अतीक के 2 पिलर उमर-अली, कइयों को दिया जख्म, आज अपने भाई की शव को देखकर बिखर गए

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अतीक के 2 पिलर उमर-अली, कइयों को दिया जख्म, आज अपने भाई की शव को देखकर बिखर गए


Abaan Ahmed Funeral: प्रयागराज की धरती ने दशकों तक अतीक अहमद का खौफ देखा है. यह वह शहर है जहां कभी अतीक और उसके परिवार के नाम से ही लोग खौफजदा हो जाते थे. इसके लिए जितना जिम्मेदार अतीक और उसके भाई अशरफ थे, उतना ही मोहम्मद उमर और अली अहमद भी थे. इन दोनों भाइयों ने अपने पिता की ही दुनिया चुनी.

अपहरण, रंगदारी, जमीनों पर कब्जे और धमकियों के जरिए इन्होंने न जाने कितने लोगों को गहरे जख्म दिए. कितने घरों के चिराग बुझाए और कितनों की आंखों में आंसू दिए. उमेश पाल हत्याकांड जैसे जघन्य अपराधों में इनकी संलिप्तता ने साबित किया कि इन्हें न कानून का खौफ था और न ही इंसानियत की परवाह. लेकिन वक्त का पहिया जब घूमता है, तो बड़े-बड़े बाहुबलियों का गुरूर मिट्टी में मिल जाता है.

कब्रिस्तान में बना गवाह
शनिवार को प्रयागराज के कसारी-मसारी कब्रिस्तान में जो नजारा दिखा, वह नियति के सबसे बड़े इंसाफ की गवाही दे रहा था. जिस भाई आबान को उन्होंने हमेशा अपनी छत्रछाया से दूर रखा, आज उसी भाई का बेजान जिस्म उनके सामने पड़ा था. भारी पुलिस सुरक्षा और प्रिजन वैन में कैद होकर जब उमर और अली अपने छोटे भाई के जनाजे में पहुंचे, तो उनका सारा रुतबा, सारा खौफ हवा हो चुका था. आबान के पार्थिव शरीर को देखते ही अतीक के ये दोनों पिलर लगभग बिखर ही गए थे. उनके आंसू सिर्फ एक भाई को खोने के नहीं थे, बल्कि उस बेबसी के भी थे.

जो बोओगे वही काटोगे
यह प्रकृति का नियम है कि आप जो बोते हैं, वही काटते हैं. जिन्होंने कभी अपनी ताकत के गुरूर में दूसरों को खून के आंसू रुलाया, आज उन आंखों से आंसुओं का सैलाब रुकने का नाम नहीं ले रहा था. अतीक का पूरा कुनबा आज ताश के पत्तों की तरह बिखर चुका है. पिता अतीक और चाचा अशरफ सरेआम मारे गए. भाई असद एनकाउंटर में ढेर हो गया. मां शाइस्ता परवीन खौफ के मारे दर-दर की ठोकरें खा रही है. अब सड़क हादसे में सबसे छोटे भाई आबान की दर्दनाक मौत ने इस परिवार के बचे-खुचे गुरूर को भी चकनाचूर कर दिया.

फफक कर रो पड़े तीनों भाई
कब्रिस्तान में उमर और अली का फफक कर रोना, एक-दूसरे के कंधे पर सिर रखकर बिलखना यह तस्वीर सिर्फ एक परिवार का दर्द नहीं है, बल्कि एक बहुत बड़ा सबक है. यह उन तमाम युवाओं के लिए एक कड़ा संदेश है जो अपराध, रंगदारी और हथियारों के दम पर अपना रसूख कायम करना चाहते हैं.

अंत तय है…
अपराध का साम्राज्य चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, उसका अंत होना तय है. आज उमर और अली की आंखों में जो लाचारी है, वह उन तमाम मजलूमों की आह का नतीजा है, जिन्हें उन्होंने कभी अपनी ताकत के नशे में कुचला था. कसारी-मसारी की मिट्टी आज चीख-चीख कर कह रही है कि जुर्म की इमारत चाहे कितनी भी ऊंची क्यों न हो, जब वह गिरती है, तो उसके मलबे में सबसे ज्यादा अपने ही दबते हैं.



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