अयोध्या में बहनें भगवान राम को भाई और मां जानकी को भाभी मानकर बांधती हैं राखी!
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Raksha Bandhan Celebration: अयोध्या में रक्षाबंधन पर महिलाएं भगवान राम को भाई और मां जानकी को भाभी मानकर राखी बांधती हैं. श्रंगार भवन मंदिर में यह परंपरा आज भी धूमधाम से निभाई जाती है.
अयोध्या: पूरे देश में बड़े धूमधाम से रक्षाबंधन का पर्व मनाया जा रहा है. बहनें अपने भाइयों की कलाई में राखी बांध रही हैं और भाई राखी के बदले रक्षा का वचन दे रहे हैं. लेकिन अयोध्या में रक्षाबंधन का त्योहार एक अलग परंपरा के अनुसार मनाया जाता है. रामनगरी अयोध्या की यह अनोखी परंपरा आज भी यहां देखने को मिलती है. यहां के प्रसिद्ध श्रंगार भवन पीठ पर मां जानकी और भगवान राम की पूजा की प्रधानता है. इस परंपरा के अनुसार महिलाएं भगवान राम को अपना भाई मानकर उन्हें राखी बांधती हैं और मां जानकी को भाभी की तरह मानकर राखी बांधकर अपने पूरे परिवार की रक्षा का आशीर्वाद लेती हैं.
आज भी निर्वहन होती है परंपरा
अयोध्या में यह प्राचीन परंपरा आज भी धूमधाम से निभाई जा रही है. यहां भाई-बहन के प्रेम के प्रतीक पवित्र रक्षाबंधन पर्व को बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है. श्रंगार भवन मंदिर में भगवान राम का शुभ मुहूर्त में अभिषेक किया जाता है और उनका श्रृंगार किया जाता है. इसके बाद भगवान रामलला की मुख्य मूर्ति को राखी बांधी जाती है. मां जानकी को भी राखी बांधी जाती है. राखी बांधने के बाद जगत पालनहार से पूरे परिवार की रक्षा का आशीर्वाद लिया जाता है. भगवान राम के साथ उनके भाइयों लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न को भी राखी बांधने के बाद आरती उतारी जाती है और फिर रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाता है.
श्रंगार भवन मंदिर की परंपरा और खास बातें
श्रंगार भवन मंदिर के अन्य सेवक नीरज गोस्वामी ने बताया कि अयोध्या का यह मंदिर बहुत प्राचीन है. इस मंदिर में रक्षाबंधन के दिन प्रभु राम को भाई माना जाता है और माता जानकी को भाभी के रूप में सम्मान दिया जाता है. इस दिन माता बहन प्रभु राम और माता जानकी को भाभी और भैया मानकर राखी बांधती हैं और देश में अमन-चैन और तरक्की की कामना करती हैं. खास बात यह है कि राखी घर पर ही बनाई जाती है. सबसे पहले भगवान राम और माता जानकी को राखी बांधी जाती है और उसके बाद भाइयों को राखी बांधने जाती हैं. यह परंपरा इस मंदिर में कई वर्षों से चली आ रही है.
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श्रंगार भवन मंदिर के अन्य सेवक नीरज गोस्वामी ने बताया कि अयोध्या का यह मंदिर बहुत प्राचीन है. इस मंदिर में रक्षाबंधन के दिन प्रभु राम को भाई माना जाता है और माता जानकी को भाभी के रूप में सम्मान दिया जाता है. इस दिन माता बहन प्रभु राम और माता जानकी को भाभी और भैया मानकर राखी बांधती हैं और देश में अमन-चैन और तरक्की की कामना करती हैं. खास बात यह है कि राखी घर पर ही बनाई जाती है. सबसे पहले भगवान राम और माता जानकी को राखी बांधी जाती है और उसके बाद भाइयों को राखी बांधने जाती हैं. यह परंपरा इस मंदिर में कई वर्षों से चली आ रही है.
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