‘आधी ट्रॉली बालू, 2 बोरी सीमेंट…’, चंदौली के इस गांव में बनाई जा रही ऐसी सड़क

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‘आधी ट्रॉली बालू, 2 बोरी सीमेंट…’, चंदौली के इस गांव में बनाई जा रही ऐसी सड़क


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Chandauli Ground Report : चंदौली के बिछिया कला में निर्माणाधीन सड़क की गुणवत्ता को लेकर ग्रामीणों में गुस्सा देखा जा रहा है. गांव वालों का कहना है कि मानकों की अनदेखी की जा रही है. बारिश के बीच पानी के अंदर ही ईंट की जोड़ाई कराई जा रही है. जिस मात्र में सीमेंट बालू में मिलाई जा रही है, उसे लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. विरोध के बाद ग्रामीणों ने मौके पर काम रुकवा दिया है. पूर्व प्रधान संजय सिंह ने लोकल 18 से कहा कि इसी गांव में जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी बैठते हैं और जिला मुख्यालय भी यहां से ज्यादा दूर नहीं है. इसके बावजूद ऐसा काम हो रहा है. ग्रामीण सनी सिंह ने कहा कि जिस स्थान पर सड़क का निर्माण कराया जा रहा है, वहां पहले से रास्ता मौजूद था, फिर नया क्यों बनवाया जा रहा है.

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चंदौली. यूपी के चंदौली जिला मुख्यालय से महज 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित बिछिया कला में निर्माणाधीन सड़क की गुणवत्ता को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश है. ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण में मानकों की अनदेखी की जा रही है और बारिश के बीच पानी के अंदर ही ईंट की जोड़ाई कराई जा रही है. निर्माण कार्य में सीमेंट और बालू के इस्तेमाल को लेकर भी ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं. विरोध के बाद ग्रामीणों ने मौके पर सड़क का काम रुकवा दिया है. ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण एजेंसी की ओर से पानी हटाने या स्थल को सुखाने के बजाय उसी में ईंट बिछाने और जोड़ाई करने का काम शुरू कर दिया गया. गांव वालों ने मामले की जांच कराने की मांग की है.

कितने दिन चलेगी ये सड़क

मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने बताया कि सड़क निर्माण के लिए ईंटों को जमीन पर बिछाकर उनके बीच सीमेंट और बालू का मसाला डाला जा रहा था. काम के दौरान पानी निकासी की उचित व्यवस्था नहीं की गई. जब नींव और बेस ही पानी के बीच तैयार किया जाएगा, तो सड़क कितनी मजबूत होगी. ग्रामीणों ने निर्माण स्थल पर इस्तेमाल की जा रही ईंटों की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि मौके पर दिखाई दे रही कुछ ईंटें कमजोर और निम्न गुणवत्ता की हैं. अगर ऐसी सामग्री से सड़क बनाई गई, तो बारिश और आवागमन का दबाव पड़ने पर सड़क जल्द क्षतिग्रस्त हो सकती है.

जनता का पैसा, एक-एक पाई का सदुपयोग हो

पूर्व प्रधान संजय सिंह ने आरोप लगाया कि सड़क निर्माण में मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है. उन्होंने लोकल 18 से कहा कि इसी गांव में जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी बैठते हैं और जिला मुख्यालय भी यहां से ज्यादा दूर नहीं है. इसके बावजूद निर्माण कार्य में लापरवाही दिखाई जा रही है. अगर सरकारी धन से होने वाले निर्माण में गुणवत्ता से समझौता किया जाएगा, तो इसका सीधा नुकसान जनता को होगा. ये जनता का पैसा है, एक-एक पाई का सदुपयोग होना चाहिए. उन्होंने सड़क निर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की गुणवत्ता की जांच कराने की मांग की ताकि यह स्पष्ट हो सके कि काम मानकों के अनुरूप हो रहा है या नहीं.

पुराना रास्ता था, फिर निर्माण की जरूरत क्यों?

ग्रामीण सनी सिंह ने लोकल 18 से बताया कि जिस स्थान पर सड़क का निर्माण कराया जा रहा है, वहां पहले से रास्ता मौजूद था और लोग उसी रास्ते से आवागमन करते थे. पुराने रास्ते की स्थिति को देखने के बाद यह सवाल उठता है कि नए निर्माण की आवश्यकता और इसकी स्वीकृति किस आधार पर दी गई. सनी सिंह ने बताया कि ग्रामीणों को जानकारी मिली है कि इस सड़क के निर्माण पर करीब 75 लाख रुपये खर्च किए जाने हैं. हालांकि उन्हें परियोजना की वास्तविक लागत और स्वीकृत मानकों की आधिकारिक जानकारी नहीं है. ग्रामीणों की मांग है कि संबंधित विभाग मौके पर पहुंचकर निर्माण की गुणवत्ता और स्वीकृत लागत की जांच करें. सीमित मात्रा में सीमेंट बालू के साथ मिलाया जा रहा है और उसी से ईंटों की जोड़ाई की जा रही है.

काम क्यों रुकवाया

काम रुकवाने वाले ग्रामीणों ने कहा कि वे निर्माण कार्य के विरोधी नहीं हैं, लेकिन उन्हें अच्छी और टिकाऊ सड़क चाहिए. सड़क निर्माण निर्धारित मानकों के अनुसार होना चाहिए. ग्रामीणों ने मांग की है कि विभागीय अधिकारी मौके पर पहुंचकर निर्माण सामग्री के नमूने लें, सड़क की गुणवत्ता की जांच कराएं, स्वीकृत एस्टीमेट और मानकों के अनुसार काम की स्थिति की जांच करें.

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Priyanshu Gupta

प्रियांशु गुप्‍ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…

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