटीनाथ शिव मंदिर अपनी पौराणिक महत्ता के लिए प्रसिद्ध है. शहर से करीब 8 किलोमीटर दूर जुनई और कंडवा नदी के बीच स्थित इस मंदिर के बारे में मान्यता है कि यहां शिवलिंग की स्थापना द्वापर युग में द्रोणाचार्य के पुत्र अश्वत्थामा ने की थी. मंदिर में स्थापित शिवलिंग पर उभरी आकृति को श्रद्धालु माता पार्वती का स्वरूप मानते हैं. सावन माह में यहां हजारों की संख्या में शिव भक्त दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं.

भगवान भोलेनाथ की आराधना को समर्पित सावन माह शुरू हो गया है. लखीमपुर खीरी जिले में छोटी काशी के नाम से प्रसिद्ध गोला गोकर्णनाथ का विशेष धार्मिक महत्व है. सावन के दौरान यहां लाखों की संख्या में कांवड़िये और शिव भक्त पहुंचकर भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक और पूजा-अर्चना करते हैं. श्रद्धालुओं की मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना पूरी होती है.

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