हर दिन 6.5 करोड़ रुपए का फायदा, कैसे सोलर मिशन ने बदली उत्तर प्रदेश की तस्वीर

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हर दिन 6.5 करोड़ रुपए का फायदा, कैसे सोलर मिशन ने बदली उत्तर प्रदेश की तस्वीर


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उत्तर प्रदेश में स्थापित 2.28 गीगावाट रूफटॉप सोलर क्षमता से प्रतिवर्ष लगभग 3.8 अरब यूनिट स्वच्छ बिजली का उत्पादन संभव है, जिससे हर साल करीब 27 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आ सकती है. कार्बन अवशोषण लगभग 12 करोड़ परिपक्व पेड़ों द्वारा एक वर्ष में किए जाने वाले अवशोषण के बराबर है.

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सोलर प्रोजेक्ट की बदौलत 85 हजार से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिला है.

लखनऊ. प्रधानमंत्री सूर्य घर : मुफ्त बिजली योजना के तहत घरेलू रूफटॉप सोलर संयंत्रों की स्थापना में उत्तर प्रदेश देश में दूसरे स्थान पर पहुंच गया है. प्रदेश सरकार के मुताबिक, राज्य में अब तक 6,74,393 घरेलू रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं. राष्ट्रीय रैंकिंग में गुजरात 7,49,839 संयंत्रों के साथ पहले और महाराष्ट्र 6,73,717 संयंत्रों के साथ तीसरे स्थान पर है.

सरकार ने शुक्रवार को जारी एक बयान में कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में योजना के प्रभावी क्रियान्वयन, विभागीय समन्वय और नियमित मॉनिटरिंग के चलते उत्तर प्रदेश ने यह उपलब्धि हासिल की है. सरकार के अनुसार उपभोक्ताओं को योजना से जोड़ने, सोलर संयंत्रों की स्थापना, बैंक ऋण, डिस्कॉम निरीक्षण और सब्सिडी प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए लगातार प्रयास किए गए. यूपी नेडा के निदेशक रविंदर सिंह ने बताया कि प्रदेश में अब तक 2,283.8 मेगावाट (2.28 गीगावाट) घरेलू रूफटॉप सोलर क्षमता विकसित की जा चुकी है.

उनके अनुसार इससे लाखों परिवार अपनी छतों पर स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन कर रहे हैं और पारंपरिक बिजली पर निर्भरता कम होने के साथ बिजली बिल में भी कमी आई है. उन्होंने दावा किया कि प्रदेश के परिवारों को प्रतिदिन लगभग 6.5 करोड़ रुपये मूल्य की सौर बिजली का लाभ मिल रहा है. उन्होंने कहा कि योजना के विस्तार से प्रदेश में सोलर क्षेत्र से जुड़ी 7,000 से अधिक कंपनियां और व्यावसायिक इकाइयां सक्रिय हुई हैं, जिनके माध्यम से 85 हजार से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिला है.

उन्होंने कहा कि सोलर पैनल स्थापना, डिजाइनिंग, इंजीनियरिंग, नेट मीटरिंग, लॉजिस्टिक्स, विपणन और रखरखाव जैसे क्षेत्रों में भी रोजगार के नए अवसर सृजित हुए हैं. रूफटॉप सोलर की बढ़ती मांग से सोलर विनिर्माण और आपूर्ति श्रृंखला को भी बढ़ावा मिला है. सोलर मॉड्यूल, इन्वर्टर, माउंटिंग स्ट्रक्चर, केबल और अन्य विद्युत उपकरणों के निर्माण तथा उनसे जुड़े उद्योगों में गतिविधियां बढ़ी हैं.

उन्होंने कहा कि रूफटॉप सोलर मॉडल के कारण बिजली उत्पादन के लिए अतिरिक्त भूमि की आवश्यकता नहीं पड़ती. सरकार का अनुमान है कि इससे 9,000 एकड़ से अधिक भूमि की बचत हुई है, जिसे अन्य विकास कार्यों के लिए संरक्षित रखा जा सका है. सरकार ने यह भी दावा किया कि प्रदेश में स्थापित 2.28 गीगावाट रूफटॉप सोलर क्षमता से प्रतिवर्ष लगभग 3.8 अरब यूनिट स्वच्छ बिजली का उत्पादन संभव है, जिससे हर साल करीब 27 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आ सकती है. कार्बन अवशोषण लगभग 12 करोड़ परिपक्व पेड़ों द्वारा एक वर्ष में किए जाने वाले अवशोषण के बराबर है.

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Rakesh Ranjan Kumar

राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें



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