सुपर अल-नीनो का खतरा! अगर बारिश कम हुई तो किसान जरूर अपनाएं ये 7 उपाय
गाजीपुर: मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, यदि इस वर्ष सुपर एल-नीनो का प्रभाव बढ़ता है और सामान्य से कम बारिश होता है, तो इसका असर खरीफ फसलों पर पड़ सकता है. ऐसे में किसानों को घबराने की नहीं, बल्कि वैज्ञानिक तरीके अपनाने की जरूरत है. कृषि विज्ञान केंद्र, गाजीपुर के कृषि विशेषज्ञ डॉ. ओंकार सिंह ने किसानों के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं.
क्या है सुपर एल-नीनो?
डॉ. ओंकार सिंह बताते हैं कि एल-नीनो एक प्राकृतिक जलवायु घटना है, जो हर कुछ वर्षों में देखने को मिलती है. इसमें प्रशांत महासागर का सतही पानी सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है. इससे ट्रेड विंड्स यानी वे हवाएं, जो मानसून को भारत की ओर लाने में मदद करती हैं, कमजोर पड़ सकती हैं. इसका असर यह हो सकता है कि भारत के कई हिस्सों में सामान्य से कम या अनियमित बारिश हो. उन्होंने बताया कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों पर इसका प्रभाव अलग हो सकता है. कुछ क्षेत्रों में सूखे जैसी स्थिति बन सकती है, जबकि कुछ देशों में अत्यधिक वर्षा और बाढ़ की संभावना बढ़ जाती है.
कम बारिश हो तो किसान क्या करें?
डॉ. सिंह के अनुसार, यदि वर्षा कम हो तो किसान इन उपायों को अपनाएं-
1. मल्चिंग करें: फसल के आसपास सूखी घास, पुआल या जैविक अवशेष बिछाने से मिट्टी की नमी लंबे समय तक बनी रहती है और पानी की जरूरत कम पड़ती है.
2. मेड़ों पर खेती करें: खेत की मेड़ों पर उपयुक्त फसलें लगाने से वर्षा जल का बेहतर उपयोग होता है और मिट्टी का कटाव कम होता है.
3. सूखा सहन करने वाली फसलें चुनें: बाजरा, ज्वार और अन्य कम पानी वाली फसलें कम वर्षा की स्थिति में बेहतर विकल्प हो सकती हैं.
4. DSR (Direct Seeded Rice) तकनीक अपनाएं: इस विधि में धान की पौध रोपाई के बजाय बीज सीधे खेत में बोए जाते हैं. इससे पानी की खपत कम होती है और श्रम लागत भी घटती है.
5. SRI (System of Rice Intensification) तकनीक अपनाएं: इस तकनीक में कम पौधे, उचित दूरी और नियंत्रित सिंचाई के जरिए धान की बेहतर पैदावार लेने का प्रयास किया जाता है. इससे पानी की बचत भी होती है.
6. वर्षा जल का संचयन करें: खेत, तालाब और जल संरक्षण योजनाओं का लाभ उठाकर बारिश के पानी को संग्रहित करें, ताकि जरूरत पड़ने पर सिंचाई की जा सके.
7. सरकारी योजनाओं का लाभ लें: कृषि विभाग और अन्य सरकारी संस्थान किसानों को जल संरक्षण, मोटे अनाज (श्री अन्न) और वैज्ञानिक खेती के लिए लगातार प्रोत्साहित कर रहे हैं.
श्री अन्न पर भी जोर
डॉ. ओंकार सिंह का कहना है कि सरकार किसानों को श्री अन्न जैसे बाजरा और अन्य कम पानी वाली फसलों की खेती के लिए भी प्रोत्साहित कर रही है. यदि वर्षा सामान्य से कम होती है, तो ये फसलें किसानों के लिए बेहतर विकल्प साबित हो सकती हैं.