हजारों किताबों का खजाना होने के बावजूद क्यों बंद होने की कगार पर सुल्तानपुर की लाइब्रेरी?
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Vinayak Mehta Library Sultanpur: सुल्तानपुर जिले में तिकोनिया पार्क के पास स्थित करीब 100 साल पुरानी विनायक मेहता लाइब्रेरी आज अपने सुनहरे इतिहास और उपेक्षा के बीच खड़ी है. कभी यह पुस्तकालय ज्ञान का बड़ा केंद्र हुआ करता था, जहां हजारों किताबें साहित्य, इतिहास और क्रांतियों की यादें समेटे थीं. लेकिन आज देखरेख और बजट की कमी के चलते इसकी हालत लगातार खराब होती जा रही है. जो जगह कभी छात्रों और पाठकों से भरी रहती थी, अब अपने अस्तित्व को बचाने की कोशिश कर रही है.
सुल्तानपुर: एक समय था जब पुस्तकालयों को ज्ञान का मंदिर कहा जाता था. यहां से लोग पढ़ाई करके अपने भविष्य की नींव मजबूत करते थे. सुल्तानपुर जिले में स्थित विनायक मेहता लाइब्रेरी भी ऐसी ही एक ऐतिहासिक धरोहर है, जिसका इतिहास 100 साल से भी अधिक पुराना है. लेकिन आज यह लाइब्रेरी उपेक्षा और संसाधनों की कमी से जूझ रही है. इस पुस्तकालय में हजारों किताबें मौजूद हैं, जो साहित्य, इतिहास और क्रांतियों की महत्वपूर्ण जानकारियां समेटे हुए हैं. लेकिन देखरेख और बजट की कमी के कारण यह धरोहर धीरे-धीरे अपनी पहचान खोती जा रही है.
1927 से जनता के लिए खुला था दरवाजा
इस ऐतिहासिक पुस्तकालय की स्थापना वर्ष 1925 में आईसीएस अधिकारी वी.एन. मेहता द्वारा की गई थी. इसके बाद 1927 में इसे पूरी तरह तैयार कर आम जनता के लिए खोल दिया गया. यह पुस्तकालय आज भी सुल्तानपुर और आसपास के जिलों के छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए अध्ययन का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है. यहां लोग ज्ञान अर्जित करने और पढ़ाई के लिए नियमित रूप से आते हैं.
बजट की कमी से बढ़ी परेशानी, हजारों किताबें खतरे में
पुस्तकालय के अध्यक्ष देवनारायण सिंह ने बताया कि पहले नगर पालिका की ओर से कुछ आर्थिक सहायता मिलती थी, लेकिन अब वह भी बंद हो गई है. इसके कारण पुस्तकालय की देखरेख पर असर पड़ा है. उन्होंने बताया कि यहां 50,000 से अधिक किताबें मौजूद हैं, लेकिन उचित संरक्षण न मिलने के कारण कई किताबें खराब होने की कगार पर पहुंच चुकी हैं. यह स्थिति इस ऐतिहासिक धरोहर के लिए चिंता का विषय बन गई है.
हर विषय की किताबों का समृद्ध संग्रह
विनायक मेहता लाइब्रेरी में आज भी धार्मिक, सामाजिक और ऐतिहासिक पुस्तकों का ऐसा भंडार है जो शायद ही कहीं और मिले. इसके साथ ही युवाओं के लिए मोटिवेशनल और कॉम्पिटिशन की नई किताबें भी यहां मौजूद हैं. शहर के बीचों-बीच तिकोनिया पार्क के पास स्थित यह लाइब्रेरी आज चीख-चीखकर संरक्षण की गुहार लगा रही है.
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सीमा नाथ 6 साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत शाह टाइम्स में रिपोर्टिंग के साथ की जिसके बाद कुछ समय उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम …और पढ़ें